गंगा जल संधि पर बढ़ा तनाव: UN जाने की धमकी से बढ़ी चिंता

Tanya Bajaj
15 घंटे पहलेAam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.
Vihaan Patel
15 घंटे पहलेYeh mudda rajneeti se upar hai, insaniyat ki baat hai.
Trapti Tanwar
15 घंटे पहलेCommunity ko mil ke aage aana hoga is mudde par.
Pihu Agarwal
19 घंटे पहलेSamaj ke liye is khabar ka bahut mahatva hai.
Sonu rai
21 घंटे पहलेHum is cause ke saath hain, awaaz uthani chahiye.
Nidhi kumari
22 घंटे पहलेHum is cause ke saath hain!
Rohan Desai
23 घंटे पहलेHum is cause ke saath hain!
भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 में हुई 30 साल की गंगा जल संधि दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है। संधि की अवधि खत्म होने से पहले दोनों देशों के बीच नए समझौते को लेकर बातचीत और राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। बांग्लादेश नए समझौते में सूखे के मौसम के दौरान पानी की निश्चित उपलब्धता चाहता है। वहीं भारत इस पूरे मामले को द्विपक्षीय बातचीत और स्थापित संस्थागत व्यवस्था के जरिए सुलझाने के पक्ष में है। दोनों देशों के बीच होने वाली आगामी बातचीत संधि के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बांग्लादेश ने मांगा गारंटी क्लॉज
बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी अनी ने नए समझौते में गारंटी क्लॉज शामिल करने की मांग रखी है। इस प्रावधान के तहत बांग्लादेश सूखे के मौसम में न्यूनतम मात्रा में पानी मिलने की लिखित गारंटी चाहता है। बांग्लादेश का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था उसके लिए पर्याप्त जल सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पाई है। ढाका की ओर से इस मुद्दे को लेकर भारत पर दबाव बढ़ाया जा रहा है। आने वाले समय में यह मांग दोनों देशों के बीच बातचीत का प्रमुख मुद्दा बन सकती है।
UN जाने की चेतावनी
गंगा जल बंटवारे के मुद्दे पर बांग्लादेश ने अंतरराष्ट्रीय मंच का रुख करने का संकेत भी दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक ढाका इस मामले को संयुक्त राष्ट्र सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की तैयारी कर रहा है। बांग्लादेशी प्रधानमंत्री तारिक रहमान अगले महीने संयुक्त राष्ट्र में इस मुद्दे को उठा सकते हैं। हालांकि भारत का रुख है कि दोनों देशों के बीच जल बंटवारे का मामला द्विपक्षीय है। भारत इसे अंतरराष्ट्रीय मंच के बजाय संयुक्त नदी आयोग जैसे स्थापित तंत्र के जरिए सुलझाने पर जोर दे रहा है।
फरक्का बैराज पर बांग्लादेश की आपत्ति
बांग्लादेश ने भारत के फरक्का बैराज और उससे जुड़े तटबंधों को लेकर भी गंभीर आपत्ति जताई है। बांग्लादेशी अधिकारियों का आरोप है कि इन संरचनाओं का उसके जल प्रवाह और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ढाका की ओर से फरक्का बैराज को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही है। दूसरी तरफ भारत पानी के प्रवाह और उपलब्धता से जुड़े तकनीकी आंकड़े साझा करने की प्रक्रिया जारी रखता है। दोनों देशों के बीच वैज्ञानिक आंकड़ों और जल प्रवाह की वास्तविक स्थिति को लेकर भी बातचीत महत्वपूर्ण होगी।
भारत का द्विपक्षीय बातचीत पर जोर
भारत सरकार का कहना है कि गंगा जल संधि के नवीनीकरण को लेकर अभी औपचारिक द्विपक्षीय बातचीत शुरू नहीं हुई है। भारत का रुख है कि जल बंटवारे जैसे संवेदनशील मुद्दे को संयुक्त नदी आयोग और अन्य स्थापित संस्थागत माध्यमों से सुलझाया जाना चाहिए। भारत नियमित रूप से जल प्रवाह से संबंधित आंकड़े साझा करने की व्यवस्था पर भी जोर देता है। साथ ही केंद्रीय जल आयोग की तकनीकी टीम पानी के स्तर और प्रवाह की निगरानी करती है। भारत किसी भी नए समझौते में वैज्ञानिक आंकड़ों और व्यावहारिक परिस्थितियों को महत्वपूर्ण आधार मान सकता है।
बंगाल और बिहार के हित भी अहम
गंगा जल संधि के नए स्वरूप में भारत के लिए पश्चिम बंगाल और बिहार की चिंताएं भी महत्वपूर्ण रहेंगी। दोनों राज्यों में गंगा के पानी का इस्तेमाल कृषि, पेयजल और अन्य जरूरतों के लिए होता है। जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश, बाढ़ और सूखे के पैटर्न में बदलाव ने इस मुद्दे को और जटिल बना दिया है। ऐसे में भारत लंबे समय के बजाय कम अवधि वाले और समय-समय पर नवीनीकरण योग्य समझौते पर विचार कर सकता है। आने वाले महीनों में भारत और बांग्लादेश के बीच तकनीकी तथा कूटनीतिक बातचीत से नई गंगा जल व्यवस्था की दिशा तय होने की उम्मीद है।








