केंद्रीय पर्यावरण मंत्री के स्टाफ की छुट्टी: पर्यावरण मंत्रालय की बड़ी कार्रवाई

Diya Gupta
18 घंटे पहलेChunav ke baad sab bhool jaate hain, yahi haqeeqat hai.
Krishna Yadav
22 घंटे पहलेNeta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!
Pihu Agarwal
1 दिन पहलेPehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!
Kunal Rao
1 दिन पहलेChunav ke baad sab bhool jaate hain, yahi haqeeqat hai.
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने एक दुर्लभ प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के पूरे प्रमुख निजी स्टाफ को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। इस फैसले के तहत मंत्री कार्यालय में कार्यरत चार प्रमुख अधिकारियों की सेवाएं समाप्त कर उन्हें उनके मूल विभागों में भेजने अथवा उनकी नियुक्ति समाप्त करने के आदेश जारी किए गए हैं।
चार प्रमुख अधिकारियों पर हुई कार्रवाई
कार्रवाई की जद में निजी सचिव (PS) अमर सिंह, अतिरिक्त निजी सचिव (APS) शैलेश कुमार सिंह, अतिरिक्त निजी सचिव आयुष सारण और सहायक निजी सचिव (Assistant PS) सिद्धार्थ यादव शामिल हैं। सरकारी सेवा से जुड़े अधिकारियों को उनके मूल कैडर में वापस भेजा गया है, जबकि संविदा अथवा राजनीतिक आधार पर नियुक्त अधिकारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।
DoPT ने 'प्रशासनिक आधार' बताया कारण
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) तथा मंत्रालय द्वारा जारी आदेशों में इस कार्रवाई का कारण केवल "प्रशासनिक आधार" बताया गया है। आदेशों में किसी प्रकार की शिकायत, अनियमितता या अन्य वजह का उल्लेख नहीं किया गया, जिससे इस सामूहिक कार्रवाई को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
मूल विभागों में भेजे गए अधिकारी
आदेशों के अनुसार अमर सिंह (IRS) को उनके मूल विभाग राजस्व विभाग में वापस भेज दिया गया है। वहीं शैलेश कुमार सिंह को समय से पहले उनके मूल कैडर DoPT में प्रतिनियुक्ति समाप्त कर लौटाया गया है। आयुष सारण की अतिरिक्त निजी सचिव के रूप में नियुक्ति तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई, जबकि सिद्धार्थ यादव को भी उनके मूल विभाग में वापस भेजा गया है।
मंत्रालय ने नहीं दी कोई आधिकारिक सफाई
यह कार्रवाई 3 जुलाई 2026 के अलग-अलग आदेशों के माध्यम से लागू की गई। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से इस असामान्य कदम पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई। आदेशों की प्रतियां प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), कैबिनेट सचिवालय और DoPT सहित संबंधित विभागों को भी भेजी गई हैं।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में बढ़ी चर्चाएं
केंद्रीय मंत्री के पूरे निजी स्टाफ को एक साथ हटाने जैसी कार्रवाई बेहद दुर्लभ मानी जा रही है। चूंकि सरकार ने इसके पीछे का वास्तविक कारण सार्वजनिक नहीं किया है, इसलिए राजनीतिक और नौकरशाही गलियारों में विभिन्न तरह की अटकलें और चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, अब तक सरकार की ओर से इसे केवल नियमित प्रशासनिक निर्णय बताया गया है।








