Tamil Nadu Leads Factories: तमिलनाडु में सबसे ज्यादा कारखाने, गुजरात उत्पादन में अव्वल

Aarav Sharma
0 सेकंड पहलेPaise ka khel bahut risk bhara ho gaya hai, sambhal ke chalo.
Taushif Shekh
0 सेकंड पहलेPaise ka khel bahut risk bhara ho gaya hai, sambhal ke chalo.
Anil Sen
0 सेकंड पहलेPaise ka khel bahut risk bhara ho gaya hai, sambhal ke chalo.
Neha Tripathi
0 सेकंड पहलेFinancial planning sochni hogi ab naye sir se.
औद्योगिक क्षेत्र में तीन राज्यों का दबदबा
सांख्यिकी मंत्रालय के वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण 2024-25 के मुताबिक देश के औद्योगिक क्षेत्र में तमिलनाडु, गुजरात और महाराष्ट्र ने अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराई है। कारखानों की संख्या के मामले में तमिलनाडु सबसे आगे है, जबकि वस्तुओं के कुल उत्पादन में गुजरात ने पहला स्थान हासिल किया है। वहीं, राष्ट्रीय आय में सबसे अधिक योगदान देने के मामले में महाराष्ट्र शीर्ष पर बना हुआ है।
बड़े उद्योगों के पास केंद्रित है अधिकांश पूंजी
रिपोर्ट के अनुसार, देश में छोटे कारखानों की संख्या काफी अधिक है, लेकिन कुल स्थायी पूंजी का 79.59 फीसदी हिस्सा बड़े उद्योगों के पास केंद्रित है। यह आंकड़ा औद्योगिक क्षेत्र में बड़े कारखानों की आर्थिक भूमिका और पूंजी में उनकी मजबूत हिस्सेदारी को दर्शाता है।
2.18 लाख कारखानों में 2.10 करोड़ लोगों को रोजगार
सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, देशभर के 2.18 लाख कारखानों में करीब 2.10 करोड़ लोगों को सीधे रोजगार मिला हुआ है। इस आधार पर प्रत्येक कारखाने में औसतन 96 कर्मचारी काम करते हैं। औद्योगिक क्षेत्र में रोजगार के ये आंकड़े विनिर्माण गतिविधियों के आर्थिक और सामाजिक महत्व को दर्शाते हैं।
कारखानों में हजारों करोड़ रुपये की पूंजी और उत्पादन
एक औसत कारखाने में 2,339 लाख रुपये की स्थायी पूंजी लगी हुई है। ऐसे कारखाने सालाना औसतन 7,561 लाख रुपये मूल्य की वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करते हैं। वहीं, प्रत्येक कारखाने से राष्ट्रीय आय में करीब 1,052 लाख रुपये का शुद्ध मूल्य संवर्धन जुड़ता है।
कर्मचारियों को मिला 8.03 लाख करोड़ रुपये का पारिश्रमिक
वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण 2024-25 के मुताबिक, देश के कारखानों ने अपने कर्मचारियों को वेतन और भत्तों के रूप में कुल 8.03 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया। रिपोर्ट में विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए राज्यों की औद्योगिक क्षमताओं के बेहतर तालमेल पर जोर दिया गया है। तमिलनाडु का मजबूत फैक्ट्री नेटवर्क, गुजरात की उत्पादन क्षमता और महाराष्ट्र की उत्पादकता इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकती है। छोटे कारखानों को आगे बढ़ाने के लिए सस्ती पूंजी, आधुनिक मशीनरी और बड़े बाजारों तक पहुंच उपलब्ध कराना भी जरूरी बताया गया है।
खाद्य और केमिकल उद्योग की मजबूत हिस्सेदारी
प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में खाद्य उत्पाद उद्योग का महत्वपूर्ण योगदान सामने आया है। उत्तर प्रदेश के कुल औद्योगिक उत्पादन में खाद्य उत्पाद उद्योग की हिस्सेदारी 22.02 फीसदी है। देश के कुल खाद्य उत्पादन में उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र की संयुक्त हिस्सेदारी 37.61 फीसदी दर्ज की गई है। वहीं, रासायनिक उत्पादों के कुल उत्पादन में गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश मिलकर 56.31 फीसदी योगदान देते हैं।
रोजगार और GVA में धातु तथा वाहन उद्योग आगे
रोजगार उपलब्ध कराने के मामले में खाद्य उत्पाद उद्योग 11.24 फीसदी हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर है, जबकि कपड़ा उद्योग 8.37 फीसदी योगदान के साथ दूसरे स्थान पर है। सकल मूल्य संवर्धन यानी GVA में बुनियादी धातु उद्योग 11.58 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे रहा। वहीं, मोटर वाहन उद्योग 9.54 फीसदी योगदान के साथ दूसरे स्थान पर रहा। ये आंकड़े देश की अर्थव्यवस्था में विभिन्न विनिर्माण क्षेत्रों की अहम भूमिका को रेखांकित करते हैं।








