मोदी के फर्जी AI वीडियो पर बड़ी पुलिस कार्रवाई: PM मोदी डीपफेक केस में Meta इंडिया हेड पर FIR

Riya Jain
0 सेकंड पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
Aditya Verma
0 सेकंड पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Taushif Shekh
0 सेकंड पहलेPoori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.
Rohan Desai
0 सेकंड पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
Myra Dubey
0 सेकंड पहलेPoori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कथित एआई-निर्मित डीपफेक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के मामले में हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने मेटा इंडिया के प्रमुख अरुण श्रीनिवास सहित कई सोशल मीडिया अकाउंट संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां अब वीडियो के स्रोत और प्रसार की पूरी कड़ी तलाश रही हैं।
AI से तैयार किया गया कथित फर्जी वीडियो
प्रारंभिक जांच के अनुसार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और इंस्टाग्राम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कथित डीपफेक वीडियो प्रसारित किया गया था। वीडियो को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीक की मदद से मॉर्फ कर आपत्तिजनक रूप में प्रस्तुत किए जाने का आरोप है। शिकायत मिलने के बाद साइबर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और डिजिटल साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
Meta इंडिया प्रमुख बने सह-आरोपी
एफआईआर में मेटा इंडिया के प्रमुख अरुण श्रीनिवास को सह-आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि प्लेटफॉर्म पर प्रसारित भ्रामक और आपत्तिजनक सामग्री को समय रहते हटाने और उसके प्रसार को रोकने में पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस उन अकाउंट्स की भी जांच कर रही है जिन्होंने वीडियो को अपलोड, शेयर या व्यापक रूप से प्रसारित किया।
BNS और IT Act की धाराओं में दर्ज मामला
पुलिस ने यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत दर्ज किया है। जांच अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि वीडियो किसने तैयार किया, किन माध्यमों से प्रसारित हुआ और इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था। जरूरत पड़ने पर संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म से तकनीकी जानकारी भी मांगी जाएगी।
डीपफेक तकनीक पर बढ़ी चिंता
इस घटना ने एक बार फिर एआई आधारित डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के फर्जी वीडियो जनमानस को भ्रमित कर सकते हैं और सामाजिक तथा राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे मामलों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और साइबर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
जांच जारी, आगे हो सकती है सख्त कार्रवाई
हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार डिजिटल फोरेंसिक जांच, सर्वर लॉग और सोशल मीडिया रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि बिना सत्यापन किसी भी संदिग्ध वीडियो या सामग्री को साझा न करें।








