पश्चिम बंगाल में लागू हुआ सख्त 'गुंडा दमन' कानून: गैंगस्टर, तस्करी और रंगदारी पर शिकंजा

Neel Saxena
6 घंटे पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Vivaan Gupta
6 घंटे पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Trapti Tanwar
10 घंटे पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Ritika Ghosh
12 घंटे पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
पश्चिम बंगाल में 13 जुलाई 2026 से 'पश्चिम Bengal Public Safety and Control of Anti-Social Activities Act, 2026' लागू हो गया है। राज्य सरकार का दावा है कि यह कानून संगठित अपराध, गैंग गतिविधियों, हिंसा और असामाजिक तत्वों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए बनाया गया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इसे कानून-व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बताया है।
12 महीने तक प्रिवेंटिव डिटेंशन का प्रावधान
कानून का सबसे चर्चित प्रावधान यह है कि प्रशासन संदिग्ध असामाजिक गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों को 12 महीने तक प्रिवेंटिव डिटेंशन (निवारक हिरासत) में रख सकता है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य संभावित अपराधों को रोकना है, जबकि विपक्ष और कुछ कानूनी विशेषज्ञों ने इस प्रावधान पर चिंता जताई है।
संगठित अपराधों पर कड़ा शिकंजा
नए कानून का दायरा रंगदारी, संगठित अपराध, तस्करी, सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने वाली गतिविधियों और अन्य गंभीर अपराधों तक विस्तारित किया गया है। सरकार का दावा है कि इससे गैंग नेटवर्क और अपराध सिंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई आसान होगी।
संपत्ति जब्ती और जिलाबदर की शक्ति
कानून के तहत अपराध से जुड़ी संपत्तियों को जब्त करने, कुर्क करने तथा कुछ मामलों में आरोपितों को किसी क्षेत्र या जिले से बाहर करने (Externment) का भी प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे अपराधियों की आर्थिक ताकत कमजोर होगी।
सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पर वसूली
इसके साथ लागू संशोधित कानून के तहत दंगों, हिंसक प्रदर्शनों या तोड़फोड़ के दौरान सरकारी और निजी संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई आरोपियों या जिम्मेदार व्यक्तियों की संपत्ति से की जा सकेगी। राज्य सरकार इसे "नुकसान करने वाला ही भुगतान करेगा" सिद्धांत बता रही है।
कानून पर बहस भी तेज
जहां सरकार इसे अपराध नियंत्रण के लिए जरूरी कदम बता रही है, वहीं विपक्षी दलों और कुछ कानूनी विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि इतने व्यापक अधिकारों के दुरुपयोग की संभावना पर निगरानी जरूरी होगी। आने वाले समय में इस कानून के क्रियान्वयन और उसके प्रभाव पर सभी की नजर रहेगी।








