त्रिपुरा के स्कूलों में 'वंदे मातरम्' अनिवार्य: माणिक साहा का बड़ा फैसला, देशभक्ति गीत होंगे अनिवार्य

Anil Sen
19 घंटे पहलेYeh mamla sabke saath ho sakta hai, jaagrukata zaroori.
Nidhi kumari
1 दिन पहलेYeh mudda rajneeti se upar hai, insaniyat ki baat hai.
Ananya Sharma
1 दिन पहलेHum is cause ke saath hain!
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने घोषणा की है कि अब राज्य के सभी स्कूलों में 'वंदे मातरम्' और 'जन-गण-मन' के पूर्ण आधिकारिक संस्करण का सामूहिक गायन अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री ने इस नई नीति की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से साझा करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करना है।
हर दिन 'वंदे मातरम्' से होगी स्कूल की शुरुआत
नई व्यवस्था के तहत स्कूलों में प्रतिदिन की शुरुआत सबसे पहले 'वंदे मातरम्' के सामूहिक गायन से होगी। इसके तुरंत बाद राष्ट्रगान 'जन-गण-मन' का पूर्ण संस्करण गाया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि दोनों गीतों को निर्धारित आधिकारिक स्वरूप में ही प्रस्तुत किया जाएगा।
सभी छात्रों और शिक्षकों के लिए नियम अनिवार्य
गायन के दौरान सभी छात्रों, शिक्षकों और स्कूल कर्मचारियों को सम्मानपूर्वक सावधान (Attention) की मुद्रा में खड़ा होना होगा। यह नियम राज्य के सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त, निजी स्कूलों के साथ-साथ मान्यता प्राप्त मदरसों पर भी समान रूप से लागू किया जाएगा।
मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद लागू हुई नीति
मुख्यमंत्री के अनुसार इस प्रस्ताव को 25 जून 2026 को हुई त्रिपुरा मंत्रिपरिषद की बैठक में मंजूरी दी गई थी। इसके बाद शिक्षा विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने और सभी शिक्षण संस्थानों में इस नीति को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
केंद्रीय दिशानिर्देशों के अनुरूप लिया गया फैसला
माणिक साहा ने कहा कि यह निर्णय केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान के सम्मान तथा उनकी आधिकारिक प्रस्तुति से संबंधित जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप लिया गया है। सरकार का कहना है कि सभी शिक्षण संस्थानों में एक समान व्यवस्था लागू करने से राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान की भावना और मजबूत होगी।
देशभक्ति और अनुशासन बढ़ाने पर सरकार का जोर
राज्य सरकार का मानना है कि इस पहल से विद्यार्थियों में राष्ट्रीय एकता, अनुशासन, देशभक्ति और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सम्मान की भावना विकसित होगी। सरकार के अनुसार यह कदम नई पीढ़ी को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के प्रति अधिक जागरूक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।








