भारत-इंडोनेशिया के बीच ₹5,200 करोड़ का रक्षा सौदा: ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल देगा भारत

Vihaan Patel
2 दिन पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Sneha Menon
2 दिन पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Harsh Pandya
2 दिन पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Myra Dubey
2 दिन पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Saanvi Pandey
3 दिन पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया ने जकार्ता में लगभग 630 मिलियन डॉलर (करीब ₹5,200 करोड़) के ऐतिहासिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की मौजूदगी में हुए इस समझौते ने दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती दी है। यह भारत के रक्षा निर्यात के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल की होगी आपूर्ति
समझौते के तहत भारत इंडोनेशिया को ब्रह्मोस (BrahMos) सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और स्वदेशी अस्त्र Mk-1 (Astra Mk-1) बियॉन्ड-विजुअल-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल उपलब्ध कराएगा। इसके साथ ही भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) पहली बार अस्त्र Mk-1 मिसाइल का अंतरराष्ट्रीय निर्यात करेगी। भारतीय इंजीनियर इंडोनेशियाई वायुसेना के Su-30 लड़ाकू विमानों में अस्त्र मिसाइल प्रणाली को इंटीग्रेट और इंस्टॉल भी करेंगे।
इंडोनेशिया खरीदेगा अतिरिक्त ब्रह्मोस बैटरी
इंडोनेशिया ने अपनी समुद्री और तटीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत से एक अतिरिक्त ब्रह्मोस मिसाइल बैटरी खरीदने का भी फैसला किया है। यह खरीद चरणबद्ध (Phased Acquisition) मॉडल के तहत की जाएगी। फिलीपींस और वियतनाम के बाद इंडोनेशिया भारत से ब्रह्मोस खरीदने वाला तीसरा देश बन गया है, जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रक्षा साझेदारी और मजबूत होगी।
रक्षा के अलावा 20 महत्वपूर्ण समझौते
रक्षा सहयोग के साथ-साथ दोनों देशों ने 20 अन्य समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए। इनमें सुमात्रा के रणनीतिक साबंग पोर्ट का संयुक्त विकास, क्रिटिकल मिनरल्स (निकल और स्टील), कृषि, स्वास्थ्य, डिजिटल भुगतान (UPI-QRIS) और भारतीय EVM तकनीक से जुड़े सहयोग शामिल हैं। इन समझौतों का उद्देश्य आर्थिक और तकनीकी सहयोग को भी नई दिशा देना है।
हिंद-प्रशांत में भारत की रणनीतिक बढ़त
दक्षिण चीन सागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच इस रक्षा समझौते को भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी और रक्षा सहयोग का दायरा और मजबूत होगा। यह समझौता भारत की 'मेक इन इंडिया' रक्षा नीति को भी वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाएगा।
ऑपरेशन 'सिंदूर' के प्रदर्शन का भी असर
रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत द्वारा किए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान ब्रह्मोस सहित भारतीय मिसाइल प्रणालियों के प्रभावी प्रदर्शन ने इंडोनेशिया का भरोसा मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। इसी विश्वास के आधार पर इंडोनेशिया ने भारतीय रक्षा तकनीक पर बड़ा निवेश किया है। हालांकि, इस दावे को लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसे भारतीय रक्षा उद्योग के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।








