पहली बार वोटर बनने वालों के लिए नया नियम: ऑनलाइन फॉर्म-6 में माता-पिता की चुनावी जानकारी जरूरी

Saanvi Pandey
2 घंटे पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Navya Nair
2 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Anika Rajput
3 घंटे पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Simran Arora
9 घंटे पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Pooja Reddy
11 घंटे पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
चुनाव आयोग ने पहली बार वोटर आईडी के लिए आवेदन करने वाले नागरिकों की ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया में बदलाव किया है। अब ECINET पोर्टल पर Form-6 भरते समय आवेदकों को अपने माता-पिता या अभिभावकों की चुनावी स्थिति (Electoral Details) से संबंधित घोषणा देनी होगी। इसका उद्देश्य नए मतदाताओं का सत्यापन अधिक प्रभावी बनाना है।
ऑनलाइन आवेदन में SIR से जुड़ी जानकारी मांगी जा रही है
नई व्यवस्था के तहत आवेदकों से पूछा जा रहा है कि क्या उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम Special Intensive Revision (SIR) की मतदाता सूची में दर्ज था। यदि उत्तर "हाँ" है, तो संबंधित विधानसभा क्षेत्र, मतदान केंद्र और मतदाता सूची क्रमांक जैसी जानकारी भरनी होगी। यदि परिवार का नाम सूची में नहीं था, तो इसकी भी घोषणा करनी होगी।
आवेदन सबमिट करने में आ रही बाधा
हालांकि ऑनलाइन पोर्टल पर इस विकल्प को स्पष्ट रूप से "Mandatory" नहीं लिखा गया है, लेकिन कई आवेदकों के अनुसार यह जानकारी भरे बिना ऑनलाइन आवेदन सबमिट नहीं हो पा रहा है। फिलहाल यह व्यवस्था ECINET पोर्टल के ऑनलाइन फॉर्म में लागू है।
चुनाव आयोग ने बताया बदलाव का उद्देश्य
चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, इस व्यवस्था से फर्जी और डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान, परिवार आधारित सत्यापन (Parent-Child Mapping) और नए मतदाताओं के दस्तावेज़ों की जांच की प्रक्रिया अधिक आसान होगी। इससे मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
ऑफलाइन फॉर्म में अभी नहीं हुआ बदलाव
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह बदलाव फिलहाल केवल ऑनलाइन Form-6 में दिखाई दे रहा है। आधिकारिक ऑफलाइन फॉर्म में अभी तक ऐसा कोई संशोधन शामिल नहीं किया गया है। साथ ही, मूल Form-6 में कानून मंत्रालय की ओर से किसी गजट अधिसूचना के माध्यम से संशोधन की सूचना भी अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है।
नियम को लेकर चर्चा भी तेज
पूर्व चुनाव अधिकारियों और चुनावी मामलों के जानकारों का कहना है कि यह बदलाव फिलहाल प्रशासनिक निर्देशों के माध्यम से लागू किया गया है। ऐसे में इसे लेकर कानूनी और प्रक्रियागत चर्चा भी शुरू हो गई है। चुनाव आयोग का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है।








