गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग तेज: छात्र आंदोलन का नया चरण

Taushif Shekh
0 सेकंड पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Krishna Yadav
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Priya Iyer
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Shruti Bajpai
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
नीट पेपर लीक के विरोध में चले लंबे छात्र आंदोलन के बाद अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि 20 जुलाई को हुए "संसद चलो" मार्च के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय की है। यह मुद्दा अब संसद से लेकर सड़क तक राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
विपक्ष का सरकार पर हमला
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य विपक्षी दलों ने मानसून सत्र के दौरान इस मुद्दे को उठाया। विपक्ष ने छात्रों पर हुई कार्रवाई की जवाबदेही तय करने और गृह मंत्री अमित शाह से इस्तीफे की मांग की। संसद परिसर में भी विरोध प्रदर्शन किए गए।
सीजेपी का आरोप
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करती है, इसलिए छात्रों पर हुई कार्रवाई के लिए राजनीतिक जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली गईं तो संगठन दोबारा देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगा। यह आरोप सीजेपी का पक्ष है।
सरकार का रुख
सरकार ने विपक्ष और सीजेपी के आरोपों को खारिज किया है। इससे पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा सुधारों की घोषणा के बाद सरकार ने कई कदम उठाए थे। छात्र आंदोलन के दबाव के बीच परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए नई पहल भी शुरू की गई है।
आंदोलन का असर
जंतर-मंतर पर चले लंबे आंदोलन के बाद सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में सुधारों की दिशा में कदम बढ़ाए। अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी इस छात्र आंदोलन को हाल के वर्षों में भारत के सबसे प्रभावशाली युवा आंदोलनों में से एक बताया है। हालांकि, पुलिस कार्रवाई और एफआईआर का मुद्दा अभी भी विवाद का विषय बना हुआ है।
आगे क्या?
सीजेपी ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने और अपने आश्वासनों को लागू करने में विफल रहती है, तो आंदोलन फिर शुरू किया जाएगा। दूसरी ओर, सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं।







