Narwail Management and Organic Farming: कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने किसान संगठनों से की अपील, नरवाई नहीं जलाने और जैविक खेती अपनाने के लिए किसानों को करें जागरूक

Pranav Srivastava
12 घंटे पहलेYeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.
Rohan Desai
13 घंटे पहलेYeh samajik mudda bahut gambhir hai, dhyan dena zaroori hai.
Dhruv Bhatt
14 घंटे पहलेYeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.
Sneha Menon
16 घंटे पहलेCommunity ko mil ke aage aana hoga is mudde par.
Aarohi Chaudhary
17 घंटे पहलेYeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.
Sonu rai
18 घंटे पहलेAise logon ko support karna humara farz hai.
भोपाल। पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए भोपाल जिले में नरवाई प्रबंधन, जैविक खेती और स्वामित्व योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया जा रहा है। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने किसान संगठनों के पदाधिकारियों से किसानों को नरवाई नहीं जलाने, फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने और जैविक खेती अपनाने के लिए जागरूक करने का आह्वान किया। इसके साथ ही स्वामित्व योजना के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को उनकी आवासीय संपत्ति के दस्तावेजी अधिकार उपलब्ध कराने और ग्राम पंचायतों की विकास योजनाओं को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान के प्रति करें जागरूक
नरवाई जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने और पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में कलेक्टर प्रियंक मिश्रा की अध्यक्षता में किसान संगठनों के पदाधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण और मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के साथ नरवाई प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों पर चर्चा की गई।
कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से अपील की कि वे गांवों में किसानों के बीच पहुंचकर नरवाई नहीं जलाने के लिए जागरूकता अभियान चलाएं। उन्होंने फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन, आधुनिक कृषि उपकरणों के उपयोग और पूसा डीकंपोजर जैसे विकल्पों को अपनाने के लिए किसानों को प्रेरित करने पर जोर दिया।
नरवाई का उचित प्रबंधन करने से वायु प्रदूषण कम करने, मिट्टी में उपयोगी सूक्ष्मजीवों को सुरक्षित रखने और कृषि भूमि की उत्पादकता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इसलिए किसानों को फसल अवशेष जलाने के बजाय उनके उपयोग के वैकल्पिक तरीकों की जानकारी देना जरूरी है।
जैविक खेती से बढ़ेगी मिट्टी की उर्वरा शक्ति
नरवाई प्रबंधन के साथ जैविक खेती को बढ़ावा देना भी टिकाऊ कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। फसल अवशेषों, गोबर और अन्य जैविक पदार्थों से खाद तैयार कर खेतों में उपयोग करने से मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरा शक्ति बनाए रखने में सहायता मिलती है।
किसानों को जैविक खाद बनाने, फसल चक्र अपनाने और कृषि संसाधनों का संतुलित उपयोग करने के प्रति जागरूक करना आवश्यक है। नरवाई को जलाने के बजाय उचित तरीके से खेत में मिलाने या अन्य उपयोगी विधियों से उसका प्रबंधन करने पर मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
किसान संगठनों और ग्राम स्तर पर सक्रिय समूहों की सहभागिता से जैविक खेती के लाभों और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाई जा सकती है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ खेती को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने में मदद मिलेगी।
स्वामित्व योजना से ग्रामीणों को मिलेगा संपत्ति का दस्तावेजी अधिकार
ग्रामीण परिवारों को उनकी आवासीय संपत्ति का दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा स्वामित्व योजना संचालित की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 अप्रैल 2020 को इस योजना की शुरुआत की थी।
योजना के अंतर्गत ड्रोन तकनीक की मदद से ग्रामीण आबादी क्षेत्रों का सर्वेक्षण कर संपत्ति अभिलेख तैयार किए जाते हैं। इसके आधार पर पात्र हितग्राहियों को प्रॉपर्टी कार्ड उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे उन्हें अपनी आवासीय संपत्ति के स्वामित्व का दस्तावेजी प्रमाण मिलता है।
प्रॉपर्टी कार्ड से संपत्ति संबंधी विवादों को कम करने और अभिलेखों को व्यवस्थित रखने में मदद मिल सकती है। बैंक के नियमों और पात्रता शर्तों के अधीन इन दस्तावेजों का उपयोग ऋण प्राप्त करने के लिए भी किया जा सकता है। इससे ग्रामीण परिवारों को स्वरोजगार और छोटे व्यवसाय शुरू करने के अवसर मिल सकते हैं।
डिजिटल रिकॉर्ड से ग्राम पंचायतों के विकास को मिलेगी मजबूती
स्वामित्व योजना के अंतर्गत तैयार डिजिटल मानचित्र और संपत्ति अभिलेख ग्राम पंचायतों को विकास योजनाएं तैयार करने में सहायता करते हैं। व्यवस्थित रिकॉर्ड से संपत्तियों की पहचान, प्रशासनिक पारदर्शिता और नियमानुसार संपत्ति कर निर्धारण की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा ग्राम पंचायतों को स्थानीय संसाधनों का आकलन करने और विकास कार्यों की प्राथमिकताएं निर्धारित करने में भी सुविधा मिलती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाबद्ध विकास को बढ़ावा देने और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है।
जनभागीदारी से पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास को मिलेगा बढ़ावा
भोपाल जिले में नरवाई प्रबंधन, जैविक खेती और स्वामित्व योजना जैसे प्रयास पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। नरवाई का उचित प्रबंधन और जैविक खेती मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायक हैं, जबकि स्वामित्व योजना ग्रामीण परिवारों को संपत्ति संबंधी दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध कराने में मदद करती है।
इन प्रयासों को प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन, किसान संगठनों, ग्राम पंचायतों और ग्रामीणों के बीच समन्वय तथा निरंतर जनजागरूकता आवश्यक है। सामूहिक सहभागिता से पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहन देने, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करने और ग्रामीण परिवारों के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तीकरण की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।








