यौन उत्पीड़न मामले में बृजभूषण दोषमुक्त: महिला पहलवान केस में कोर्ट का बड़ा फैसला

Myra Dubey
0 सेकंड पहलेSarkar ko public ko jawab dena chahiye.
Pranav Srivastava
0 सेकंड पहलेNeta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!
Aarav Sharma
0 सेकंड पहलेSarkar ko iske baare mein kuch karna chahiye!
Aditya Verma
0 सेकंड पहलेBahut achhi reporting ki hai, keep it up!
Rohan Desai
0 सेकंड पहलेYeh rajneeti ka asli chehra hai.
नई दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए कथित यौन उत्पीड़न मामले में भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और सह-आरोपी विनोद तोमर को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) अश्विनी पंवार ने सोमवार, 3 अगस्त 2026 को अपना सुरक्षित फैसला सुनाया। यह मामला पिछले तीन वर्षों से देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ था।
सबूतों और गवाहियों पर अदालत की टिप्पणी
अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद दोनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। फैसले के बाद बचाव पक्ष ने कहा कि शिकायतकर्ताओं के बयानों में विरोधाभास, देरी और साक्ष्यों की कमी के कारण आरोप न्यायिक कसौटी पर साबित नहीं हो सके। अदालत ने इन्हीं आधारों पर आरोपियों को बरी किया।
तीन साल तक चला हाई-प्रोफाइल मुकदमा
यह मामला 2023 में तब राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया था, जब कई महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए और दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबा धरना दिया। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद अदालत में इन-कैमरा सुनवाई के जरिए मुकदमे की विस्तृत सुनवाई हुई।
फैसले के बाद बृजभूषण की पहली प्रतिक्रिया
अदालत से बाहर निकलने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा विश्वास था और वे शुरू से स्वयं को निर्दोष बताते रहे हैं। उन्होंने आरोपों को साजिश करार देते हुए कहा कि अदालत के निर्णय ने सच्चाई को सामने ला दिया है।
खेल जगत और राजनीति में फिर तेज हुई चर्चा
इस फैसले के बाद खेल और राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है। यह मामला भारतीय कुश्ती, महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा और खेल संघों की जवाबदेही को लेकर लंबे समय तक राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र रहा। फैसले के बाद आगे की कानूनी और प्रशासनिक संभावनाओं पर भी नजर बनी हुई है।
देशभर में फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
अदालत के निर्णय के बाद सोशल मीडिया और विभिन्न वर्गों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। एक पक्ष ने फैसले को न्यायिक प्रक्रिया की जीत बताया, जबकि दूसरे पक्ष ने मामले पर अपनी असहमति और निराशा व्यक्त की। फिलहाल अदालत के निर्णय के साथ इस आपराधिक मुकदमे का समापन हो गया है।








