India Rejects UN Remarks: दिल्ली प्रदर्शन पर UN की टिप्पणी को भारत ने किया खारिज

Priya Iyer
4 घंटे पहलेBahut achhi reporting ki hai, keep it up!
Dhruv Bhatt
6 घंटे पहलेYeh news bahut zaroori hai public ke liye.
Vihaan Patel
6 घंटे पहलेSarkar ko iske baare mein kuch karna chahiye!
Payal jadon
6 घंटे पहलेNishpaksh patrakarita ke liye shukriya, aise media chahiye.
Myra Dubey
7 घंटे पहलेPehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!
Saanvi Pandey
9 घंटे पहलेPehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!
Monika Das
11 घंटे पहलेNishpaksh patrakarita ke liye shukriya, aise media chahiye.
Priya Iyer
12 घंटे पहलेYeh news bahut zaroori hai public ke liye.
दिल्ली प्रदर्शन पर संयुक्त राष्ट्र की टिप्पणी को भारत ने किया खारिज
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आह्वान पर हुए प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के मामले पर भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) की टिप्पणियों को खारिज कर दिया है। भारत ने OHCHR की चिंता को अनुचित बताते हुए इसे देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करार दिया। यह प्रतिक्रिया उन खबरों के बाद आई, जिनमें प्रदर्शन से पहले और उसके दौरान प्रदर्शनकारियों, विरोध के नेताओं, नागरिक समाज के सदस्यों, वकीलों और पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने की बात कही गई थी।
भारत ने संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं का दिया हवाला
जेनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि भारत के संविधान में शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के अधिकार की गारंटी दी गई है। बयान के अनुसार, देश की संस्थाएं, स्वतंत्र न्यायपालिका और स्वतंत्र मीडिया इस अधिकार की रक्षा करते हैं। भारत ने कहा कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कानून के तहत उचित प्रतिबंध लागू हो सकते हैं और किसी भी शिकायत के समाधान के लिए अदालतें उपलब्ध हैं।
भारत ने OHCHR की चिंताओं को बताया बेबुनियाद
भारतीय मिशन ने अपने बयान में कहा कि OHCHR की चिंताएं बेबुनियाद हैं और भारत के आंतरिक मामलों में अनावश्यक दखलंदाजी हैं। बयान में यह भी कहा गया कि निष्पक्षता और भेदभाव से दूर रहने के अपने दायित्व को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय को दूसरे स्थानों पर हो रहे बड़े विरोध प्रदर्शनों पर भी समान रूप से ध्यान देना चाहिए। भारत ने अपने पक्ष में शांतिपूर्ण सभा के संवैधानिक अधिकार और देश की संस्थागत व्यवस्था का उल्लेख किया।
संयुक्त राष्ट्र ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर दिया जोर
इससे पहले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रवक्ता थामीन अल-खीतान ने दिल्ली में प्रदर्शनों से जुड़ी सामूहिक हिरासत की खबरों पर चिंता जताई थी। उन्होंने अधिकारियों से शांतिपूर्ण सभा के अधिकार का पूरी तरह सम्मान और पालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया था। OHCHR ने कहा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाने के लिए आवश्यकता और अनुपात की कसौटी का पालन किया जाना चाहिए। कार्यालय ने कानून प्रवर्तन कर्मियों से शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान संयम बरतने की अपील भी की थी।
मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई की मांग
OHCHR ने मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोगों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग की थी। साथ ही भारतीय अधिकारियों से प्रदर्शनकारियों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सार्थक बातचीत करने का आग्रह किया था। भारत और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के बयानों में शांतिपूर्ण सभा के अधिकार और प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन
CJP और अन्य संगठनों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। इसी मुद्दे को लेकर दिल्ली में विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की गई थी। दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। पुलिस ने कम समय पहले सूचना दिए जाने, पिछले प्रदर्शनों में कथित नियम उल्लंघन तथा सुरक्षा, यातायात और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया था।








