Bypoll Results Today: बंगाल, तमिलनाडु, असम और पुडुचेरी में उपचुनाव के नतीजे आज

Arjun Singh
0 सेकंड पहलेNeta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!
Tanya Bajaj
0 सेकंड पहलेSarkar ko public ko jawab dena chahiye.
Trapti Tanwar
0 सेकंड पहलेYeh khabar bahut important hai, sabko pata honi chahiye!
Diya Gupta
0 सेकंड पहलेSarkar ko public ko jawab dena chahiye.
Pranav Srivastava
0 सेकंड पहलेNeta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!
Trapti Tanwar
1 मिनट पहलेNeta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!
ह सीटों पर उपचुनाव के नतीजे आज
पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम और पुडुचेरी में हुए उपचुनावों के नतीजे आज घोषित किए जाएंगे। पांच विधानसभा सीटों और एक लोकसभा सीट के लिए मतगणना सुबह 8 बजे से शुरू होगी। इन परिणामों पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ देशभर की नजर है, क्योंकि इनके जरिए संबंधित राज्यों की राजनीति के मौजूदा रुझानों और प्रमुख दलों के प्रदर्शन के संकेत मिल सकते हैं। खास तौर पर पश्चिम बंगाल में भाजपा और तमिलनाडु में टीवीके सरकार के लिए ये नतीजे महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
किन सीटों पर हुआ था मतदान?
6 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर, तमिलनाडु की मदुरंताकम और धारापुरम तथा पुडुचेरी की थट्टनचावड़ी विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ था। इसके अलावा असम की नागांव लोकसभा सीट पर भी वोट डाले गए थे। अब मतगणना के बाद इन सभी सीटों पर उम्मीदवारों की चुनावी किस्मत का फैसला होगा।
पश्चिम बंगाल: भाजपा के प्रदर्शन पर नजर
पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर के परिणामों को खास अहमियत दी जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, 15 साल बाद तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से हटाकर भाजपा के सरकार बनाने के बाद यह उपचुनाव उसके प्रदर्शन की महत्वपूर्ण परीक्षा माना जा रहा है। दोनों सीटों पर लगभग 80 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। नतीजों से यह संकेत मिल सकता है कि सत्ता में आने के बाद भाजपा को स्थानीय स्तर पर कितना समर्थन मिल रहा है।
नंदीग्राम और रेजीनगर में मुकाबला
नंदीग्राम का पश्चिम बंगाल की राजनीति में ऐतिहासिक महत्व रहा है। वर्ष 2011 में भूमि अधिग्रहण के विरोध में हुए आंदोलन ने राज्य की राजनीति को प्रभावित किया था। रिपोर्ट के अनुसार, सुवेंदु अधिकारी 2021 और 2026 में इस सीट से जीत चुके थे। इस बार भाजपा ने हसीरानी राठ को उम्मीदवार बनाया। उनके बेटे चंद्रनाथ राठ की भाजपा की जीत के दो दिन बाद गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
नंदीग्राम में विपक्षी खेमे में भी एकजुटता नहीं दिखी। ममता बनर्जी गुट ने अपना उम्मीदवार वापस लेकर कांग्रेस के मिलन प्रधान का समर्थन किया, जबकि रिताब्रत बनर्जी गुट अलग चुनाव लड़ रहा है। रेजीनगर में भाजपा, तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों, कांग्रेस और सीपीआई(एम) के उम्मीदवार मैदान में हैं। रिपोर्ट में हुमायूं कबीर के बेटे गोलम नबी आजाद का नाम भी प्रमुख उम्मीदवारों में शामिल बताया गया है।
तमिलनाडु: टीवीके सरकार की पहली चुनावी परीक्षा
तमिलनाडु की मदुरंताकम और धारापुरम विधानसभा सीटों के नतीजे टीवीके सरकार के लिए अहम माने जा रहे हैं। पार्टी ने मई में सत्ता संभाली थी और ये उपचुनाव उसके लिए पहली महत्वपूर्ण चुनावी परीक्षा हैं। एआईएडीएमके दोनों सीटों पर फिर से जीत हासिल करना चाहती है, जो अप्रैल के विधानसभा चुनाव में टीवीके के खाते में गई थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, मदुरंताकम में 86.26 प्रतिशत और धारापुरम में 80.30 प्रतिशत मतदान हुआ। अब परिणामों से राज्य में टीवीके के समर्थन और विपक्षी दलों की स्थिति के बारे में संकेत मिल सकते हैं।
असम: नागांव लोकसभा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला
असम की नागांव लोकसभा सीट पर भाजपा, कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच मुकाबला बताया गया है। भाजपा के देवाशीष शर्मा, कांग्रेस की सिबामोनी बोरा और एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं। यह सीट कांग्रेस सांसद प्रद्युत बरदोलोई के पार्टी छोड़ने के बाद खाली हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, बरदोलोई ने भाजपा में शामिल होने के बाद दिसपुर विधानसभा सीट से जीत हासिल की। नागांव में लगभग 76 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था।
पुडुचेरी: थट्टनचावड़ी सीट पर फैसला
पुडुचेरी की थट्टनचावड़ी विधानसभा सीट पर 80.8 प्रतिशत मतदान हुआ। यह सीट मुख्यमंत्री एन. रंगासामी के इसे छोड़कर मंगलम सीट अपने पास रखने के बाद खाली हुई थी। उपचुनाव का परिणाम इस सीट पर नए प्रतिनिधि का फैसला करेगा और केंद्रशासित प्रदेश की राजनीति से जुड़े संकेत भी दे सकता है।
नतीजों से क्या संकेत मिल सकते हैं?
इन उपचुनावों के परिणामों से पश्चिम बंगाल में भाजपा की राजनीतिक स्थिति, तमिलनाडु में टीवीके सरकार के शुरुआती समर्थन और असम में प्रमुख दलों के बीच मुकाबले की दिशा का आकलन किया जा सकेगा। हालांकि, उपचुनावों के नतीजों को संबंधित सीटों और स्थानीय परिस्थितियों के संदर्भ में देखना जरूरी होगा। मतगणना पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि किन उम्मीदवारों को जीत मिली और इन परिणामों का राज्यों की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है।








