मद्रास हाई कोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट का स्टे: गो-हत्या विवाद में सुप्रीम कोर्ट की एंट्री

गो-हत्या विवाद में सुप्रीम कोर्ट की एंट्री
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Harsh Pandya

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0 सेकंड पहले

Aise logon ko support karna humara farz hai.

Ananya Sharma

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0 सेकंड पहले

Aam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.

Tanya Bajaj

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3 घंटे पहले

Community ko mil ke aage aana hoga is mudde par.

Kunal Rao

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5 घंटे पहले

Yeh mamla sabke saath ho sakta hai, jaagrukata zaroori.

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सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की खंडपीठ ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें तमिलनाडु में गो-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया गया था। शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए यह राहत दी और मामले में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया।


क्या था मद्रास हाई कोर्ट का आदेश?
मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने 27 मई को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि बकरीद सहित किसी भी दिन राज्य में गाय और बछड़े का वध न होने दिया जाए। इस आदेश का प्रभाव लाइसेंस प्राप्त बूचड़खानों तक भी पहुंचा, जिससे राज्य में कानूनी रूप से संचालित वधशालाओं के संचालन पर भी असर पड़ा।


राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
तमिलनाडु सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि यह तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम, 1958 के विपरीत है। सरकार का तर्क था कि राज्य का मौजूदा कानून कुछ निर्धारित परिस्थितियों—जैसे पशु की अधिक आयु या कार्य करने में अक्षम होने—पर सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से गो-हत्या की अनुमति देता है। इसलिए पूर्ण प्रतिबंध कानून के अनुरूप नहीं है।

 

अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने का आरोप
राज्य सरकार ने यह भी कहा कि मूल जनहित याचिका का उद्देश्य केवल सार्वजनिक स्थानों पर अवैध वध को रोकना था। लेकिन हाई कोर्ट ने आदेश का दायरा बढ़ाकर पूरे राज्य में पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया, जो याचिका के दायरे से बाहर था। सरकार ने इसे न्यायिक अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़कर दिया गया आदेश बताया।


फिलहाल पुराना कानून ही रहेगा लागू
सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक के बाद फिलहाल तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम, 1958 के प्रावधान प्रभावी रहेंगे। इसका अर्थ है कि राज्य में लाइसेंस प्राप्त बूचड़खाने मौजूदा कानूनी नियमों और निर्धारित शर्तों के अनुसार अपना संचालन जारी रख सकते हैं।


अंतिम फैसला अभी बाकी
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह केवल अंतरिम राहत है और मामले की अंतिम सुनवाई अभी बाकी है। अब शीर्ष अदालत यह तय करेगी कि मद्रास हाई कोर्ट का आदेश कानून और संविधान के अनुरूप था या नहीं। तब तक राज्य में मौजूदा वैधानिक व्यवस्था लागू रहेगी।

 

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