UNSC में भारत का सख्त संदेश: युद्ध में यौन हिंसा को बताया मानवता के खिलाफ अपराध

Vivaan Gupta
23 घंटे पहलेSarkar ko iske baare mein kuch karna chahiye!
Sai Mehta
1 दिन पहलेSarkar ko iske baare mein kuch karna chahiye!
Sneha Menon
1 दिन पहलेNishpaksh patrakarita ke liye shukriya, aise media chahiye.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में संघर्ष-संबंधी यौन हिंसा (Conflict-Related Sexual Violence - CRSV) पर आयोजित खुली बहस के दौरान भारत ने युद्ध, आतंकवाद, यातना और राजनीतिक दमन में यौन हिंसा को हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाने की कड़े शब्दों में निंदा की। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश ने इसे मानवता के खिलाफ गंभीर अपराध बताते हुए वैश्विक स्तर पर सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।
बढ़ते मामलों पर जताई चिंता
राजदूत पी. हरीश ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2025 में संघर्ष-संबंधी यौन हिंसा के सत्यापित मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं समुदायों को दबाने, असहमति को कुचलने और मानवीय पीड़ा बढ़ाने के लिए हथियार के रूप में इस्तेमाल की जा रही हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है।
दण्ड मुक्ति की संस्कृति खत्म करने की अपील
भारत ने कहा कि ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक तभी संभव है जब दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाए और दण्ड मुक्ति (Impunity) की संस्कृति समाप्त की जाए। भारतीय प्रतिनिधि ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सामूहिक प्रयास करने और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए मजबूत वैश्विक सहयोग का आह्वान किया।
महिला शांतिरक्षकों की भूमिका को सराहा
भारत ने संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भारतीय महिला शांतिरक्षकों की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि महिला शांति सैनिकों की तैनाती ने संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में विश्वास बहाल करने और यौन हिंसा की रोकथाम में सकारात्मक एवं परिवर्तनकारी प्रभाव डाला है।
भारतीय अधिकारियों को मिला सम्मान
भारत ने बताया कि मेजर मोइज़ यासीन और मेजर सोनिया देवेंद्र नवस्कर को संघर्ष-संबंधी यौन हिंसा की रोकथाम में उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2026 का 'संयुक्त राष्ट्र महासचिव मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर' मान्यता प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा। इसे संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भारत की सक्रिय भूमिका का महत्वपूर्ण सम्मान माना जा रहा है।
'जीरो टॉलरेंस' नीति दोहराई
भारत ने दोहराया कि वह आतंकवाद, मानवाधिकार उल्लंघन और संघर्ष क्षेत्रों में यौन हिंसा जैसे अपराधों के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर कायम है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान, अपराधियों की जवाबदेही और पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना वैश्विक शांति और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक है।








