Amitabh’s Political Journey: राजनीति में अमिताभ बच्चन की एंट्री, 1984 में इलाहाबाद से दर्ज की बड़ी जीत

Ananya Sharma
4 घंटे पहलेBahut achhi reporting ki hai, keep it up!
Aryan Malhotra
4 घंटे पहलेPehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!
Trapti Tanwar
4 घंटे पहलेPehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!
Navya Nair
6 घंटे पहलेNeta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!
Arjun Singh
7 घंटे पहलेNeta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!
Ravi sinha
8 घंटे पहलेYeh news bahut zaroori hai public ke liye.
Kavya Mishra
9 घंटे पहलेBahut achhi reporting ki hai, keep it up!
Payal jadon
11 घंटे पहलेChunav ke baad sab bhool jaate hain, yahi haqeeqat hai.
1984 में राजनीति में उतरे अमिताभ
फिल्मी करियर के शिखर पर रहते हुए अमिताभ बच्चन ने 1984 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा। राजीव गांधी के साथ उनकी करीबी दोस्ती के बीच उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर इलाहाबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। उनके सामने अनुभवी नेता हेमवती नंदन बहुगुणा थे। चुनाव में अमिताभ ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों में उन्हें 2,97,461 वोट मिले थे, जबकि बहुगुणा को 1,09,666 मत मिले।
करीब 1.88 लाख वोट से जीत
1984 के चुनाव में अमिताभ बच्चन को कुल वैध मतों का 68.21 प्रतिशत वोट मिला था। बहुगुणा के मुकाबले उनकी जीत का अंतर 1,87,795 वोट रहा। यह इलाहाबाद लोकसभा सीट के इतिहास में एक उल्लेखनीय चुनावी आंकड़ा रहा है।
गरीबी देखकर जताई हैरानी
वरिष्ठ पत्रकार तवलीन सिंह ने हालिया Mojo Story इंटरव्यू में उस दौर की अपनी मुलाकात का जिक्र किया। Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव जीतने के बाद अमिताभ ने देश में गरीबी की स्थिति को लेकर हैरानी जताई थी। सिंह के मुताबिक, जमीनी हालात देखने के बाद अभिनेता काफी प्रभावित हुए थे। यह विवरण तवलीन सिंह के संस्मरण और हालिया बयान पर आधारित है।
1987 में राजनीति से लिया इस्तीफा
लोकसभा सांसद बनने के करीब तीन साल बाद अमिताभ बच्चन ने 1987 में अपनी सीट से इस्तीफा दे दिया और सक्रिय राजनीति से अलग हो गए। बाद के वर्षों में उन्होंने राजनीति में अपने प्रवेश को भावनात्मक फैसला बताया था और कहा था कि उन्हें लगा कि राजनीति भावनाओं के आधार पर नहीं चलती।
बोफोर्स विवाद के दौरान परिवार का नाम आया
1987 में बोफोर्स सौदे से जुड़े आरोपों के बीच अमिताभ बच्चन और उनके परिवार का नाम भी सार्वजनिक चर्चा में आया। तवलीन सिंह ने हालिया इंटरव्यू में दावा किया कि बोफोर्स विवाद और गांधी परिवार के साथ पैदा हुए तनाव ने अमिताभ के राजनीति से अलग होने में भूमिका निभाई। यह सिंह की व्याख्या है, इसलिए इसे अमिताभ के इस्तीफे का स्थापित एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता।
बाद में अमिताभ के खिलाफ आरोपों पर सवाल उठे
2012 में बोफोर्स की जांच से जुड़े स्वीडिश अधिकारी स्टेन लिंडस्ट्रॉम ने कहा था कि अमिताभ बच्चन के खिलाफ मामले में उनकी संलिप्तता का सबूत नहीं था और बच्चन परिवार से जुड़ा कोण भारतीय जांचकर्ताओं की ओर से जोड़े जाने की बात कही थी। यह बयान बोफोर्स मामले में अमिताभ के खिलाफ लगाए गए आरोपों के संदर्भ में महत्वपूर्ण रहा।
तीन साल में खत्म हुआ राजनीतिक अध्याय
अमिताभ बच्चन का राजनीतिक सफर 1984 में बड़ी चुनावी जीत के साथ शुरू हुआ और 1987 में इस्तीफे के साथ समाप्त हो गया। उनका संक्षिप्त राजनीतिक कार्यकाल भारतीय सिनेमा और राजनीति के उस दौर के चर्चित प्रसंगों में शामिल रहा है।








