आसाराम को नहीं मिली जमानत: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- गंभीर स्वास्थ्य संकट होने पर ही होगा विचार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- गंभीर स्वास्थ्य संकट होने पर ही होगा विचार
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Ananya Sharma

Ananya Sharma

21 घंटे पहले

CBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.

Reyansh Joshi

Reyansh Joshi

21 घंटे पहले

CBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.

Dhruv Bhatt

Dhruv Bhatt

1 दिन पहले

Police ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.

Arjun Singh

Arjun Singh

1 दिन पहले

Yeh incident sun ke dil bhaari ho gaya.

Ada khan

Ada khan

1 दिन पहले

Kanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.

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नाबालिग से दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने उनकी अंतरिम जमानत और सजा निलंबित करने की मांग खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि केवल अत्यंत गंभीर स्वास्थ्य स्थिति या जीवन को खतरा होने जैसी परिस्थितियों में ही जमानत पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, अदालत ने राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

 

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि फिलहाल सजा पर रोक लगाने या जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता। अदालत ने स्पष्ट किया कि पहले राजस्थान सरकार का पक्ष सुना जाएगा, उसके बाद ही आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। साथ ही जेल प्रशासन को निर्देश दिया गया कि आसाराम को आवश्यक और उचित चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

 

स्वास्थ्य का हवाला देकर मांगी थी जमानत
आसाराम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने अदालत को बताया कि उनकी उम्र 80 वर्ष से अधिक है और वे कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल अधिक उम्र या सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि यदि भविष्य में उनकी जान को वास्तविक खतरा उत्पन्न होता है या स्वास्थ्य अत्यंत गंभीर हो जाता है, तभी राहत पर विचार किया जाएगा।

 

राजस्थान हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखी थी उम्रकैद
इससे पहले 27 मई को राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था। हालांकि, अदालत ने उन्हें सामूहिक दुष्कर्म, आपराधिक साजिश और पॉक्सो अधिनियम की कुछ गंभीर धाराओं से राहत दी थी। इसके बावजूद नाबालिग से दुष्कर्म से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एफ) सहित कई अन्य धाराओं में दोषसिद्धि कायम रखते हुए उम्रकैद की सजा बरकरार रखी गई।

 

किन धाराओं में दोषी हैं आसाराम?
हाईकोर्ट ने आसाराम को नाबालिग से दुष्कर्म, गलत तरीके से बंधक बनाने, मानव तस्करी, आपराधिक धमकी, महिला की गरिमा का अपमान करने और यौन उत्पीड़न जैसे अपराधों में दोषी माना है। इसके अलावा पॉक्सो अधिनियम की धाराओं 7 और 8 तथा किशोर न्याय अधिनियम की धारा 23 के तहत भी उनकी सजा को बरकरार रखा गया है। वहीं, सह-आरोपी संचिता गुप्ता उर्फ शिल्पी और शरत चंद्र को हाईकोर्ट ने बरी कर दिया था।

 

क्या है पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2013 का है, जब आरोप लगा था कि आसाराम ने अपने आश्रम में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म किया। मामले की सुनवाई के बाद 25 अप्रैल 2018 को ट्रायल कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद राजस्थान हाईकोर्ट में दायर अपील भी खारिज हो गई। अब सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई जारी है, लेकिन फिलहाल अदालत ने जमानत देने से इनकार करते हुए केवल राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

 

फिलहाल क्या स्थिति है?
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद आसाराम को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि जमानत पर विचार केवल असाधारण स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति में ही किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई राजस्थान सरकार का जवाब आने के बाद होगी।

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Ananya Sharma

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21 घंटे पहले

CBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.

Reyansh Joshi

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21 घंटे पहले

CBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.

Dhruv Bhatt

Dhruv Bhatt

1 दिन पहले

Police ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.

Arjun Singh

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1 दिन पहले

Yeh incident sun ke dil bhaari ho gaya.

Ada khan

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1 दिन पहले

Kanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.

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