सिक्किम टनल हादसे में 8 मजदूरों की मौत: मीथेन गैस ने मुश्किल किया रेस्क्यू ऑपरेशन

मीथेन गैस ने मुश्किल किया रेस्क्यू ऑपरेशन
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Aarohi Chaudhary

Aarohi Chaudhary

0 सेकंड पहले

Peedit logo ke saath poori tarah sahmat hoon.

Ayaan Khan

Ayaan Khan

0 सेकंड पहले

Jab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.

Yash Kulkarni

Yash Kulkarni

0 सेकंड पहले

Aam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.

Payal jadon

Payal jadon

0 सेकंड पहले

Yeh haalat bahut chintajanak hai, jaldi karyawahi ho.

Aditya Verma

Aditya Verma

0 सेकंड पहले

Yeh mamla sabke saath ho sakta hai, jaagrukata zaroori.

Nidhi kumari

Nidhi kumari

0 सेकंड पहले

Aise logon ko support karna humara farz hai.

Vaishali shinde

Vaishali shinde

0 सेकंड पहले

Peedit logo ke saath poori tarah sahmat hoon.

Sai Mehta

Sai Mehta

0 सेकंड पहले

Yeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.

Aryan Malhotra

Aryan Malhotra

31 मिनट पहले

Hum is cause ke saath hain!

Neha Tripathi

Neha Tripathi

1 घंटे पहले

Aam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.

Trapti Tanwar

Trapti Tanwar

1 घंटे पहले

Community ko mil ke aage aana hoga is mudde par.

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सिक्किम के नामची जिले के समरदुंग (झोलुंगे) क्षेत्र में स्थित एनएचपीसी की तीस्ता स्टेज-VI जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में हुए हादसे में अब तक 8 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। जिला प्रशासन के अनुसार, राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है और सुरंग के भीतर फंसे अन्य मजदूरों तक सुरक्षित पहुंचने के प्रयास किए जा रहे हैं।


मीथेन गैस बनी सबसे बड़ी चुनौती
अधिकारियों के मुताबिक सुरंग के भीतर मीथेन गैस का स्तर बेहद अधिक है, जिससे बचाव अभियान काफी कठिन हो गया है। गैस की वजह से कई बार रेस्क्यू टीमों को बीच रास्ते से ही लौटना पड़ा। पश्चिम बंगाल से विशेष गैस-प्रोटेक्टिव उपकरणों से लैस विशेषज्ञ दल भी मौके पर पहुंचा है। बचावकर्मी गैस मास्क और अन्य सुरक्षा उपकरणों की मदद से अंदर पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं।


गैस निकालने के दौरान हुआ विस्फोट, फिर हुआ भूस्खलन
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सुरंग के प्रवेश द्वार से करीब 1.5 किलोमीटर भीतर मीथेन गैस जमा हो गई थी। गैस को बाहर निकालने की प्रक्रिया के दौरान विस्फोट जैसी स्थिति बनी, जिसके बाद सुरंग के भीतर भूस्खलन हो गया और बाहर निकलने का रास्ता बंद हो गया। कुछ मजदूर समय रहते बाहर निकल आए, जबकि कई अंदर ही फंस गए।

 

अब तक 12 मजदूर सुरक्षित निकाले गए
राहत एवं बचाव दल ने अब तक 12 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की है। वहीं, प्रशासन का अनुमान है कि अभी भी 18 से 19 मजदूर सुरंग के भीतर फंसे हो सकते हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि अंदर मौजूद लोगों की अंतिम संख्या की पुष्टि तभी हो सकेगी, जब बचाव दल प्रभावित हिस्से तक पहुंच जाएगा।


NDRF, SDRF और अन्य एजेंसियां मोर्चे पर
घटनास्थल पर NDRF, SDRF, जिला पुलिस, फायर एंड इमरजेंसी सर्विस तथा अन्य विशेषज्ञ एजेंसियां संयुक्त रूप से राहत अभियान चला रही हैं। सुरंग के भीतर ऑक्सीजन की कमी और जहरीली गैस के कारण वेंटिलेशन सिस्टम को बेहतर बनाने का काम भी समानांतर रूप से जारी है। कई एंबुलेंस और मेडिकल टीमें भी मौके पर तैनात हैं।


प्रशासन की पहली प्राथमिकता फंसे मजदूरों को बचाना
नामची जिला कलेक्टर अनुपा तामलिंग ने कहा कि फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता सुरंग के भीतर फंसे सभी लोगों तक सुरक्षित पहुंचना और उन्हें बाहर निकालना है। उन्होंने बताया कि जब तक बचाव दल प्रभावित स्थान तक नहीं पहुंच जाता, तब तक अंदर की वास्तविक स्थिति और फंसे लोगों की संख्या की अंतिम पुष्टि नहीं की जा सकती। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।

 

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Aryan Malhotra

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Neha Tripathi

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Trapti Tanwar

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1 घंटे पहले

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