संसद में अमित शाह को बुलाने की मांग पर हंगामा: खरगे की मांग, गृह मंत्री दें सदन में जवाब

खरगे की मांग, गृह मंत्री दें सदन में जवाब
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Sai Mehta

Sai Mehta

0 सेकंड पहले

Har Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.

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संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में विपक्ष ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सदन में बुलाने की मांग तेज कर दी। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्षी सांसदों के साथ राज्यसभा सभापति से मुलाकात कर कहा कि छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार को सदन में जवाब देना चाहिए। विपक्ष का कहना है कि संसद में सार्थक चर्चा तभी संभव होगी जब सरकार इन सवालों पर स्पष्ट रुख रखे।


खरगे ने उठाए छात्रों के मुद्दे
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि छात्रों के विरोध प्रदर्शनों और कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार जवाबदेह है। उन्होंने मांग की कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर आधिकारिक बयान दें और देश के छात्रों से जुड़े मामलों पर सरकार की स्थिति स्पष्ट करें। विपक्ष का आरोप है कि सरकार चर्चा से बच रही है, जिससे संसद की कार्यवाही लगातार प्रभावित हो रही है।


सभापति ने दिया संदेश पहुंचाने का निर्देश
राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन से मुलाकात के बाद विपक्ष ने अपनी मांग औपचारिक रूप से रखी। सभापति ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को निर्देश दिया कि वे विपक्ष की भावनाओं और गृह मंत्री को सदन में बुलाने के अनुरोध से अमित शाह को अवगत कराएं। विपक्ष ने इसे सकारात्मक कदम बताया और उम्मीद जताई कि सरकार इस पर उचित निर्णय लेगी।

 

किरेन रिजिजू का पलटवार
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष किसी मंत्री को सदन में बुलाने का आदेश नहीं दे सकता। उन्होंने कहा कि विपक्ष केवल अनुरोध कर सकता है, जबकि सरकार यह तय करती है कि किस विषय पर कौन मंत्री जवाब देगा। रिजिजू ने यह भी कहा कि गृह मंत्री अमित शाह संसद परिसर में लगातार मौजूद रहते हैं और विपक्ष ही सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है।


संसद में जारी रहा गतिरोध
विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के चलते राज्यसभा की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। विपक्ष ने सरकार पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने विपक्ष पर राजनीतिक प्रदर्शन करने का आरोप लगाया। दोनों पक्षों के टकराव के कारण सदन का सामान्य कामकाज प्रभावित हुआ और महत्वपूर्ण विधायी कार्यों पर भी असर पड़ा।


मानसून सत्र में बढ़ सकता है राजनीतिक टकराव
संसद के मानसून सत्र के शुरुआती दिनों से ही लगातार हंगामे के बीच यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ सकता है। छात्र आंदोलन, कानून-व्यवस्था और अन्य राजनीतिक मुद्दों को लेकर विपक्ष सरकार को लगातार घेरने की तैयारी में है, जबकि सरकार विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है। इससे आगामी बैठकों के भी हंगामेदार रहने के आसार हैं।

 

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