Jaishankar Meets Marco Rubio: जयशंकर-रुबियो की UNGA में मुलाकात

Saanvi Pandey
0 सेकंड पहलेSarkar ko public ko jawab dena chahiye.
Kunal Rao
3 घंटे पहलेPehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!
Simran Arora
4 घंटे पहलेNeta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!
Taushif Shekh
5 घंटे पहलेPehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!
Tanya Bajaj
6 घंटे पहलेBahut achhi reporting ki hai, keep it up!
Ishaan Tiwari
7 घंटे पहलेNishpaksh patrakarita ke liye shukriya, aise media chahiye.
Krishna Yadav
8 घंटे पहलेYeh khabar bahut important hai, sabko pata honi chahiye!
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के उच्चस्तरीय सप्ताह के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से न्यूयॉर्क में मुलाकात की। दोनों नेताओं की यह बैठक 23 सितंबर को UNGA के इतर हुई। जयशंकर ने बैठक के बाद बताया कि उन्होंने अमेरिका के नए Sanctioning Russia and Iran Act यानी SRIA को लेकर भारत के हितों और चिंताओं को दोहराया। दोनों नेताओं ने इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र और यूक्रेन की स्थिति पर भी चर्चा की। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक बातचीत में रूस और ईरान के साथ आर्थिक संबंध रखने वाले देशों पर संभावित प्रतिबंधों और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर भी विचार हुआ।
100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार
अमेरिका के नए SRIA कानून को लेकर भारत की मुख्य चिंता रूस से ऊर्जा खरीद से जुड़ी है। कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। हालांकि यह समझना जरूरी है कि भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ स्वतः लागू नहीं हुआ है। यह कानून अमेरिकी प्रशासन को ऐसी कार्रवाई करने का अधिकार देता है और इसके इस्तेमाल का फैसला अलग से किया जा सकता है। भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है, इसलिए संभावित टैरिफ का असर भारत के व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है।
जयशंकर ने भारत के हित और चिंताएं रखीं
बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्होंने रुबियो के साथ SRIA को लेकर भारत के हितों और चिंताओं को दोहराया। उन्होंने खास तौर पर भारत की आर्थिक और ऊर्जा संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अमेरिकी कानून के संभावित प्रभावों पर चर्चा की। भारत पहले भी कह चुका है कि उसकी ऊर्जा खरीद से जुड़े फैसलों में राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा महत्वपूर्ण हैं। हालांकि बैठक में अमेरिका की ओर से भारत पर तत्काल कोई 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा नहीं हुई है। फिलहाल दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर राजनयिक बातचीत जारी है
अमेरिका ने रणनीतिक साझेदारी पर दिया जोर
मार्को रुबियो ने बैठक के बाद भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को महत्वपूर्ण बताया। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार दोनों नेताओं ने सुरक्षित और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने में दोनों देशों की साझेदारी की भूमिका पर चर्चा की। रुबियो ने क्षेत्रीय प्राथमिकताओं और आने वाले बहुपक्षीय प्रयासों में दोनों देशों के बीच समन्वय जारी रखने की बात कही। यानी बैठक में टैरिफ और रूस से जुड़े प्रतिबंधों के मुद्दे के साथ व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर भी चर्चा हुई।
खाड़ी और यूक्रेन की स्थिति पर भी बातचीत
जयशंकर और रुबियो की बैठक केवल रूस से जुड़े प्रतिबंध कानून तक सीमित नहीं रही। जयशंकर के मुताबिक दोनों नेताओं ने खाड़ी क्षेत्र और यूक्रेन की स्थिति पर भी विचार-विमर्श किया। पश्चिम एशिया में जारी घटनाक्रम और यूक्रेन युद्ध के बीच भारत और अमेरिका के लिए क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति भी महत्वपूर्ण विषय हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने भी बैठक के दौरान मध्य पूर्व और अन्य क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श होने की पुष्टि की है।
अब आगे की बातचीत पर रहेगी नजर
जयशंकर और रुबियो की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारत-अमेरिका संबंधों में व्यापार, टैरिफ और रूस से ऊर्जा खरीद जैसे मुद्दे चर्चा में हैं। नए अमेरिकी कानून में 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान होने के कारण भारत इसके संभावित आर्थिक प्रभावों पर नजर रख रहा है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिकी प्रशासन भारत के खिलाफ इस अधिकार का इस्तेमाल करेगा या नहीं। ऐसे में आगे दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत और अमेरिकी प्रशासन के अगले कदम महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि भारत ने UNGA के दौरान सीधे अमेरिकी विदेश मंत्री के सामने इस कानून को लेकर अपनी चिंताएं रख दी हैं।








