'विदेशी लुटेरों जैसी है भाजपा' - अखिलेश: अखिलेश का BJP पर बड़ा हमला
Neha Tripathi
1 घंटे पहलेNishpaksh patrakarita ke liye shukriya, aise media chahiye.
Aarohi Chaudhary
1 घंटे पहलेIs khabar ko sahi tarike se cover kiya gaya hai.
Pranav Srivastava
2 घंटे पहलेIs maamle mein sarkari paksh kya hai?
Sonu rai
2 घंटे पहलेYeh khabar bahut important hai, sabko pata honi chahiye!
Harsh Pandya
2 घंटे पहलेYeh khabar bahut important hai, sabko pata honi chahiye!
Monika Das
2 घंटे पहलेYeh news bahut zaroori hai public ke liye.
Vivaan Gupta
2 घंटे पहलेIs maamle mein sarkari paksh kya hai?
Ada khan
2 घंटे पहलेChunav ke baad sab bhool jaate hain, yahi haqeeqat hai.
Sneha Menon
3 घंटे पहलेYeh news bahut zaroori hai public ke liye.
Harsh Pandya
6 घंटे पहलेNeta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!
Aryan Malhotra
6 घंटे पहलेYeh news bahut zaroori hai public ke liye.
Riya Jain
6 घंटे पहलेSarkar ko public ko jawab dena chahiye.
Pooja Reddy
6 घंटे पहलेNeta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!
Anil Sen
7 घंटे पहलेYeh news bahut zaroori hai public ke liye.
संसद सत्र शुरू होने से पहले केंद्र पर सपा का हमला
संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार (20 जुलाई 2026) को मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने देश में छात्रों के आंदोलनों, शिक्षा व्यवस्था और हालिया घटनाक्रमों का हवाला देते हुए सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए।
BJP की तुलना 'विदेशी लुटेरों' से की
अखिलेश यादव ने कहा कि इतिहास में विदेशी आक्रमणकारियों ने भारत के मंदिरों और शिक्षण संस्थानों को नुकसान पहुंचाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि आज भाजपा भी "शिक्षा के मंदिरों" को कमजोर कर रही है। सपा प्रमुख के अनुसार, सरकार की नीतियां शिक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं के हित में नहीं हैं।
छात्र आंदोलनों और NEET विवाद का उठाया मुद्दा
सपा प्रमुख ने NEET परीक्षा विवाद, पेपर लीक और दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि लोकतंत्र में युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनसे संवाद होना चाहिए।
'अंग्रेजों से भी ज्यादा कठोर व्यवहार' का आरोप
अखिलेश यादव ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल को लेकर भी केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ जिस प्रकार का व्यवहार हुआ, वैसा व्यवहार अंग्रेजों के शासनकाल में भी देखने को नहीं मिला। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताया।
जौहर यूनिवर्सिटी कार्रवाई का भी किया जिक्र
सपा अध्यक्ष ने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे "शिक्षा के मंदिर" पर कार्रवाई बताते हुए कहा कि सरकार राजनीतिक द्वेष की भावना से फैसले ले रही है। उन्होंने शिक्षा संस्थानों की सुरक्षा और स्वतंत्रता पर भी चिंता व्यक्त की।
बयान से गरमाई सियासत, जवाब का इंतजार
अखिलेश यादव के इस बयान के बाद संसद सत्र की शुरुआत से पहले राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। यह विपक्ष की ओर से केंद्र सरकार पर लगाया गया राजनीतिक आरोप है। इन टिप्पणियों पर भारतीय जनता पार्टी या केंद्र सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है। संसद के दौरान इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना जताई जा रही है।








