'सेफ क्लिक 2.0' अभियान: साइबर ठगी के खिलाफ मध्यप्रदेश पुलिस की बड़ी पहल

Yash Kulkarni
0 सेकंड पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
Harsh Pandya
0 सेकंड पहलेPoori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.
Vihaan Patel
25 मिनट पहलेPoori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.
Kabir Shukla
1 घंटे पहलेKanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.
Diya Gupta
3 घंटे पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
देशभर में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों को देखते हुए मध्यप्रदेश पुलिस ने आम नागरिकों को जागरूक करने के लिए 'सेफ क्लिक 2.0' (Safe Click 2.0) साइबर सुरक्षा अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के माध्यम से लोगों को डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन टास्क फ्रॉड, फर्जी निवेश योजनाओं, गेमिंग स्कैम, बैंकिंग धोखाधड़ी और सोशल मीडिया से जुड़े साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने का संदेश दिया जा रहा है। पुलिस का स्पष्ट कहना है कि "सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।"
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराने वालों से रहें सावधान
अभियान के तहत पुलिस ने लोगों को सबसे पहले तथाकथित "डिजिटल अरेस्ट" जैसे साइबर फ्रॉड के बारे में जागरूक किया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भारत के कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया मौजूद नहीं है। यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर धमकाए या पैसे मांगे, तो उस पर बिल्कुल विश्वास न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत कॉल काटें, परिजनों को सूचित करें और हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस थाने से संपर्क करें।
ऑनलाइन टास्क और वर्क फ्रॉम होम के झांसे से बचें
पुलिस ने ऑनलाइन टास्क फ्रॉड को तेजी से फैलते साइबर अपराधों में शामिल बताया है। ठग सोशल मीडिया या मैसेजिंग ऐप के जरिए वीडियो लाइक करने, चैनल सब्सक्राइब करने या रेटिंग देने जैसे आसान कार्यों के बदले मोटी कमाई का लालच देते हैं। शुरुआत में कुछ रुपये देकर भरोसा जीतने के बाद वे "प्रीमियम टास्क" के नाम पर हजारों रुपये जमा करा लेते हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया कि किसी भी ऑनलाइन काम के लिए पहले पैसे जमा कराने की शर्त लगभग निश्चित रूप से धोखाधड़ी का संकेत है।
फ्री UC, डायमंड और गेमिंग रिवॉर्ड के नाम पर बढ़ रहा साइबर फ्रॉड
युवाओं और किशोरों को निशाना बनाने वाले गेमिंग स्कैम को लेकर भी पुलिस ने विशेष चेतावनी जारी की है। साइबर अपराधी फर्जी वेबसाइट, APK फाइल या नकली ऑफर के माध्यम से फ्री UC, डायमंड और इनाम देने का दावा करते हैं। ऐसे लिंक पर क्लिक करने या ऐप डाउनलोड करने से मोबाइल डेटा, बैंकिंग जानकारी और गेमिंग अकाउंट तक हैक हो सकते हैं। पुलिस ने सलाह दी है कि केवल आधिकारिक वेबसाइट और ऐप का उपयोग करें तथा टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) हमेशा सक्रिय रखें।
दोगुना मुनाफा देने वाली निवेश योजनाओं से रहें दूर
'सेफ क्लिक 2.0' अभियान में फर्जी निवेश और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से जुड़े साइबर फ्रॉड को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है। साइबर ठग सोशल मीडिया पर कम समय में पैसा दोगुना करने का लालच देकर लोगों को निवेश के लिए प्रेरित करते हैं। शुरुआत में नकली मुनाफा दिखाकर अधिक निवेश कराया जाता है और बाद में टैक्स, प्रोसेसिंग फीस या अन्य शुल्क के नाम पर और पैसे वसूल लिए जाते हैं। अंततः निवेशक अपनी पूरी जमा पूंजी गंवा देता है। पुलिस ने सलाह दी है कि केवल SEBI से पंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से ही निवेश करें।
बैंक कभी नहीं मांगता OTP या ATM PIN
पुलिस ने लोगों को बैंकिंग सुरक्षा को लेकर भी जागरूक किया है। अधिकारियों के अनुसार कोई भी बैंक, आरबीआई या अधिकृत संस्था कभी भी फोन कॉल पर OTP, ATM PIN, CVV या नेट बैंकिंग पासवर्ड नहीं मांगती। यदि कोई व्यक्ति ऐसी जानकारी मांगता है तो वह निश्चित रूप से साइबर ठग है। ऐसे कॉल को तुरंत समाप्त करें और किसी भी परिस्थिति में अपनी गोपनीय बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
सोशल मीडिया पर सतर्क रहें, बच्चों को भी करें जागरूक
महिलाओं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर भी अभियान में विशेष जोर दिया गया है। पुलिस ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों के साथ नियमित संवाद बनाए रखें, उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर संतुलित निगरानी रखें और उन्हें सोशल मीडिया के जोखिमों के बारे में समझाएं। अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने से बचें तथा किसी भी व्यक्ति की फोटो या वीडियो बिना अनुमति साझा करना कानूनन अपराध है।
संचार साथी पोर्टल से बढ़ाएं मोबाइल सुरक्षा
मोबाइल और डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए पुलिस ने संचार साथी (Sanchar Saathi) पोर्टल का उपयोग करने की भी सलाह दी है। इसके माध्यम से चक्षु (Chakshu) सुविधा पर संदिग्ध कॉल, SMS और WhatsApp फ्रॉड की शिकायत दर्ज की जा सकती है। वहीं CEIR के जरिए चोरी हुए मोबाइल का IMEI ब्लॉक कराया जा सकता है और TAFCOP पोर्टल से अपने नाम पर जारी मोबाइल नंबरों की जांच कर अनधिकृत सिम बंद कराई जा सकती है।
साइबर ठगी होने पर तुरंत करें यह काम
मध्यप्रदेश पुलिस ने कहा है कि साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि कोई व्यक्ति साइबर अपराध का शिकार हो जाए तो बिना समय गंवाए 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें और www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। समय पर शिकायत करने से ठगी गई धनराशि को रोकने और वापस पाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।








