Sawan 2026: 30 जुलाई से शुरू होगा सावन: चार सोमवार और नाग पंचमी का विशेष संयोग

चार सोमवार और नाग पंचमी का विशेष संयोग
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Pooja Reddy

Pooja Reddy

2 घंटे पहले

Ishwar ki leela ko koi nahi samjha sakta.

Riya Jain

Riya Jain

2 घंटे पहले

Rishiyon ne sadi pehle hi inka jikr kiya tha.

Shruti Bajpai

Shruti Bajpai

2 घंटे पहले

Aaj ka din bahut mahatvapurna raha jyotish ke hisaab se.

Aarohi Chaudhary

Aarohi Chaudhary

2 घंटे पहले

Spirituality hi asli shakti hai is duniya mein.

Neha Tripathi

Neha Tripathi

2 घंटे पहले

Rishiyon ne sadi pehle hi inka jikr kiya tha.

Nidhi kumari

Nidhi kumari

3 घंटे पहले

Yeh toh planets ki chaal ka hi asar hai!

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भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माने जाने वाला सावन मास इस वर्ष उत्तर भारतीय पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार 30 जुलाई 2026 से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 तक रहेगा। सावन के पूरे महीने शिव भक्त भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र जाप और शिव नाम संकीर्तन में लीन रहेंगे। इस दौरान देशभर के शिवालयों में विशेष धार्मिक आयोजन होंगे और श्रद्धालु महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मंदिरों में पहुंचेंगे।

 

सावन में पड़ेंगे चार सोमवार, 3 अगस्त से होगी शुरुआत
सावन सोमवार को भगवान शिव की उपासना के लिए विशेष महत्व वाला दिन माना जाता है। 2026 में सावन के चार सोमवार 3 अगस्त, 10 अगस्त, 17 अगस्त और 24 अगस्त को पड़ेंगे। इन दिनों श्रद्धालु व्रत रखकर शिवलिंग पर जल और गंगाजल अर्पित करेंगे तथा भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करेंगे। 10 अगस्त को सोम प्रदोष का भी संयोग रहेगा, जबकि 17 अगस्त को तीसरे सावन सोमवार के दिन नाग पंचमी का पर्व मनाया जाएगा।

 

17 अगस्त को सावन सोमवार और नाग पंचमी का संयोग
इस बार 17 अगस्त का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है, क्योंकि इसी दिन सावन का तीसरा सोमवार और नाग पंचमी दोनों पड़ रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा करने और शिवलिंग पर जलाभिषेक करने का विशेष महत्व है। श्रद्धालु इस अवसर पर भगवान शिव से सुख-शांति, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।

 

सावन में जलाभिषेक और रुद्राभिषेक की विशेष मान्यता
सावन के दौरान भगवान शिव को जल, गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और आक के फूल अर्पित करने की परंपरा है। कई श्रद्धालु सोमवार के दिन शिवलिंग का रुद्राभिषेक भी करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सावन में श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान शिव की पूजा करने से मन को शांति मिलती है और भक्त को आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।

 

भगवान शिव के नामों का जाप माना जाता है शुभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में भगवान शिव के नामों और मंत्रों का जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है। भक्त इस दौरान 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करने के साथ महादेव, भोलेनाथ, शंकर, नीलकंठ, रुद्र, पशुपति, विश्वनाथ, उमापति, आशुतोष, त्रिपुरारी, महाकाल, नटराज और अर्धनारीश्वर जैसे शिव के विभिन्न नामों का स्मरण करते हैं।
मान्यता है कि सच्चे मन से महादेव का स्मरण करने से मानसिक शांति मिलती है और व्यक्ति में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हालांकि, ये धार्मिक मान्यताएं हैं और इनके फल को आस्था एवं विश्वास के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।

 

सावन में शिव परिवार की पूजा भी करें
सावन में भगवान शिव के साथ माता पार्वती, भगवान गणेश, भगवान कार्तिकेय और नंदी की पूजा करने की भी परंपरा है। श्रद्धालु शिव परिवार की आराधना कर परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और सौहार्द की कामना करते हैं। मंदिरों में विशेष पूजा के दौरान शिवलिंग पर बेलपत्र और जल अर्पित करने के साथ शिव चालीसा और महामृत्युंजय मंत्र का पाठ भी किया जाता है।

 

सावन सोमवार व्रत रखने वाले इन बातों का रखें ध्यान
सावन सोमवार का व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी आस्था और स्वास्थ्य के अनुसार उपवास करते हैं। कई लोग फलाहार करते हैं, जबकि कुछ लोग पूरे दिन निर्जल या केवल जल ग्रहण करके व्रत रखते हैं। हालांकि, निर्जल व्रत हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होता, इसलिए स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर अपनी शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है।
धार्मिक परंपराओं में सावन के दौरान सात्विक भोजन करने, मांसाहार और मदिरा से दूर रहने तथा संयमित जीवनशैली अपनाने की मान्यता है। कुछ क्षेत्रों और परिवारों में विशेष खाद्य पदार्थों से परहेज करने की परंपरा भी है, लेकिन ये नियम सभी स्थानों पर समान नहीं हैं।

 

सावन में शिव भक्ति के साथ धार्मिक आयोजनों की धूम
सावन के दौरान शिव मंदिरों में भजन-कीर्तन, जागरण, शिव नाम संकीर्तन और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाएगा। सोमवार के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। कई स्थानों पर कांवड़ यात्रा और शिव यात्रा से जुड़े धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
सावन का यह पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना, साधना और आध्यात्मिक चिंतन के लिए विशेष माना जाता है। भक्त इस दौरान अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत और पूजा करते हुए महादेव से सुख-शांति, उत्तम स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करेंगे।

 

सावन 2026 के चार सोमवार
पहला सावन सोमवार: 3 अगस्त 2026
दूसरा सावन सोमवार: 10 अगस्त 2026
तीसरा सावन सोमवार: 17 अगस्त 2026 — नाग पंचमी
चौथा सावन सोमवार: 24 अगस्त 2026

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Pooja Reddy

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2 घंटे पहले

Ishwar ki leela ko koi nahi samjha sakta.

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2 घंटे पहले

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Shruti Bajpai

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2 घंटे पहले

Aaj ka din bahut mahatvapurna raha jyotish ke hisaab se.

Aarohi Chaudhary

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2 घंटे पहले

Spirituality hi asli shakti hai is duniya mein.

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Rishiyon ne sadi pehle hi inka jikr kiya tha.

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3 घंटे पहले

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