CJI Surya Kant On Judicial Accountability: जांच से बाहर नहीं हो सकती न्यायपालिका-CJI सूर्यकांत

जांच से बाहर नहीं हो सकती न्यायपालिका-CJI सूर्यकांत
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Anil Sen

Anil Sen

0 सेकंड पहले

Bharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.

Krishna Yadav

Krishna Yadav

0 सेकंड पहले

Desh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.

Taushif Shekh

Taushif Shekh

0 सेकंड पहले

Is decision ka poore desh par seedha asar padega.

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मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका खुद को जांच और आलोचना से बाहर रखकर जनता का विश्वास हासिल नहीं कर सकती। नई दिल्ली में छठे राम जेठमलानी स्मृति व्याख्यान को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि न्यायपालिका किसी भी संस्था की तरह निरंतर समीक्षा और आत्मसुधार के लिए खुली रहनी चाहिए। उनके मुताबिक निष्पक्ष, सूचनापूर्ण और रचनात्मक आलोचना संवैधानिक लोकतंत्र का जरूरी हिस्सा है। उन्होंने कहा कि न्यायिक कामकाज पर सवाल उठना अपने आप में संस्थान के खिलाफ नहीं है, बल्कि इससे जवाबदेही और सुधार की प्रक्रिया मजबूत हो सकती है। CJI ने पारदर्शिता को न्यायपालिका में जनता के भरोसे से सीधे जोड़ते हुए यह बात कही।


जनता का भरोसा ही असली करेंसी
CJI सूर्यकांत ने न्यायपालिका की संस्थागत ताकत को लेकर कहा कि अदालतों के पास न तो सरकार के दूसरे अंगों जैसी “तलवार की ताकत” है और न ही “खजाने की ताकत”, ऐसे में जनता का विश्वास ही न्यायपालिका की सबसे बड़ी ताकत और असली करेंसी है। उन्होंने कहा कि यह भरोसा एक बार हासिल करके हमेशा के लिए सुरक्षित नहीं हो जाता, बल्कि अदालतों के रोजमर्रा के कामकाज और हर मामले में लोगों के अनुभव से लगातार बनता रहता है। उनके अनुसार न्यायपालिका को अपने फैसलों और उनके पीछे दिए गए कारणों के माध्यम से पारदर्शिता कायम रखनी चाहिए। यही प्रक्रिया संस्थान के प्रति लंबे समय तक भरोसा मजबूत करती है।


पसंद का फैसला नहीं, निष्पक्ष प्रक्रिया जरूरी
मुख्य न्यायाधीश ने सार्वजनिक भरोसे और जनता की पसंद के बीच अंतर को भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि किसी अदालत पर लोगों का भरोसा केवल इसलिए नहीं बनता कि वह उनके मन मुताबिक फैसला देती है। भरोसा उस समय मजबूत होता है जब किसी मामले में हारने वाला व्यक्ति भी अदालत से यह महसूस करते हुए बाहर निकले कि उसके साथ निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाई गई। CJI ने इस बात पर जोर दिया कि न्यायपालिका की विश्वसनीयता का आधार फैसले का परिणाम भर नहीं, बल्कि पूरी न्यायिक प्रक्रिया और उसके पीछे दिए गए कारण भी हैं। इस दृष्टिकोण के जरिए उन्होंने न्यायिक पारदर्शिता और संस्थागत विश्वसनीयता के बीच संबंध को रेखांकित किया।

 

निरंतर सुधार को बताया जरूरी
अपने संबोधन में CJI सूर्यकांत ने न्यायपालिका में सुधार को एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया बताया। उन्होंने कहा कि कोई भी संस्थान स्थिर रहकर लंबे समय तक प्रभावी नहीं रह सकता और सुधार को सामान्य प्रक्रिया के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पारदर्शिता का मतलब हर संस्थागत या प्रशासनिक विषय को सार्वजनिक मंच पर उठाना नहीं है, क्योंकि कुछ मुद्दों को उचित संस्थागत व्यवस्था के भीतर ही संबोधित करना जरूरी हो सकता है। इसके बावजूद उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका को सवालों, जांच और उचित आलोचना से खुद को अलग नहीं करना चाहिए।


जजों की शिकायतों पर भी चर्चा
व्याख्यान के दौरान न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों और उन्हें संभालने की मौजूदा व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। CJI सूर्यकांत ने न्यायाधीशों से संबंधित शिकायतों के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में मौजूद तंत्र का उल्लेख करते हुए संस्थागत प्रक्रिया की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या हर शिकायत को सीधे सार्वजनिक कर देना उचित होगा, क्योंकि शिकायत और आरोप अपने आप में किसी व्यक्ति के खिलाफ स्थापित तथ्य नहीं होते। इस मुद्दे को न्यायिक स्वतंत्रता, जवाबदेही और पारदर्शिता के बीच संतुलन के संदर्भ में देखा जा रहा है। उनका संदेश था कि सुधार जरूरी है, लेकिन संस्थागत प्रक्रियाओं की अपनी भूमिका भी बनी रहनी चाहिए।


पारदर्शिता से ही मजबूत होगा जनविश्वास
CJI सूर्यकांत का पूरा संबोधन न्यायपालिका में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता के भरोसे के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को अपने कामकाज को लेकर सवालों और रचनात्मक आलोचना के लिए खुला रहना चाहिए, क्योंकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संस्थानों की विश्वसनीयता लगातार अर्जित की जाती है। उन्होंने न्यायिक सुधार को भी एक सतत प्रक्रिया बताया और कहा कि किसी संस्था के लिए लंबे समय तक एक ही स्थिति में बने रहना उचित नहीं है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब न्यायपालिका की पारदर्शिता, जवाबदेही और संस्थागत सुधार को लेकर सार्वजनिक बहस लगातार जारी है। CJI का जोर इस बात पर रहा कि न्यायपालिका की सबसे बड़ी पूंजी जनता का विश्वास है और इसे लगातार मजबूत करना जरूरी है।

 

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Anil Sen

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Bharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.

Krishna Yadav

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0 सेकंड पहले

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Taushif Shekh

Taushif Shekh

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Is decision ka poore desh par seedha asar padega.

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