सुप्रीम कोर्ट का पैदल यात्रियों पर बड़ा आदेश: सड़क पर होगा अतिक्रमण मुक्त पैदल मार्ग

Arjun Singh
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Payal jadon
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Sneha Menon
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Diya Gupta
0 सेकंड पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Aryan Malhotra
0 सेकंड पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
सुप्रीम कोर्ट ने पैदल यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि देश की प्रत्येक सड़क पर पैदल चलने वालों के लिए स्पष्ट रूप से सीमांकित (Demarcated) और अतिक्रमण मुक्त मार्ग उपलब्ध कराया जाए। अदालत ने कहा कि सड़कें केवल वाहनों के लिए नहीं, बल्कि पैदल चलने वाले नागरिकों के लिए भी समान रूप से सुरक्षित होनी चाहिए। इस दिशा में सभी संबंधित विभागों को जल्द आवश्यक कदम उठाने होंगे।
दो सप्ताह में जारी हों आवश्यक दिशा-निर्देश
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) के.एम. नटराज को निर्देश दिया कि दो सप्ताह के भीतर संबंधित मंत्रालयों और एजेंसियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। अदालत ने स्पष्ट किया कि पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समयबद्ध कार्रवाई आवश्यक है।
कम लागत में भी बनाया जा सकता है सुरक्षित पैदल मार्ग
सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि पैदल मार्ग तैयार करने के लिए बड़े बजट या भारी निर्माण कार्य की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने सुझाव दिया कि शुरुआत में रस्सियों, बैरिकेड्स या अन्य कम लागत वाले उपायों से भी वाहन लेन और पैदल मार्ग को अलग किया जा सकता है। मुख्य उद्देश्य पैदल यात्रियों को सुरक्षित और निर्बाध रास्ता उपलब्ध कराना है।
सुरक्षित फुटपाथ को बताया मौलिक अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि सुरक्षित फुटपाथ पर चलना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। अदालत ने कहा कि यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(d) और अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है। पैदल चलने वालों का अधिकार किसी भी स्थिति में मोटर वाहनों की सुविधा से कम नहीं आंका जा सकता।
स्थानीय निकायों की बढ़ेगी जिम्मेदारी
इस आदेश के बाद नगर निगम, विकास प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन पर फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने तथा पैदल मार्गों का सीमांकन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी बढ़ जाएगी। अदालत ने संकेत दिया कि भविष्य में इस दिशा में हुई प्रगति की भी समीक्षा की जाएगी ताकि आदेश का प्रभावी पालन सुनिश्चित हो सके।
सड़क सुरक्षा व्यवस्था में आ सकता है बड़ा बदलाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का प्रभावी पालन हुआ तो देशभर में सड़क सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है। इससे पैदल यात्रियों, बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगजनों को सुरक्षित आवागमन का बेहतर वातावरण मिलेगा तथा सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आने की उम्मीद है।







