पीएम मोदी का वीडियो हटाने पर मेटा विवादों में: मेटा को सेफ हार्बर छीनने की चेतावनी

Tanya Bajaj
0 सेकंड पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Pooja Reddy
0 सेकंड पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Diya Gupta
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Vivaan Gupta
0 सेकंड पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Shruti Bajpai
0 सेकंड पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Myra Dubey
0 सेकंड पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Aarohi Chaudhary
0 सेकंड पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Neha Tripathi
0 सेकंड पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Ayaan Khan
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Rohan Desai
0 सेकंड पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Kabir Shukla
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Trapti Tanwar
0 सेकंड पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Neha Tripathi
0 सेकंड पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Sonu rai
0 सेकंड पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Ritika Ghosh
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Reyansh Joshi
0 सेकंड पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Pihu Agarwal
0 सेकंड पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Aryan Malhotra
0 सेकंड पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Kavya Mishra
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Pihu Agarwal
0 सेकंड पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Aryan Malhotra
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Rohan Desai
0 सेकंड पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Vihaan Patel
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Myra Dubey
0 सेकंड पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Anika Rajput
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Taushif Shekh
0 सेकंड पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Priya Iyer
0 सेकंड पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Ayaan Khan
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Tanya Bajaj
0 सेकंड पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े एक फेसबुक वीडियो को अस्थायी रूप से हटाए जाने के मामले ने अब बड़ा राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा कर दिया है। संसद की सूचना प्रौद्योगिकी (IT) संबंधी स्थायी समिति ने सोशल मीडिया कंपनी मेटा (Meta) के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कंपनी के सीईओ मार्क जुकरबर्ग से व्यक्तिगत रूप से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की है।समिति ने चेतावनी दी है कि यदि मेटा प्रमुख इस मामले में माफी नहीं मांगते हैं तो कंपनी को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा यानी 'सेफ हार्बर' (Safe Harbour) खत्म करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद 28 जुलाई 2026 को शुरू हुआ, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छात्रों के साथ पेपर लीक जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बातचीत का एक वीडियो फेसबुक से अचानक हटा दिया गया।रिपोर्ट के अनुसार, यह वीडियो करीब 5 घंटे तक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं रहा। बाद में इसे दोबारा बहाल कर दिया गया। वीडियो हटाए जाने की घटना के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और संसदीय समिति ने मेटा से जवाब मांगा।
निशिकांत दुबे ने मांग की जुकरबर्ग ने माफी मांगनी चाहिए
भाजपा सांसद और संसदीय आईटी समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि मेटा के वैश्विक प्रमुख मार्क जुकरबर्ग को इस घटना के लिए व्यक्तिगत रूप से सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए।समिति का कहना है कि प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से जुड़े आधिकारिक वीडियो का बिना स्पष्ट कारण हटना गंभीर चिंता का विषय है।
सेफ हार्बर खत्म करने की चेतावनी
आईटी समिति ने मेटा को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि कंपनी इस मामले में संतोषजनक जवाब नहीं देती है, तो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 79 के तहत मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा पर पुनर्विचार किया जा सकता है।सेफ हार्बर के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता।यदि यह सुरक्षा हटाई जाती है, तो फेसबुक, इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर मौजूद अवैध या विवादित सामग्री के लिए कंपनी को कानूनी जिम्मेदारी उठानी पड़ सकती है।
मेटा ने बताया तकनीकी खराबी
संसदीय समिति के सामने पेश हुए मेटा अधिकारियों ने इस घटना को तकनीकी समस्या (Technical Glitch) बताया।कंपनी की ओर से कहा गया कि वीडियो हटाना किसी गलत मंशा या पक्षपात का परिणाम नहीं था, बल्कि सिस्टम की तकनीकी गड़बड़ी के कारण ऐसा हुआ।हालांकि, समिति ने मेटा के इस जवाब को पर्याप्त नहीं माना और कई सवाल उठाए।
समिति ने उठाए एल्गोरिदम पर सवाल
आईटी समिति के सदस्यों ने सवाल किया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कई बार आपत्तिजनक और संवेदनशील सामग्री को हटाने में देरी करते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री से जुड़े आधिकारिक वीडियो को कैसे ब्लॉक कर दिया गया।समिति ने मेटा की कंटेंट मॉडरेशन नीति और एल्गोरिदम व्यवस्था को लेकर जवाब मांगा है।
बैठक में राजनीतिक बहस भी तेज
इस मुद्दे पर संसदीय समिति की बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस भी देखने को मिली।सत्तापक्ष के सदस्यों ने सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय करने की मांग की, जबकि विपक्षी सांसदों ने कहा कि तकनीकी प्लेटफॉर्म का नियमन जरूरी है, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।








