विदेशी फंडिंग पर सरकार कसेगी शिकंजा: अमित शाह करेंगे FCRA बिल पर जवाब

Ritika Ghosh
0 सेकंड पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Kavya Mishra
0 सेकंड पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Tanya Bajaj
0 सेकंड पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Myra Dubey
0 सेकंड पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Kunal Rao
0 सेकंड पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Simran Arora
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Neel Saxena
0 सेकंड पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Diya Gupta
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Ishaan Tiwari
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Vihaan Patel
0 सेकंड पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Pihu Agarwal
0 सेकंड पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Shruti Bajpai
0 सेकंड पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Priya Iyer
0 सेकंड पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Sonu rai
0 सेकंड पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Riya Jain
0 सेकंड पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Simran Arora
0 सेकंड पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Trapti Tanwar
0 सेकंड पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Anika Rajput
0 सेकंड पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Aarohi Chaudhary
0 सेकंड पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Neel Saxena
0 सेकंड पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Aryan Malhotra
0 सेकंड पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Neha Tripathi
0 सेकंड पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Harsh Pandya
0 सेकंड पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
संसद के मानसून सत्र में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 यानी FCRA Amendment Bill को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। केंद्र सरकार विदेशी फंडिंग के नियमों को और सख्त बनाने की तैयारी में है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस विधेयक पर सदन में सरकार का पक्ष रख सकते हैं।
विदेशी फंडिंग पर बढ़ेगी सरकारी निगरानी
केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे इस संशोधन विधेयक का उद्देश्य विदेशी धन प्राप्त करने वाले गैर सरकारी संगठनों (NGOs), ट्रस्टों और संस्थानों में पारदर्शिता बढ़ाना है।सरकार का कहना है कि विदेशी फंड का इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों, सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने या अवैध गतिविधियों में नहीं होना चाहिए।नए नियमों के तहत विदेशी धन के उपयोग और खर्च की जानकारी को डिजिटल माध्यम से अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा।हर संस्था को विदेशी फंड के इस्तेमाल का विस्तृत रिकॉर्ड रखना होगा।
FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द होने पर बनेगा नया प्रावधान
FCRA संशोधन विधेयक में नामित प्राधिकरण (Designated Authority) बनाने का प्रस्ताव है।यदि किसी संस्था का FCRA लाइसेंस रद्द या निलंबित किया जाता है तो विदेशी फंड से बनी संपत्तियों की निगरानी विशेष अधिकारी के जरिए की जा सकेगी।सरकार का दावा है कि इससे विदेशी धन के गलत इस्तेमाल पर रोक लगेगी।वहीं, प्रभावित संस्थाओं को कानूनी प्रक्रिया के तहत अपील का अधिकार भी दिया जाएगा।
अमित शाह ने बताया नहीं होगा पूर्वव्यापी असर
गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि FCRA संशोधन पुराने मामलों पर लागू नहीं होगा।उन्होंने कहा कि कानून को पिछली घटनाओं पर लागू करने की कोई व्यवस्था नहीं होगी।यदि किसी संस्था पर कार्रवाई होती है तो उसे कानूनी अपील के लिए 12 महीने का समय दिया जाएगा।सरकार ने इसे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने वाला कदम बताया है।
विपक्ष ने बिल को बताया कठोर, संसद में हंगामे के आसार
FCRA Amendment Bill को लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है।कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि इस कानून से सामाजिक संस्थाओं और सिविल सोसायटी की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।विपक्ष का कहना है कि सरकार NGO और सामाजिक संगठनों पर अतिरिक्त नियंत्रण स्थापित करना चाहती है।NEET पेपर लीक सहित अन्य मुद्दों पर पहले से चल रहे हंगामे के बीच इस बिल पर बहस और तेज होने की संभावना है।
अमेरिका में भी उठे सवाल, सरकार ने किया बचाव
FCRA संशोधन विधेयक को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा शुरू हो गई है।कुछ अमेरिकी सांसदों ने इस कानून को लेकर चिंता जताई है और धार्मिक संस्थाओं पर असर पड़ने की आशंका व्यक्त की है।वहीं भारतीय पक्ष का कहना है कि विदेशी फंडिंग से जुड़े नियम बनाना भारत का आंतरिक मामला है।सरकार ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मानसून सत्र में बिल पास कराने की तैयारी तेज
केंद्र सरकार इस विधेयक को मौजूदा मानसून सत्र में पारित कराने की कोशिश में जुटी है।संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संकेत दिया है कि सरकार विधायी कामकाज को आगे बढ़ाना चाहती है।विपक्ष के साथ बातचीत कर संसद में गतिरोध खत्म करने के प्रयास भी जारी हैं।अब सभी की नजरें संसद में होने वाली बहस और अमित शाह के जवाब पर टिकी हैं।






