7 राज्यों में जजों की रिटायरमेंट उम्र 62: जिला अदालतों में अनुभव का मिलेगा लाभ

जिला अदालतों में अनुभव का मिलेगा लाभ
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Riya Jain

Riya Jain

7 घंटे पहले

India ki progress dekh ke dil khush ho gaya!

Sonu rai

Sonu rai

8 घंटे पहले

Hamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.

Myra Dubey

Myra Dubey

8 घंटे पहले

Bharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.

Payal jadon

Payal jadon

11 घंटे पहले

Desh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.

Aarav Sharma

Aarav Sharma

12 घंटे पहले

Is decision ka poore desh par seedha asar padega.

Ravi sinha

Ravi sinha

14 घंटे पहले

Bharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.

Vihaan Patel

Vihaan Patel

15 घंटे पहले

Hamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.

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सुप्रीम कोर्ट ने जिला न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति उम्र 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने के लिए सात राज्यों को अपने सेवा नियमों में संशोधन करने का निर्देश दिया है। इन राज्यों में छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, सिक्किम, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। इन सभी राज्यों की सरकारों ने रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने के प्रस्ताव पर सहमति जताई है। कोर्ट ने नियमों में जरूरी बदलाव जल्द से जल्द और बेहतर होगा कि दो महीने के भीतर करने को कहा है। यह निर्देश लंबित मामलों और अनुभवी न्यायिक अधिकारियों की कमी से जुड़ी व्यापक चिंता के बीच आया है।


60 की उम्र के बाद सेवा जारी रखने के लिए Assessment जरूरी
रिटायरमेंट उम्र 62 वर्ष किए जाने का लाभ बिना किसी शर्त के नहीं मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब कोई न्यायिक अधिकारी 60 वर्ष की उम्र पूरी करेगा, तो संबंधित हाईकोर्ट उसकी Suitability और Performance का आकलन करेगा। आकलन में उपयुक्त पाए जाने पर ही अधिकारी 62 वर्ष तक सेवा जारी रख सकेगा। नियमों में संशोधन की प्रक्रिया पूरी होने तक भी सात राज्यों में 60 वर्ष की उम्र पार कर चुके अधिकारियों को निर्धारित शर्तों के अधीन 62 वर्ष तक सेवा से अलग नहीं किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य अनुभवी और सक्षम न्यायिक अधिकारियों की सेवाओं का बेहतर उपयोग करना है।


बाकी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दो सप्ताह का समय
सुप्रीम कोर्ट ने केवल सात राज्यों का मामला तय करके प्रक्रिया खत्म नहीं की है। कोर्ट ने उन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से भी अपने रुख पर दोबारा विचार करने को कहा है, जिन्होंने रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने का समर्थन नहीं किया है या अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया है। उन्हें 60 से 62 वर्ष की उम्र बढ़ाने के प्रस्ताव पर दो सप्ताह के भीतर निर्णय लेने को कहा गया है। इससे संकेत मिलता है कि अदालत जिला न्यायपालिका में रिटायरमेंट उम्र को लेकर व्यापक स्तर पर एकरूपता की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। हालांकि फिलहाल पूरे देश में 62 वर्ष की समान सीमा लागू नहीं हुई है।

 

जिला अदालतों में बड़ी संख्या में मामले लंबित
रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने का मुद्दा जिला न्यायपालिका पर बढ़ते काम के दबाव से भी जुड़ा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार देशभर की अधीनस्थ अदालतों में न्यायिक अधिकारियों के स्वीकृत पदों में लगभग 24 प्रतिशत पद खाली हैं। ऐसे में अनुभवी न्यायिक अधिकारियों को कुछ अतिरिक्त वर्षों तक सेवा में बनाए रखना अदालतों में उपलब्ध मानव संसाधन को मजबूत करने में मदद कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी अनुभवी और प्रतिभाशाली न्यायिक अधिकारियों के समय से पहले सेवा से बाहर होने की समस्या पर चिंता जताई है।


सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने अनुभव बचाने पर दिया जोर
यह मामला All India Judges Association बनाम Union of India से जुड़ा है, जिसमें जिला न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारियों की सेवा शर्तों सहित रिटायरमेंट उम्र का मुद्दा लंबे समय से विचाराधीन है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अनुभवी न्यायिक प्रतिभा को बनाए रखने और लोगों तक न्याय की पहुंच बेहतर करने की आवश्यकता पर जोर दिया। अदालत का मानना है कि अनुभवी अधिकारियों को कुछ अतिरिक्त समय देने से न्यायिक व्यवस्था को उनके अनुभव का लाभ मिल सकता है। इसी आधार पर सहमत राज्यों को 62 वर्ष की उम्र लागू करने के लिए नियम संशोधित करने का निर्देश दिया गया है।


अभी पूरे देश में एक समान व्यवस्था लागू नहीं
सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश को पूरे देश के जिला जजों की रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने वाला सार्वदेशिक फैसला समझना सही नहीं होगा। फिलहाल सात सहमत राज्यों के लिए नियम संशोधन का निर्देश दिया गया है, जबकि बाकी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से दो सप्ताह में अपने रुख पर पुनर्विचार करने को कहा गया है। इस मुद्दे पर आगे की सुनवाई भी होनी है और व्यापक स्तर पर समान व्यवस्था का प्रश्न अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। इसलिए फिलहाल सही स्थिति यही है कि सात राज्यों में 62 वर्ष की व्यवस्था लागू करने का रास्ता साफ हुआ है, जबकि देशव्यापी स्थिति पर प्रक्रिया जारी है।

 

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Riya Jain

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7 घंटे पहले

India ki progress dekh ke dil khush ho gaya!

Sonu rai

Sonu rai

8 घंटे पहले

Hamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.

Myra Dubey

Myra Dubey

8 घंटे पहले

Bharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.

Payal jadon

Payal jadon

11 घंटे पहले

Desh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.

Aarav Sharma

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12 घंटे पहले

Is decision ka poore desh par seedha asar padega.

Ravi sinha

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14 घंटे पहले

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Vihaan Patel

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15 घंटे पहले

Hamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.

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