फ्रैक्चर मरीज को कार्टन बांधकर किया गया रेफर: सरकारी अस्पताल की व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
Ishaan Tiwari
0 सेकंड पहलेLogon ki madad karna hi asli dharam hai.
Pihu Agarwal
0 सेकंड पहलेPeedit logo ke saath poori tarah sahmat hoon.
Dev Kapoor
0 सेकंड पहलेLogon ki madad karna hi asli dharam hai.
बिहार के बेगूसराय के मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।वीडियो में सड़क हादसे में घायल युवक के पैर पर प्लास्टर की जगह कार्टन या गत्ते का सहारा दिया गया दिखाई दे रहा है।मामला सामने आने के बाद सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, घायल युवक को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल रेफर किया गया था।अस्पताल के प्रभारी ने डॉक्टर और ड्रेसर की कमी की बात कही है और कार्टन को प्राथमिक स्थिरीकरण के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की सफाई दी है।मामले को लेकर सिविल सर्जन ने जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया है।
वायरल वीडियो ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल
बेगूसराय के सरकारी अस्पताल से सामने आए वीडियो ने बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बहस छेड़ दी है।वीडियो में एक घायल युवक के फ्रैक्चर वाले पैर को कार्टन के सहारे बांधा गया नजर आ रहा है।रिपोर्टों के मुताबिक, घटना 15 जुलाई की बताई जा रही है और वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।घायल युवक सड़क हादसे में चोटिल होने के बाद मंझौल अस्पताल पहुंचा था।अस्पताल प्रशासन ने बताया कि उस समय ऑर्थोपेडिक डॉक्टर और ड्रेसर उपलब्ध नहीं थे।वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
अस्पताल प्रशासन ने दी अपनी सफाई
वायरल वीडियो के बाद अस्पताल प्रबंधन ने मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।अस्पताल प्रभारी के अनुसार, फ्रैक्चर के मामले में तत्काल स्थिरीकरण के लिए कार्टन जैसी सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है।उन्होंने बताया कि घटना के समय अस्पताल में ऑर्थोपेडिक डॉक्टर और ड्रेसर उपलब्ध नहीं थे।घायल युवक को प्राथमिक उपचार देने के बाद बेहतर इलाज के लिए बेगूसराय सदर अस्पताल भेजा गया।वहीं, सिविल सर्जन ने पूरे मामले की जांच कराने और जांच के आधार पर कार्रवाई की बात कही है।अब जांच से यह स्पष्ट होगा कि इलाज की प्रक्रिया निर्धारित चिकित्सा मानकों के अनुरूप थी या नहीं।
डॉक्टर और ड्रेसर की कमी बनी बड़ा सवाल
मंझौल अस्पताल में सामने आए मामले ने सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में संसाधनों और कर्मचारियों की उपलब्धता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।अस्पताल प्रभारी ने स्वीकार किया कि घटना के समय ऑर्थोपेडिक डॉक्टर और ड्रेसर मौजूद नहीं थे।इसी वजह से घायल युवक को तत्काल प्राथमिक उपचार देकर उच्च केंद्र भेजा गया।मामले की जानकारी सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच की बात कही है।स्थानीय स्तर पर भी लोग अस्पताल में पर्याप्त विशेषज्ञ डॉक्टर और चिकित्सा कर्मचारियों की मांग उठा रहे हैं।यह मामला सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की तैयारियों पर बहस को फिर सामने ले आया है।
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ वीडियो
बेगूसराय अस्पताल से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने के बाद मामला चर्चा में आ गया।वीडियो में घायल युवक के पैर पर कार्टन बांधा हुआ दिखाई देता है, जिसे लेकर लोग अलग-अलग सवाल उठा रहे हैं।कई सोशल मीडिया पोस्ट में इसे अस्पताल की लापरवाही बताया गया है।हालांकि अस्पताल प्रशासन ने इसे आपात स्थिति में किया गया प्राथमिक स्थिरीकरण बताया है।सिविल सर्जन ने मामले की जांच कराने की बात कही है, इसलिए अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।फिलहाल वायरल वीडियो ने बिहार की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर नई चर्चा जरूर छेड़ दी है।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
बेगूसराय के मंझौल अस्पताल में घायल युवक के पैर पर कार्टन बांधने का मामला अब जांच के दायरे में है।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, घायल युवक को सड़क हादसे के बाद अस्पताल लाया गया था और बाद में सदर अस्पताल रेफर किया गया।अस्पताल प्रशासन ने कर्मचारियों की कमी को मामले की एक वजह बताया है।वहीं, सिविल सर्जन ने जांच के बाद जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई का भरोसा दिया है।इसलिए वायरल वीडियो के आधार पर सीधे चिकित्सकीय लापरवाही का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।जांच रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा कि मरीज को दिया गया प्राथमिक उपचार नियमों और चिकित्सा मानकों के अनुरूप था या नहीं।


