सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल 11वें दिन: NEET और लद्दाख की मांगों पर वांगचुक का अनशन

Aryan Malhotra
0 सेकंड पहलेYeh mudda rajneeti se upar hai, insaniyat ki baat hai.
Pooja Reddy
0 सेकंड पहलेHum is cause ke saath hain!
Ada khan
48 मिनट पहलेSamaj ke liye is khabar ka bahut mahatva hai.
Dhruv Bhatt
1 घंटे पहलेYeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.
जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। आंदोलनकारियों के अनुसार उनका अनशन लगातार 11वें दिन भी जारी है। लंबे उपवास के कारण उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ा है और दावा किया गया है कि उनका वजन 7 किलोग्राम से अधिक कम हो गया है।
आंदोलन की प्रमुख मांगें
सोनम वांगचुक और उनके समर्थक देश की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं पर कड़ी कार्रवाई, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग, तथा लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा देने की मांग भी उठाई गई है।
राजनीतिक समर्थन भी मिला
आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह जंतर-मंतर पहुंचकर सोनम वांगचुक से मिले और आंदोलन को समर्थन दिया। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को आंदोलनकारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
NEET विरोध प्रदर्शन से जुड़ा आंदोलन
आंदोलनकारियों का कहना है कि यह अनशन उन छात्रों और युवाओं के समर्थन में भी है जो NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका दावा है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
20 जुलाई को संसद मार्च की घोषणा
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो संसद के आगामी मानसून सत्र के दौरान 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा।
सरकार की प्रतिक्रिया पर नजर
सोनम वांगचुक के आंदोलन ने शिक्षा, लद्दाख और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े कई मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है। अब सभी की नजर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और आगामी मानसून सत्र के दौरान होने वाली संभावित राजनीतिक चर्चा पर बनी हुई है। फिलहाल सरकार ने आंदोलन की सभी मांगों को स्वीकार करने संबंधी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।








