पुरी में सजा महाप्रभु का सुना बेष: सुना बेष के दिव्य दर्शन को उमड़ी भीड़
Aryan Malhotra
12 घंटे पहलेKarma ka chakkar aisa hi hota hai, koi nahi bacha sakta.
Monika Das
12 घंटे पहलेSpirituality hi asli shakti hai is duniya mein.
Anjali Patil
12 घंटे पहलेRishiyon ne sadi pehle hi inka jikr kiya tha.
Ishaan Tiwari
12 घंटे पहलेKundali dekhkar bohot kuch pehle pata chal jata hai.
Anil Sen
12 घंटे पहलेKarma ka chakkar aisa hi hota hai, koi nahi bacha sakta.
Nisha Shah
12 घंटे पहलेKundali dekhkar bohot kuch pehle pata chal jata hai.
Trapti Tanwar
12 घंटे पहलेBhagwan par bharosa rakhna chahiye, woh sab sahi karenge.
Dhruv Bhatt
12 घंटे पहलेBhagwan par bharosa rakhna chahiye, woh sab sahi karenge.
Ayaan Khan
12 घंटे पहलेAaj ka din bahut mahatvapurna raha jyotish ke hisaab se.
Saanvi Pandey
12 घंटे पहलेIshwar ki leela ko koi nahi samjha sakta.
Reyansh Joshi
12 घंटे पहलेRishiyon ne sadi pehle hi inka jikr kiya tha.
Arjun Singh
12 घंटे पहलेKundali dekhkar bohot kuch pehle pata chal jata hai.
Monika Das
13 घंटे पहलेBhagwan par bharosa rakhna chahiye, woh sab sahi karenge.
Neha Tripathi
13 घंटे पहलेDharm aur aastha hi insaan ko sahi raah dikhati hai.
Krishna Yadav
13 घंटे पहलेGraha nakshatra sab kuch pehle se bata dete hain.
Neel Saxena
13 घंटे पहलेAaj ka din bahut mahatvapurna raha jyotish ke hisaab se.
Vaishali shinde
13 घंटे पहलेIshwar ki leela ko koi nahi samjha sakta.
Rohan Desai
18 घंटे पहलेGraha nakshatra sab kuch pehle se bata dete hain.
Ishaan Tiwari
18 घंटे पहलेAaj ka din bahut mahatvapurna raha jyotish ke hisaab se.
Saanvi Pandey
18 घंटे पहलेBhagwan par bharosa rakhna chahiye, woh sab sahi karenge.
Pranav Srivastava
18 घंटे पहलेGraha nakshatra sab kuch pehle se bata dete hain.
Myra Dubey
18 घंटे पहलेRishiyon ne sadi pehle hi inka jikr kiya tha.
Vihaan Patel
18 घंटे पहलेKundali dekhkar bohot kuch pehle pata chal jata hai.
Dhruv Bhatt
19 घंटे पहलेRishiyon ne sadi pehle hi inka jikr kiya tha.
Priya Iyer
19 घंटे पहलेGraha nakshatra sab kuch pehle se bata dete hain.
Ananya Sharma
20 घंटे पहलेIshwar ki leela ko koi nahi samjha sakta.
Ishaan Tiwari
20 घंटे पहलेSpirituality hi asli shakti hai is duniya mein.
Riya Jain
21 घंटे पहलेGraha nakshatra sab kuch pehle se bata dete hain.
Payal jadon
21 घंटे पहलेSpirituality hi asli shakti hai is duniya mein.
Tanya Bajaj
21 घंटे पहलेRishiyon ne sadi pehle hi inka jikr kiya tha.
Aarohi Chaudhary
21 घंटे पहलेBhagwan par bharosa rakhna chahiye, woh sab sahi karenge.
Navya Nair
22 घंटे पहलेBhagwan par bharosa rakhna chahiye, woh sab sahi karenge.
Aditya Verma
22 घंटे पहलेYeh toh planets ki chaal ka hi asar hai!
