भीषण गर्मी से धधके देश के जंगल: उत्तराखंड-हिमाचल में हालात गंभीर

Dev Kapoor
0 सेकंड पहलेAise logon ko support karna humara farz hai.
Nisha Shah
0 सेकंड पहलेYeh samajik mudda bahut gambhir hai, dhyan dena zaroori hai.
देशभर में लगातार बढ़ रही गर्मी और तापमान में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर समेत कई राज्यों के जंगल भयंकर आग की चपेट में हैं। आग की विकराल लपटों ने वन संपदा, वन्यजीवों और आसपास रहने वाले लोगों के लिए बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। कई इलाकों में प्रशासन को लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा है।
हिमाचल प्रदेश के जंगलों में भड़की भीषण आग
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के क्यारीघाट गांव और कंडाघाट क्षेत्र के जंगलों में आग ने भयावह रूप ले लिया। आग की ऊंची-ऊंची लपटें और धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर तक दिखाई दिया। प्रशासन और वन विभाग की टीमें लगातार आग बुझाने में जुटी हुई हैं। तेज गर्मी और सूखी वनस्पतियों की वजह से आग पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में बारिश की संभावना जताई है, जिससे राहत मिलने की उम्मीद है। फिलहाल इलाके के लोगों में डर का माहौल बना हुआ है।
कसौली के जंगलों तक पहुंची आग
हिमाचल प्रदेश के कसौली क्षेत्र में भी जंगलों में आग ने तबाही मचा दी। एयर फोर्स स्टेशन के पास शुरू हुई आग तेजी से आसपास के जंगलों में फैल गई। हालात को देखते हुए फॉरेस्ट विभाग, दमकल विभाग और भारतीय वायु सेना की मदद ली गई। हेलिकॉप्टर के जरिए पानी का छिड़काव कर आग पर काफी हद तक काबू पाया गया।
नैनीताल के मनोरा रेंज में 70 घंटे से धधक रहे जंगल
उत्तराखंड के नैनीताल स्थित मनोरा रेंज के जंगल पिछले 70 घंटों से लगातार जल रहे हैं। धुएं की मोटी चादर से पूरा इलाका ढक गया है, जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
वन विभाग के अनुसार आग नैनागांव क्षेत्र से शुरू हुई थी, जो धीरे-धीरे कलौना, पटवाडांगर और आरुखान समेत कई गांवों तक फैल गई। तेज हवाओं और बढ़ती गर्मी ने हालात को और गंभीर बना दिया है।
वन्यजीवों और वन संपदा पर बड़ा खतरा
जंगलों में लगी आग से चीड़, बांज, बुरांश समेत कई दुर्लभ वनस्पतियां जलकर नष्ट हो रही हैं। इसके साथ ही जंगलों में रहने वाले पक्षी, खरगोश, कांकड़, घुरड़ और अन्य वन्यजीव भी प्रभावित हो रहे हैं। कई जानवर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ती वनाग्नि पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।
चमोली में महिला की दर्दनाक मौत
उत्तराखंड के चमोली जिले के आदिबदरी क्षेत्र से दुखद खबर सामने आई है, जहां जंगल की आग की चपेट में आने से सुरेशी देवी नामक महिला की मौत हो गई। स्थानीय लोगों के अनुसार आग तेजी से फैलने के कारण महिला सुरक्षित स्थान तक नहीं पहुंच सकीं। इसके अलावा नारायणबगड़ क्षेत्र के पालछूनी गांव के पास भी जंगलों में आग की घटनाएं सामने आई हैं। लोगों का आरोप है कि कुछ अज्ञात तत्वों ने जानबूझकर जंगल में आग लगाई है।
सरकार लाएगी इनाम योजना
उत्तराखंड सरकार जंगलों की आग पर नियंत्रण पाने के लिए नई योजना लाने की तैयारी कर रही है। सरकार आग बुझाने में मदद करने वाले लोगों और टीमों को 1 लाख रुपये तक का इनाम देने पर विचार कर रही है। इसके अलावा 75 हजार और 51 हजार रुपये के पुरस्कार भी तय किए जा सकते हैं।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार बढ़ता तापमान, लंबा सूखा और अल-नीनो जैसी परिस्थितियां आग की घटनाओं को और बढ़ा रही हैं।
पिछले 10 वर्षों में हजारों वनाग्नि की घटनाएं
वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 10 वर्षों में उत्तराखंड में 14,638 से ज्यादा वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन घटनाओं में 23,682 हेक्टेयर से अधिक जंगल प्रभावित हुए हैं। कई लोगों की जान भी जा चुकी है। सरकार, वन विभाग और स्थानीय लोग अब मिलकर जंगलों को बचाने की कोशिश में जुटे हैं, लेकिन बढ़ती गर्मी और सूखे ने चुनौती को और कठिन बना दिया है।
देशभर में बढ़ती जंगलों की आग अब सिर्फ पर्यावरण का नहीं बल्कि मानव जीवन का भी बड़ा संकट बनती जा रही है। अगर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भयावह हो सकती है। विशेषज्ञ लगातार लोगों से जंगलों में आग न लगाने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने की अपील कर रहे हैं।







