सोशल मीडिया पर शुरू हुआ E20 विरोध अभियान: गडकरी ने मानहानि केस दायर किया

Pranav Srivastava
0 सेकंड पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Sneha Menon
0 सेकंड पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Payal jadon
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Diya Gupta
0 सेकंड पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Anika Rajput
27 मिनट पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Payal jadon
42 मिनट पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Krishna Yadav
1 घंटे पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Sneha Menon
1 घंटे पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Simran Arora
1 घंटे पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Nisha Shah
1 घंटे पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Rohan Desai
2 घंटे पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Ritika Ghosh
3 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Anika Rajput
4 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Payal jadon
4 घंटे पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Diya Gupta
4 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Vivaan Gupta
5 घंटे पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Aditya Verma
5 घंटे पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Rohan Desai
6 घंटे पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Aditya Verma
6 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एथेनॉल मिश्रण (E20) नीति को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे कथित भ्रामक दावों के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया है। अदालत ने 27 जुलाई 2026 को उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स X, Meta, Google/YouTube तथा अज्ञात ('John Doe') यूजर्स के खिलाफ सिविल मानहानि का मुकदमा दायर करने की अनुमति दे दी। गडकरी ने स्पष्ट किया कि E20 नीति पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की नीति है और इससे उनका या उनके परिवार का कोई निजी वित्तीय लाभ नहीं जुड़ा है।
चार सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर दर्ज हुई FIR
नागपुर साइबर पुलिस ने 24 जुलाई 2026 को चार सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस का आरोप है कि इन लोगों ने E20 ईंधन के संबंध में भ्रामक जानकारी, फर्जी आंकड़े और वाहनों के खराब होने जैसे अप्रमाणित दावे सोशल मीडिया पर प्रसारित किए। पुलिस मामले की जांच कर रही है और डिजिटल साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
E20 नीति पर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका
एडवोकेट नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में E20 नीति की पारदर्शिता को लेकर जनहित याचिका (PIL) दायर की है। याचिका में नीति को रद्द करने की मांग नहीं की गई है, बल्कि उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इसमें पेट्रोल पंपों के नोजल और बिल पर एथेनॉल मिश्रण का प्रतिशत लिखने तथा वाहन मॉडल के अनुसार ईंधन अनुकूलता का आधिकारिक डेटाबेस जारी करने की मांग शामिल है।
उपभोक्ताओं के अधिकारों का उठाया गया मुद्दा
याचिका में कहा गया है कि यदि ग्राहकों को बिना स्पष्ट जानकारी के एथेनॉल मिश्रित ईंधन उपलब्ध कराया जाता है, तो यह उपभोक्ताओं के सूचना पाने के अधिकार को प्रभावित कर सकता है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि पुराने वाहनों के मालिकों को यह जानने का अधिकार होना चाहिए कि उनका वाहन E20 ईंधन के अनुकूल है या नहीं। इसी उद्देश्य से पारदर्शिता बढ़ाने की मांग की गई है।
सोशल मीडिया पर शुरू हुआ E20 विरोध अभियान
E20 नीति को लेकर सोशल मीडिया पर 'E20 जनता पार्टी' नाम से डिजिटल अभियान भी चर्चा में है। कुछ टैक्सी और ऑटो यूनियनों ने 100 प्रतिशत शुद्ध पेट्रोल उपलब्ध कराने की मांग उठाई है और संसद मार्च की घोषणा की है। हालांकि, इन दावों और आंदोलनों को लेकर विभिन्न पक्षों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं तथा प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
अदालतों में कानूनी प्रक्रिया जारी
एक ओर बॉम्बे हाई कोर्ट में मानहानि से जुड़ी कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट में E20 नीति की पारदर्शिता से संबंधित जनहित याचिका विचाराधीन है। इन दोनों मामलों के परिणाम भविष्य में E20 नीति, उपभोक्ता अधिकारों और सोशल मीडिया पर साझा की जाने वाली जानकारी के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।







