CJI सूर्यकांत ने मीडिया रिपोर्टिंग पर जताई नाराजगी: बोले- कोई रिट याचिका दाखिल ही नहीं हुई थी

Myra Dubey
0 सेकंड पहलेYeh padh ke ankhe khul gayi, sabko dikhao.
Trapti Tanwar
0 सेकंड पहलेBreaking news! Sabko is baare mein pata hona chahiye.
Nisha Shah
57 मिनट पहलेHamara media aisa hi hona chahiye, sach aur saaf.
Myra Dubey
2 घंटे पहलेEkdum sahi aur balanced news hai yeh.
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामले की सुप्रीम कोर्ट में लिस्टिंग को लेकर प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों पर शुक्रवार को कड़ी नाराजगी जताई। CJI ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में कोई औपचारिक रिट याचिका दाखिल नहीं की गई थी। उनके सामने केवल एक वकील की ओर से भेजे गए रिप्रेजेंटेशन या पत्र का जिक्र किया गया था। ऐसे में इसे विधिवत दाखिल याचिका मानकर सूचीबद्ध करने का सवाल ही नहीं उठता था।
CJI बोले- रजिस्ट्री से जांच कराई, एक भी पन्ना दाखिल नहीं हुआ था
CJI सूर्यकांत ने कहा कि उन्होंने मामले की स्थिति जानने के लिए रजिस्ट्री से जांच कराई थी। उन्हें बताया गया कि सुबह 10 बजे तक मामले से संबंधित एक भी पन्ना विधिवत दाखिल नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि जब कोई औपचारिक याचिका ही दाखिल नहीं हुई, तो केवल एक रिप्रेजेंटेशन को रिट पिटीशन के तौर पर कैसे माना जा सकता है।
CJI ने मीडिया रिपोर्टिंग पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पिछले दो दिनों में यह गलत खबर प्रसारित की गई कि उन्होंने मामले को सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया। उन्होंने इस तरह की रिपोर्टिंग को गैर-जिम्मेदाराना और लापरवाह बताया।
'इसका मतलब यह नहीं कि सही तरीके से दाखिल याचिका नहीं सुनी जाएगी'
मुख्य न्यायाधीश ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके बयान का यह अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए कि वह इस मुद्दे पर विधिवत दाखिल याचिका की सुनवाई नहीं करेंगे। उनका कहना था कि अदालत के समक्ष उचित प्रक्रिया के तहत याचिका दाखिल होने के बाद ही उसकी लिस्टिंग और सुनवाई का सवाल आता है।
उन्होंने मीडिया से न्यायिक कार्यवाही की रिपोर्टिंग करते समय तथ्यों की पुष्टि करने और जिम्मेदारी के साथ खबरें प्रकाशित करने की अपेक्षा जताई।
22 जुलाई को मामले के उल्लेख पर CJI ने तत्काल सुनवाई नहीं की थी
यह विवाद 22 जुलाई की सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के बाद शुरू हुआ था। उस दिन वकील नरेंद्र मिश्रा ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामले का अदालत के समक्ष उल्लेख किया था। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और कथित ज्यादती का मुद्दा उठाते हुए वीडियो साक्ष्य होने की बात कही थी।
रिपोर्टों के मुताबिक, CJI सूर्यकांत ने उस समय मामले की तत्काल सुनवाई या अर्जेंट लिस्टिंग के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। जब वकील ने पुलिस कार्रवाई से जुड़े वीडियो दिखाने की बात कही, तो CJI ने कहा कि अदालत के पास वीडियो देखने का समय नहीं है और वकील से अपना तथा अदालत का समय बर्बाद नहीं करने को कहा।
'मामला लिस्ट करने से इनकार' और 'तत्काल सुनवाई नहीं' में अंतर
बाद की स्थिति स्पष्ट करते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा कि मीडिया में यह रिपोर्ट करना कि उन्होंने किसी विधिवत दाखिल याचिका को सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं था। उनके अनुसार, उस समय उनके सामने औपचारिक रिट याचिका नहीं बल्कि एक रिप्रेजेंटेशन था।
इस तरह 22 जुलाई को अदालत ने तत्काल सुनवाई के अनुरोध पर आगे नहीं बढ़ने का रुख अपनाया था, जबकि 24 जुलाई को CJI ने स्पष्ट किया कि जिस मामले को लेकर मीडिया में रिपोर्टिंग हुई, उसकी कोई औपचारिक रिट याचिका उस समय दाखिल ही नहीं हुई थी।
20 जुलाई के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर उठा था विवाद
यह पूरा मामला 20 जुलाई को दिल्ली में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के आरोपों से जुड़ा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया था, जिसके दौरान पुलिस के साथ टकराव की स्थिति बनी और कई प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की खबरें सामने आईं।
प्रदर्शनकारी छात्र NEET और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध कर रहे थे। पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्षी दलों और अन्य पक्षों की ओर से भी सवाल उठाए गए हैं। इसी घटनाक्रम के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में तत्काल हस्तक्षेप की मांग का उल्लेख किया गया था।
CJI की टिप्पणी के बाद मीडिया रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी पर बहस
CJI सूर्यकांत की शुक्रवार की टिप्पणी के बाद इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया और मीडिया रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। CJI ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी रिप्रेजेंटेशन और विधिवत दाखिल रिट याचिका को एक समान नहीं माना जा सकता। वहीं, 22 जुलाई की कार्यवाही में तत्काल सुनवाई न होने के बाद सामने आई खबरों और 24 जुलाई को CJI की सफाई के बीच अंतर को समझना भी जरूरी है।
इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि अदालत में किसी मामले के मौखिक उल्लेख, रिप्रेजेंटेशन और औपचारिक रूप से दाखिल याचिका के बीच कानूनी प्रक्रिया के स्तर पर महत्वपूर्ण अंतर होता है।


