संसद में NEET विवाद पर सुप्रिया सुले का हमला: छात्रों के भविष्य पर सरकार से सवाल
Anjali Patil
0 सेकंड पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Aryan Malhotra
0 सेकंड पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Aditya Verma
0 सेकंड पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Priya Iyer
0 सेकंड पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Anil Sen
0 सेकंड पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Monika Das
0 सेकंड पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Aarav Sharma
0 सेकंड पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
संसद में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान एनसीपी (शरद पवार) सांसद सुप्रिया सुले ने केंद्र सरकार को NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर घेरा। उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा यह मुद्दा बेहद गंभीर है और सरकार को केवल सख्त कानून बनाने के बजाय परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित बनाना चाहिए। उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और छात्रों का विश्वास बहाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
JPC और SIT जांच की उठाई मांग
सुप्रिया सुले ने संसद में मांग की कि NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ हुई कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने संयुक्त संसदीय समिति (JPC) या विशेष जांच दल (SIT) के गठन की मांग करते हुए कहा कि समयबद्ध जांच से ही सच्चाई सामने आएगी। उनका कहना था कि छात्रों और अभिभावकों का भरोसा तभी लौटेगा जब जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी।
UPSC का उदाहरण देकर सरकार से पूछा सवाल
अपने संबोधन में सुप्रिया सुले ने कहा कि यदि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाएं बिना पेपर लीक और विवाद के आयोजित हो सकती हैं, तो NEET जैसी राष्ट्रीय परीक्षा में बार-बार सवाल क्यों उठ रहे हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि परीक्षा सुरक्षा के समान मानक NEET में क्यों लागू नहीं किए जा रहे। उन्होंने कहा कि युवाओं का भविष्य किसी भी कीमत पर जोखिम में नहीं डाला जा सकता।
शिक्षा के व्यावसायीकरण पर जताई चिंता
सुप्रिया सुले ने कोचिंग उद्योग और शिक्षा के बढ़ते व्यवसायीकरण पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बड़े कोचिंग संस्थानों के आईपीओ आने और शिक्षा के महंगे होने से गरीब तथा मध्यम वर्ग के छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उनका कहना था कि शिक्षा सेवा का माध्यम होनी चाहिए, न कि केवल व्यवसाय का साधन। सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जिससे हर छात्र को समान अवसर मिल सके।
छात्रों की पीड़ा और आत्महत्याओं का उठाया मुद्दा
सांसद ने कहा कि छात्रों की मानसिक स्थिति और लगातार सामने आ रही आत्महत्या की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस गंभीर विषय को पर्याप्त संवेदनशीलता से नहीं ले रही है। एक मां के रूप में अपनी भावनाएं साझा करते हुए उन्होंने कहा कि छात्रों का विश्वास जीतना और उनके भविष्य को सुरक्षित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
केवल सख्त कानून नहीं, मजबूत व्यवस्था की जरूरत
अपने भाषण के अंत में सुप्रिया सुले ने कहा कि केवल दंड बढ़ाने वाले कानून बनाने से समस्या समाप्त नहीं होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को ऐसी मजबूत और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली विकसित करनी होगी जिससे पेपर लीक जैसी घटनाएं होने की संभावना ही खत्म हो जाए। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, जवाबदेही और तकनीकी सुरक्षा को मजबूत करने की मांग करते हुए कहा कि देश के करोड़ों युवाओं का भविष्य किसी भी राजनीतिक विवाद से ऊपर है।







