APK स्कैम से उड़ रहे लाखों: 'ऑपरेशन साइबर वज्र' से साइबर ठगों पर बड़ा शिकंजा

'ऑपरेशन साइबर वज्र' से साइबर ठगों पर बड़ा शिकंजा
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Sonu rai

Sonu rai

5 दिन पहले

Apradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!

Tanya Bajaj

Tanya Bajaj

5 दिन पहले

Kanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.

Taushif Shekh

Taushif Shekh

5 दिन पहले

Poori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.

Pranav Srivastava

Pranav Srivastava

5 दिन पहले

Police ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.

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साइबर अपराधी सबसे पहले लोगों को फोन कर खुद को बैंक अधिकारी बताते हैं। वे दावा करते हैं कि आपका SBI क्रेडिट कार्ड ब्लॉक होने वाला है या उस पर भारी पेनल्टी लग गई है। घबराहट पैदा कर वे पीड़ित को तुरंत कार्रवाई करने के लिए मजबूर करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, डर और जल्दबाजी पैदा करना इस साइबर ठगी का पहला और सबसे महत्वपूर्ण हथियार है।


WhatsApp पर भेजते हैं फर्जी APK फाइल
ठग कार्ड को दोबारा सक्रिय करने या KYC अपडेट करने का बहाना बनाकर व्हाट्सएप पर एक APK फाइल भेजते हैं। वे इसे बैंक का आधिकारिक ऐप बताकर इंस्टॉल करने के लिए कहते हैं। जबकि बैंक या वित्तीय संस्थान कभी भी व्हाट्सएप के माध्यम से APK फाइल भेजकर ऐप डाउनलोड करने को नहीं कहते। यही फर्जी फाइल पूरे साइबर फ्रॉड की शुरुआत होती है।


APK इंस्टॉल होते ही फोन का कंट्रोल ठगों के पास
जैसे ही पीड़ित APK फाइल इंस्टॉल करता है, उसके मोबाइल की महत्वपूर्ण जानकारी साइबर अपराधियों तक पहुंचने लगती है। कई मामलों में स्क्रीन शेयरिंग, मैसेज पढ़ने, गैलरी और अन्य संवेदनशील डेटा तक भी ठगों की पहुंच बन जाती है। इसके बाद वे मोबाइल पर आने वाले बैंक OTP पढ़कर बैंक खाते और क्रेडिट कार्ड से पैसे निकाल लेते हैं, जबकि पीड़ित को इसकी भनक तक नहीं लगती।

 

'ऑपरेशन साइबर वज्र' से ठगों पर कार्रवाई
उत्तर प्रदेश पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ 'ऑपरेशन साइबर वज्र' अभियान शुरू किया है। इसके तहत संदिग्ध मोबाइल नंबरों, IMEI, फर्जी बैंक खातों और साइबर गिरोहों का बड़ा डेटाबेस तैयार किया गया है। पुलिस तकनीकी निगरानी के जरिए बागपत, गाजियाबाद, नोएडा सहित कई क्षेत्रों में अपराधियों की लोकेशन ट्रैक कर लगातार छापेमारी कर रही है। अभियान का उद्देश्य साइबर ठगी साइबर ठगी के संगठित नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना है।

 

फर्जी सिम और म्यूल अकाउंट पर भी शिकंजा
जांच एजेंसियां उन गिरोहों पर भी कार्रवाई कर रही हैं जो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिम कार्ड जारी करते हैं या म्यूल बैंक अकाउंट उपलब्ध कराते हैं। ऐसे खाते और मोबाइल नंबर साइबर अपराधियों द्वारा धोखाधड़ी की रकम ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। पुलिस का कहना है कि इन नेटवर्क पर कार्रवाई से साइबर अपराधों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।


ऐसे बचें APK और ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड से
विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी बैंक, क्रेडिट कार्ड कंपनी या सरकारी संस्था के नाम पर भेजी गई APK फाइल कभी डाउनलोड न करें। मोबाइल ऐप हमेशा केवल Google Play Store या Apple App Store से ही इंस्टॉल करें। यदि कोई व्यक्ति फोन पर कार्ड ब्लॉक होने, KYC बंद होने या खाते में समस्या बताकर ऐप डाउनलोड करने को कहे, तो तुरंत कॉल काट दें और संबंधित बैंक के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें। किसी भी संदिग्ध लिंक, OTP, PIN या बैंकिंग जानकारी को किसी के साथ साझा न करें।

 

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Sonu rai

Sonu rai

5 दिन पहले

Apradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!

Tanya Bajaj

Tanya Bajaj

5 दिन पहले

Kanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.

Taushif Shekh

Taushif Shekh

5 दिन पहले

Poori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.

Pranav Srivastava

Pranav Srivastava

5 दिन पहले

Police ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.

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