भोपाल में स्वास्थ्य सेवा पर संकट: आयुष्मान और बीपीएल मरीजों पर बढ़ा आर्थिक बोझ

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मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के जयप्रकाश जिला अस्पताल (जेपी अस्पताल) में नि:शुल्क एमआरआई जांच सेवा अचानक बंद कर दी गई है। पीपीपी मॉडल पर संचालित एमआरआई सेंटर ने ओपीडी के मरीजों, विशेषकर आयुष्मान भारत योजना और बीपीएल कार्डधारकों की मुफ्त जांच से इनकार कर दिया है।
अब जेब से देने होंगे 1500 से 6000 रुपए
पहले जहां आयुष्मान और बीपीएल कार्डधारकों को मुफ्त एमआरआई सुविधा मिलती थी, अब उन्हें कम से कम 1500 रुपए और जांच की प्रकृति के अनुसार 3000 से 6000 रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।
हाल ही में सात-आठ मरीजों को एमआरआई जांच से साफ इनकार कर दिया गया, जिससे उनका इलाज प्रभावित हुआ और अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
50 लाख से अधिक भुगतान लंबित
एमआरआई सेंटर संचालित करने वाली एजेंसी का कहना है कि सरकार की ओर से करीब 50 लाख रुपए से अधिक का भुगतान पिछले एक साल से लंबित है।
रतन सिंह, ऑपरेशन हेड, कृष्णा डायग्नॉस्टिक सेंटर, ने बताया कि मशीनों की ईएमआई, रखरखाव और स्टाफ वेतन का खर्च निकालना मुश्किल हो गया है। कई बार शासन स्तर पर पत्राचार के बावजूद समाधान नहीं निकला, इसलिए मजबूरी में मुफ्त सेवा बंद करनी पड़ी।
इंदौर और ग्वालियर में भी असर
भुगतान अटकने का असर केवल भोपाल तक सीमित नहीं है। इंदौर और ग्वालियर के सरकारी अस्पतालों में भी आयुष्मान और बीपीएल कार्डधारकों की एमआरआई सेवाएं प्रभावित हुई हैं।
तीनों जिलों में निजी एजेंसियों का दो करोड़ रुपए से अधिक भुगतान बकाया बताया जा रहा है। यदि जल्द बजट जारी नहीं हुआ तो सेवाएं पूरी तरह ठप होने की आशंका है।
प्रशासन का आश्वासन
सीएमएचओ कार्यालय ने कहा है कि बकाया भुगतान का मामला संज्ञान में है। भुगतान राज्य स्तर से जारी होता है, इसलिए प्रक्रिया में समय लग रहा है। संबंधित विभाग और आयुष्मान सेल से समन्वय कर जल्द बजट जारी कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि मरीजों को राहत मिल सके।
फिलहाल मरीजों और उनके परिजनों को निजी खर्च उठाना पड़ रहा है, जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।







