SIT क्लीन चिट के बाद चंपत राय का बयान: राम मंदिर ट्रस्ट ने टैक्स चोरी से किया इनकार

Kabir Shukla
0 सेकंड पहलेJab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.
Ada khan
0 सेकंड पहलेYeh samajik mudda bahut gambhir hai, dhyan dena zaroori hai.
Priya Iyer
0 सेकंड पहलेJab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.
Ravi sinha
0 सेकंड पहलेJab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.
Saanvi Pandey
0 सेकंड पहलेAam janta ka kya hoga? Koi nahi socha inke baare mein.
Aarohi Chaudhary
0 सेकंड पहलेJab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने एक 9 पन्नों के खुले पत्र के जरिए ट्रस्ट पर लगे टैक्स चोरी के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की ओर से सरकार के किसी भी टैक्स की चोरी नहीं की गई है और सभी सरकारी नियमों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है। चंपत राय के मुताबिक ट्रस्ट से जुड़े अलग-अलग सरकारी विभागों को देय टैक्स निर्धारित नियमों के अनुसार समय पर जमा किए जाते हैं। उन्होंने पत्र में ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था और भुगतान प्रक्रिया को लेकर भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं।
GST से लेकर PF तक भुगतान का दावा
चंपत राय ने अपने पत्र में कहा कि ट्रस्ट की ओर से GST, TDS, रजिस्ट्री स्टांप ड्यूटी, लेबर सेस, PF और ESI जैसे सभी जरूरी भुगतान समय पर किए जाते हैं। उन्होंने वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता का दावा करते हुए बताया कि ट्रस्ट का बैंक खाता बिना चेक वाला खाता है। ट्रस्ट की ओर से किए जाने वाले भुगतान ऑनलाइन बैंकिंग माध्यम से किए जाते हैं। उनके अनुसार RTGS के जरिए भुगतान की व्यवस्था रखी गई है, जिससे वित्तीय लेनदेन का रिकॉर्ड बना रहता है। चंपत राय ने इसी व्यवस्था का हवाला देते हुए ट्रस्ट पर टैक्स नियमों की अनदेखी के आरोपों को गलत बताया है।
SIT रिपोर्ट के बाद सामने आया पत्र
चंपत राय का यह बयान राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े कथित गबन मामले की जांच के बीच सामने आया है। उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष जांच दल यानी SIT ने इस मामले में अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश की है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार SIT ने चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा को इस मामले में क्लीन चिट दी है। इसके बाद चंपत राय ने खुले पत्र के जरिए ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था और अपने पक्ष को विस्तार से सामने रखा है। हालांकि मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर जांच और कानूनी प्रक्रिया का संदर्भ भी बना हुआ है।
दान और चढ़ावे की गिनती को लेकर विवाद
राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से दिए जाने वाले दान और चढ़ावे की गिनती को लेकर पहले से विवाद सामने आया था। जांच में कई घटनाओं में कथित अनियमितताओं और गड़बड़ी के आरोप लगाए गए थे। चंपत राय और अनिल मिश्रा पर सीधे चोरी करने का आरोप नहीं था, बल्कि उनके कार्यकाल में निगरानी और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए थे। मामले की जांच के दौरान कई लोगों को आरोपी बनाया गया और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई। SIT की अंतिम रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दिए जाने की बात सामने आई है।
जांच में आठ लोगों पर कार्रवाई
राम मंदिर दान चोरी मामले की जांच के दौरान आठ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई थी। जांच एजेंसी ने अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ तिन्नू को आरोपी बनाया था। इन आरोपियों के खिलाफ पुलिस की ओर से गिरफ्तारी और आगे की कानूनी कार्रवाई की गई। मामले में भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच का उद्देश्य कथित वित्तीय अनियमितताओं की पूरी तस्वीर सामने लाना है।
अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी पर नजर
राम मंदिर दान से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। अदालत ने जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने और मामले की स्थिति रिपोर्ट पेश करने को लेकर निर्देश दिए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जांच से संबंधित रिपोर्ट को लेकर अदालत ने फिलहाल उसे सार्वजनिक करने की अनुमति नहीं दी है। ऐसे में चंपत राय की ओर से जारी 9 पन्नों का पत्र मामले में उनका पक्ष सामने रखने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है। अब आगे की जांच, अदालत की कार्रवाई और ट्रस्ट की आगामी बैठकों पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।








