Women Journalists: महिला पत्रकारों से कथित मारपीट पर बवाल

महिला पत्रकारों से कथित मारपीट पर बवाल
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Kabir Shukla

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0 सेकंड पहले

Bharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.

Aryan Malhotra

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Jai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.

Dev Kapoor

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Bharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.

Myra Dubey

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0 सेकंड पहले

Desh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.

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दिल्ली के साकेत इलाके में 3 सितंबर को दो महिला पत्रकारों के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। 4PM News Network से जुड़ी पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान ने आरोप लगाया कि उन्हें एक कार्यक्रम की कवरेज के दौरान पुलिस ने हिरासत में लिया और बाद में साकेत थाने ले जाया गया। दोनों का दावा है कि थाने के अंदर उनके साथ मारपीट की गई। दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पूरे मामले को अलग तरीके से बताया है।


Max Hospital के कार्यक्रम की कवरेज के दौरान विवाद
दोनों पत्रकार साकेत स्थित Max Smart Super Speciality Hospital में नए विंग के उद्घाटन कार्यक्रम की कवरेज के लिए पहुंची थीं। कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता मौजूद थीं। पत्रकारों के मुताबिक वे मुख्यमंत्री से सवाल पूछने का प्रयास कर रही थीं, जिसके बाद उन्हें पुलिस ने रोका और हिरासत में लेकर साकेत थाने पहुंचाया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।


पत्रकारों ने धार्मिक पहचान को लेकर भी लगाए आरोप
शाहीन खान और नफीसा खान ने आरोप लगाया कि थाने में उनके साथ मारपीट की गई और पुलिसकर्मियों ने उनकी पहचान और समुदाय को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। शाहीन खान ने एक वीडियो में दावा किया कि उनकी पहचान मुस्लिम होने की जानकारी मिलने के बाद कथित मारपीट और बढ़ गई। दोनों पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर चोट के निशान दिखाने वाले वीडियो भी साझा किए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और दिल्ली पुलिस ने इन्हें तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक बताया है।

 

दिल्ली पुलिस ने आरोपों को बताया भ्रामक
दिल्ली पुलिस ने पत्रकारों द्वारा लगाए गए मारपीट और धार्मिक भेदभाव के आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक दोनों महिलाओं ने कार्यक्रम स्थल के पास निर्धारित VVIP रूट में बाधा उत्पन्न की थी और स्कूटी हटाने के निर्देशों का पालन नहीं किया। पुलिस का कहना है कि इसी वजह से उन्हें पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया था। दक्षिण दिल्ली के DCP अनंत मित्तल ने आरोपों को “factually incorrect and misleading” बताया।


प्रेस संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की
मामले के सामने आने के बाद Press Club of India, Indian Women’s Press Corps, Delhi Union of Journalists, Press Association और Kerala Union of Working Journalists समेत कई पत्रकार संगठनों ने मामले पर चिंता जताई। संगठनों ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार से घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने तथा यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। Editors Guild of India ने भी दोनों पत्रकारों की हिरासत और कथित मारपीट पर स्वतंत्र जांच की मांग की है।


CCTV फुटेज और कानूनी कार्रवाई की मांग
घटना के बाद दोनों पत्रकारों की ओर से मामले में कानूनी मदद लेने और थाने की CCTV फुटेज सामने लाने की मांग की गई है। New Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक पत्रकारों ने पुलिस कार्रवाई के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाने की तैयारी की है। फिलहाल विवाद का केंद्र पत्रकारों के लगाए मारपीट के आरोप और पुलिस द्वारा दिए गए VVIP सुरक्षा उल्लंघन के स्पष्टीकरण के बीच बना हुआ है। ऐसे में निष्पक्ष जांच से ही घटना की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।

 

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Myra Dubey

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