MP Free Registry Scheme: मध्य प्रदेश में 48 लाख से अधिक ग्रामीण संपत्तियों की फ्री रजिस्ट्री, सरकार देगी शुल्क में छूट

Kabir Shukla
2 घंटे पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Aditya Verma
3 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Ayaan Khan
5 घंटे पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Nisha Shah
5 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Myra Dubey
7 घंटे पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Pooja Reddy
9 घंटे पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Ananya Sharma
9 घंटे पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Arjun Singh
9 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
48 लाख से अधिक संपत्तियों की निश्शुल्क रजिस्ट्री
मध्य प्रदेश में ग्रामीण आबादी की भूमि पर बने मकानों, दुकानों और अन्य निजी संपत्तियों की निश्शुल्क रजिस्ट्री कराने के लिए स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026 के तहत अभियान चलाया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब 48 लाख से अधिक निजी संपत्तियों का पंजीयन किया जाना है और राज्य सरकार पंजीयन से जुड़े शुल्क का भार वहन करेगी।
3,800 करोड़ रुपये की शुल्क छूट
योजना के तहत स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क सहित संबंधित शुल्क में करीब 3,800 करोड़ रुपये की छूट का प्रावधान है। इसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को उनकी संपत्ति के अधिकार संबंधी दस्तावेज बिना पंजीयन शुल्क के उपलब्ध कराना है।
पटवारियों की जिम्मेदारी को लेकर चिंता
योजना के क्रियान्वयन में पटवारियों की भूमिका को लेकर भविष्य में विवाद और कानूनी जिम्मेदारी की आशंका सामने आई थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को कर्मचारियों की चिंता दूर करने और उन्हें यह समझाने के निर्देश दिए कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से परेशान होने की जरूरत नहीं है।
विवाद होने पर सरकारी वकील करेंगे पैरवी
राजस्व विभाग की व्यवस्था के अनुसार पटवारी पदेन निष्पादन अधिकारी की भूमिका में रहेंगे, जबकि पंजीयन प्रक्रिया में तहसीलदार, नायब तहसीलदार और अन्य अधिकृत अधिकारी शामिल होंगे। भविष्य में रजिस्ट्री को लेकर विवाद सामने आने पर शासन की ओर से सरकारी वकील द्वारा कानूनी पैरवी किए जाने की बात कही गई है।
गलत जानकारी देने पर संबंधित पक्ष जिम्मेदार
रजिस्ट्री दस्तावेज में यह व्यवस्था रखी जाएगी कि यदि किसी व्यक्ति ने गलत या छिपी हुई जानकारी के आधार पर पंजीयन कराया और बाद में विवाद उत्पन्न हुआ, तो संबंधित पक्ष की जिम्मेदारी तय की जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य पंजीयन प्रक्रिया में शामिल कर्मचारियों की व्यक्तिगत कानूनी जिम्मेदारी को लेकर बनी आशंका को कम करना है।
17 सितंबर को इंदौर से शुरू हुआ अभियान
स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026 का प्रदेशव्यापी शुभारंभ 17 सितंबर 2026 को इंदौर से किया गया। योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को उनकी संपत्तियों के अधिकार संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराने और पंजीयन प्रक्रिया को निश्शुल्क बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
तीन चरणों में होंगे विशेष शिविर
योजना की पंजीयन प्रक्रिया के लिए ग्राम और पंचायत स्तर पर विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। पहला चरण 17 से 19 सितंबर, दूसरा चरण 24 से 26 सितंबर और तीसरा चरण 1 से 3 अक्टूबर तक निर्धारित किया गया है। आवेदन के लिए आबादी भूखंड की लैंड लिंकिंग और समग्र आईडी से ई-केवाईसी जरूरी बताई गई है।
संपत्ति का दस्तावेज मिलने से ऋण में मदद
सरकार के अनुसार पंजीकृत अधिकार अभिलेख मिलने से ग्रामीण परिवारों को अपनी संपत्ति का कानूनी दस्तावेज प्राप्त होगा। इस दस्तावेज के आधार पर घर, व्यवसाय या अन्य आर्थिक जरूरतों के लिए बैंक ऋण जैसी सुविधाएं हासिल करने में मदद मिल सकती है।
कर्मचारियों से जुड़े मामलों की भी समीक्षा
मुख्यमंत्री की बैठक में कर्मचारियों से जुड़े अन्य मामलों पर भी चर्चा हुई। अनुकंपा नियुक्ति, पदोन्नति, सीधी भर्ती, विभागीय जांच और लंबित पेंशन प्रकरणों की अलग से समीक्षा की जाएगी। सामान्य प्रशासन विभाग को संबंधित विभागों से इन मामलों की बिंदुवार जानकारी जुटाकर नीतिगत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।








