नगालैंड विधानसभा में FNTA विधेयक पेश: पूर्वोत्तर में सियासी हलचल तेज

Payal jadon
1 दिन पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Monika Das
1 दिन पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Kunal Rao
1 दिन पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Pranav Srivastava
1 दिन पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Krishna Yadav
1 दिन पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Saanvi Pandey
1 दिन पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Ritika Ghosh
1 दिन पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Aarav Sharma
1 दिन पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
नगालैंड विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ राज्य की राजनीति में अहम हलचल देखने को मिली है। सत्र के पहले दिन पूर्वी नगालैंड के लिए क्षेत्रीय प्राधिकरण से जुड़ा संशोधित विधेयक सदन में पेश किया गया। सरकार ने पहले पेश किए गए Frontier Nagaland Territorial Authority विधेयक को वापस लेने का प्रस्ताव रखा। इसके बाद संशोधित प्रावधानों के साथ नया विधेयक विधानसभा में रखा गया। यह व्यवस्था पूर्वी नगालैंड के छह जिलों से जुड़े विकास और प्रशासनिक मुद्दों पर केंद्रित है। सरकार ने विधेयक तैयार करने में संबंधित संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों से चर्चा की है। मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने उम्मीद जताई है कि विधेयक को 3 सितंबर को पारित किया जा सकता है।
पुराने विधेयक की जगह संशोधित प्रस्ताव
पूर्वी नगालैंड के लिए विशेष व्यवस्था बनाने का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक चर्चा का विषय रहा है। इसी को लेकर सरकार ने पहले मार्च में Frontier Nagaland Territorial Authority Bill पेश किया था। हालांकि पुराने प्रारूप को लेकर कानूनी और संवैधानिक सवाल उठाए गए थे। इसके बाद सरकार ने पुराने विधेयक को वापस लेकर संशोधित प्रारूप तैयार किया। नए प्रस्ताव को तैयार करने में Eastern Nagaland Peoples Organization यानी ENPO से भी चर्चा की गई। सरकार का प्रयास है कि संवैधानिक दायरे में रहते हुए पूर्वी जिलों की मांगों का समाधान निकाला जाए। अब विधानसभा में चर्चा के बाद इस विधेयक के भविष्य पर फैसला होने की उम्मीद है।
त्रिपुरा में BJP और टिपरा मोथा के बीच बातचीत
त्रिपुरा में आगामी ग्राम समिति चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सत्तारूढ़ BJP और सहयोगी Tipra Motha के बीच चुनावी गठबंधन को लेकर बातचीत जारी है। त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद के तहत 587 ग्राम समितियों में चुनाव होने हैं। राज्य चुनाव आयोग ने इन चुनावों के लिए 28 सितंबर की तारीख तय की है। चुनाव नजदीक आने के साथ दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे पर चर्चा तेज हो गई है। BJP के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष भी गठबंधन वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए त्रिपुरा पहुंचने वाले हैं। माना जा रहा है कि उनकी बैठक के बाद गठबंधन की तस्वीर और ज्यादा साफ हो सकती है।
टिपरा मोथा ने रखा अपना रुख
टिपरा मोथा के संस्थापक प्रद्योत किशोर देबबर्मा ने गठबंधन को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उनका कहना है कि पार्टी आदिवासी समुदाय के संवैधानिक अधिकारों को लेकर समझौता नहीं करेगी। टिपरा मोथा त्रिपक्षीय समझौते को पूरी तरह लागू करने की मांग भी उठा रही है। पार्टी ने जरूरत पड़ने पर सभी 587 ग्राम समिति सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी भी की है। हालांकि BJP और टिपरा मोथा के बीच बातचीत का रास्ता अभी खुला हुआ है। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने उम्मीद जताई है कि दोनों दल आपसी मतभेदों को बातचीत से सुलझा लेंगे। गठबंधन अंतिम रूप लेता है या दोनों दल अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरते हैं, इस पर नजर बनी हुई है।
चुनाव से पहले सीट बंटवारे पर मंथन
त्रिपुरा में ग्राम समिति चुनाव दोनों दलों के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इसी वजह से BJP और टिपरा मोथा के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर लगातार बातचीत हो रही है। दिल्ली में दोनों दलों के नेताओं के बीच पहले भी कई दौर की चर्चा हो चुकी है। इन बैठकों में अब तक सीटों को लेकर पूरी सहमति नहीं बन पाई थी। अब त्रिपुरा में होने वाली बैठकों के जरिए अंतिम सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है। अगर दोनों दलों के बीच समझौता होता है तो यह जनजातीय क्षेत्रों की चुनावी राजनीति को प्रभावित कर सकता है। वहीं समझौता नहीं होने की स्थिति में दोनों दल अलग-अलग रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतर सकते हैं।
पूर्वोत्तर की राजनीति पर रहेगी नजर
नगालैंड और त्रिपुरा में एक साथ चल रही राजनीतिक गतिविधियों ने पूर्वोत्तर की सियासत को चर्चा में ला दिया है। नगालैंड में FNTA विधेयक पूर्वी जिलों की राजनीतिक और प्रशासनिक मांगों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। वहीं त्रिपुरा में BJP और टिपरा मोथा के बीच गठबंधन चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। दोनों राज्यों में आने वाले दिनों में विधानसभा और पार्टी स्तर पर महत्वपूर्ण फैसले हो सकते हैं। नगालैंड में विधेयक के पारित होने और त्रिपुरा में गठबंधन पर सबकी नजर रहेगी। राजनीतिक दल अपने-अपने समर्थन आधार को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इन घटनाक्रमों का असर पूर्वोत्तर की क्षेत्रीय राजनीति और आगामी चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।








