यूपी में PDA पर सियासी घमासान: राजभर के बयान पर अखिलेश खेमा हमलावर

Priya Iyer
0 सेकंड पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Aarav Sharma
0 सेकंड पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Sonu rai
0 सेकंड पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Arjun Singh
0 सेकंड पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Myra Dubey
0 सेकंड पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Ananya Sharma
0 सेकंड पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Shruti Bajpai
0 सेकंड पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Taushif Shekh
0 सेकंड पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Rohan Desai
0 सेकंड पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Yash Kulkarni
0 सेकंड पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
उत्तर प्रदेश की राजनीति में PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फॉर्मूले को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले पर तीखा हमला बोला है। राजभर के बयान के बाद सपा समेत विपक्षी दलों ने भी पलटवार किया है।
राजभर ने PDA का बताया नया मतलब
बलरामपुर की एक घटना का जिक्र करते हुए ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि एक विशेष समुदाय के लोगों द्वारा यादव समुदाय के कुछ युवकों के साथ मारपीट की गई। इसी संदर्भ में राजभर ने PDA का नया और विवादित अर्थ बताते हुए "पीट देगा अल्पसंख्यक" जैसी टिप्पणी की।राजभर ने समाजवादी पार्टी के शासनकाल की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और अखिलेश यादव की सामाजिक समीकरणों की राजनीति पर हमला बोला।
पंडित-यादव' समीकरण पर भी तंज
ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव की ओर से PDA के 'P' को 'पंडित' से जोड़ने की चर्चाओं पर भी तंज कसा। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी का पुराना PDA फॉर्मूला कमजोर पड़ चुका है और अब पार्टी नए सामाजिक समीकरण तैयार करने की कोशिश कर रही है।राजभर के मुताबिक, सपा की ओर से अलग-अलग सामाजिक समूहों को जोड़ने के प्रयास उसकी बदलती राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हैं।
सपा ने राजभर पर किया पलटवार
राजभर के बयान पर समाजवादी पार्टी की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि PDA फॉर्मूले को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन में बेचैनी है। पार्टी का कहना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में PDA के प्रदर्शन के बाद भाजपा और उसके सहयोगी दल इस सामाजिक समीकरण को लेकर चिंतित हैं।सपा नेताओं ने राजभर के बयान को राजनीतिक बयानबाजी करार देते हुए कहा कि ऐसे बयानों से वास्तविक जन मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है।
AIMIM ने भी उठाए सवाल
राजभर की टिप्पणी पर AIMIM की ओर से भी आपत्ति जताई गई। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता असीम वकार ने उनके बयान को लेकर सवाल उठाए और कहा कि यदि किसी समुदाय पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं तो उनके समर्थन में ठोस तथ्य और प्रमाण सामने रखे जाने चाहिए।उन्होंने राजनीतिक नेताओं से सामाजिक सौहार्द बनाए रखने वाली भाषा का इस्तेमाल करने की अपील भी की।
NDA खेमे ने PDA पर साधा निशाना
दूसरी ओर, भाजपा और NDA से जुड़े नेताओं ने भी अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले पर हमला जारी रखा। विपक्षी गठबंधन के सामाजिक समीकरण पर निशाना साधते हुए भाजपा नेताओं ने PDA को 'परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी' तक बताया और आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य समाज के बजाय एक सीमित राजनीतिक और पारिवारिक हितों को साधना है।इस बयानबाजी के जरिए सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं।
आगामी चुनावी समीकरणों पर नजर
उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय और सामाजिक समीकरण हमेशा से चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा रहे हैं। ऐसे में PDA को लेकर छिड़ी बहस का असर आने वाले चुनावी माहौल पर भी पड़ सकता है। एक तरफ समाजवादी पार्टी PDA के जरिए पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को जोड़ने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा और उसके सहयोगी दल इस फॉर्मूले को चुनौती देने के लिए अलग सामाजिक समीकरणों पर जोर दे रहे हैं।राजभर की टिप्पणी ने इसी सियासी टकराव को और तेज कर दिया है।






