Jarange Announces Mumbai March: मनोज जरांगे पाटिल का 15 सितंबर से मुंबई में आंदोलन

Navya Nair
0 सेकंड पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Sonu rai
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Pranav Srivastava
25 मिनट पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Kunal Rao
1 घंटे पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Saanvi Pandey
2 घंटे पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Pooja Reddy
3 घंटे पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Ravi sinha
4 घंटे पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Saanvi Pandey
5 घंटे पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Shruti Bajpai
5 घंटे पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे मनोज जरांगे पाटिल ने एक बार फिर महाराष्ट्र सरकार पर दबाव बढ़ाने का फैसला किया है। उन्होंने जालना के अंतरवाली सराटी से 15 सितंबर से मुंबई की ओर मार्च शुरू करने की घोषणा की है। जरांगे का कहना है कि मराठा समुदाय को ओबीसी श्रेणी में आरक्षण और कुनबी प्रमाणपत्र देने की मांग को लेकर यह आंदोलन किया जा रहा है। उन्होंने समर्थकों से पूरे मार्च के दौरान शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने की अपील की है।
आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन अनशन की तैयारी
जरांगे पाटिल ने मुंबई पहुंचने के बाद आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करने का ऐलान किया है। उनके घोषित कार्यक्रम के मुताबिक मार्च के दौरान अलग-अलग स्थानों पर पड़ाव रखे जाएंगे और मुंबई पहुंचने के बाद आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन आगे बढ़ाया जाएगा। कुछ शुरुआती रिपोर्टों में 19 सितंबर से अनशन शुरू करने की बात कही गई थी, जबकि बाद की रिपोर्टों में 20 सितंबर को मुंबई पहुंचने और उसके बाद अनशन शुरू करने का कार्यक्रम बताया गया है।
मुंबई पुलिस ने अनुमति से किया इनकार
मनोज जरांगे पाटिल की टीम ने आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन अनशन के लिए पुलिस से अनुमति मांगी थी, लेकिन मुंबई पुलिस ने इसे मंजूरी नहीं दी। पुलिस ने गणेशोत्सव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, कानून-व्यवस्था, संभावित भीड़ और यातायात पर पड़ने वाले असर समेत कई कारणों का हवाला दिया है। पुलिस के इनकार के बाद भी जरांगे ने अपना मुंबई मार्च जारी रखने की बात कही है और आंदोलन को शांतिपूर्ण रखने का दावा किया है।
सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बढ़ी चुनौती
जरांगे पाटिल के मुंबई मार्च की घोषणा ऐसे समय हुई है जब महाराष्ट्र में गणेशोत्सव के कारण पहले से ही बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की जरूरत है। हजारों समर्थकों के मुंबई पहुंचने की संभावना ने प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन की चुनौती बढ़ा दी है। सरकार की ओर से आंदोलन को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताई जा रही हैं, जबकि जरांगे अपने समर्थकों के साथ मुंबई पहुंचकर आरक्षण की मांग को मजबूती से उठाने पर अड़े हुए हैं।
हाई कोर्ट ने प्रवेश रोकने से किया इनकार
मुंबई मार्च को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट में भी मामला पहुंचा था। अदालत ने जरांगे पाटिल को मुंबई में प्रवेश करने से रोकने के लिए तत्काल प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने का अधिकार मौलिक अधिकारों के दायरे में आता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि किसी भी स्थान पर बिना अनुमति प्रदर्शन की स्वतः अनुमति मिल गई है; आजाद मैदान में प्रस्तावित अनशन के लिए पुलिस की अनुमति अलग मुद्दा है।
मराठा आरक्षण की मांग पर फिर आमने-सामने सरकार और जरांगे
मनोज जरांगे पाटिल लंबे समय से मराठा समुदाय को ओबीसी श्रेणी में शामिल करने और कुनबी प्रमाणपत्र से जुड़ी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। अब मुंबई मार्च के ऐलान और पुलिस की अनुमति से इनकार के बाद राज्य सरकार और आंदोलनकारियों के बीच टकराव की स्थिति फिर बनती दिखाई दे रही है। जरांगे ने आंदोलन को शांतिपूर्ण रखने की बात कही है, जबकि प्रशासन की प्राथमिकता गणेशोत्सव के दौरान कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था बनाए रखना है। ऐसे में 15 सितंबर से शुरू होने वाला मार्च और मुंबई पहुंचने के बाद आंदोलन का स्वरूप पूरे राज्य की नजर में रहेगा।