Ayaan Khan
22 घंटे पहलेKundali dekhkar bohot kuch pehle pata chal jata hai.
ओडिशा के श्रीजगन्नाथ धाम पुरी में विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा महोत्सव के सबसे भव्य और बहुप्रतीक्षित अनुष्ठानों में से एक 'सुना बेष' (स्वर्ण वेश) का आयोजन श्रद्धा और वैदिक परंपराओं के साथ संपन्न हुआ। बाहुड़ा एकादशी के पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को उनके-अपने रथों पर दिव्य स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत किया गया। इस दुर्लभ दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचे और महाप्रभु के स्वर्णिम स्वरूप के दर्शन कर स्वयं को धन्य माना।
208 किलोग्राम स्वर्ण आभूषणों से हुआ दिव्य श्रृंगार
मंदिर परंपरा के अनुसार इस विशेष अनुष्ठान में तीनों देवों को लगभग 208 किलोग्राम सोने से बने बहुमूल्य आभूषण पहनाए जाते हैं। भगवान जगन्नाथ को स्वर्ण मुकुट, स्वर्ण चक्र, स्वर्ण हाथ (श्री हस्त), स्वर्ण पैर (श्री पायर) और चांदी का शंख धारण कराया गया। भगवान बलभद्र को स्वर्ण हल, गदा और स्वर्ण कुंडलों से सजाया गया, जबकि देवी सुभद्रा को विशेष स्वर्ण मुकुट, चंद्रिका और विभिन्न स्वर्ण हारों से अलंकृत किया गया। यह दिव्य श्रृंगार श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत दुर्लभ और आस्था का केंद्र माना जाता है।
भारी बारिश के बीच उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब
मौसम विभाग की भारी बारिश की चेतावनी के बावजूद पुरी के ग्रैंड रोड (बड़ा दांड) पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। लाखों भक्तों ने रथों पर विराजमान महाप्रभु के स्वर्णिम स्वरूप के दर्शन किए। मंदिर प्रशासन और ओडिशा पुलिस ने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए। पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ ट्रैफिक व्यवस्था को भी विशेष रूप से नियंत्रित किया गया ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
रत्नभंडार से निकाले गए दुर्लभ स्वर्ण आभूषण
सुना बेष के लिए भगवान के सभी स्वर्ण आभूषण श्रीमंदिर के ऐतिहासिक रत्नभंडार से कड़ी सुरक्षा के बीच बाहर लाए गए। मंदिर के सेवकों ने पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार तीनों देवों का श्रृंगार किया। स्वर्ण मुकुट, कुंडल, हार, चक्र, हल, गदा और अन्य आभूषणों से सुसज्जित भगवान का स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव का केंद्र बन गया।
500 वर्षों से अधिक पुरानी परंपरा का निर्वहन
ऐतिहासिक मान्यता के अनुसार सुना बेष परंपरा की शुरुआत गजपति राजा कपिलेंद्र देव ने 15वीं शताब्दी में की थी। दक्षिण भारत में विजय प्राप्त करने के बाद उन्होंने महाप्रभु को विशाल मात्रा में स्वर्ण और रत्न अर्पित किए, जिसके बाद से यह परंपरा हर वर्ष रथयात्रा के दौरान निभाई जाती है। आज भी यह अनुष्ठान जगन्नाथ संस्कृति, ओडिशा की धार्मिक विरासत और सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
अब होगा अधर पाना और नीलाद्रि बीजे अनुष्ठान
सुना बेष के दिव्य दर्शन के बाद रथयात्रा महोत्सव का अगला चरण अधर पाना अनुष्ठान होगा, जिसमें तीनों देवों को विशेष पेय का भोग अर्पित किया जाएगा। इसके बाद नीलाद्रि बीजे की परंपरा के तहत भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा पुनः श्रीमंदिर के गर्भगृह में विराजमान होंगे। इसके साथ ही विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा महोत्सव का समापन पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के बीच संपन्न होगा।







