महिला आरक्षण पर बीजेपी-कांग्रेस में घमासान: महिला कोटा तुरंत लागू करने पर सियासत तेज

Dev Kapoor
0 सेकंड पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Trapti Tanwar
0 सेकंड पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Krishna Yadav
0 सेकंड पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Pooja Reddy
0 सेकंड पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
महिला आरक्षण कानून के क्रियान्वयन को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है।बीजेपी ने राहुल गांधी से सवाल किया है कि अगर वह महिला आरक्षण के समर्थन में हैं तो इसके तत्काल क्रियान्वयन का समर्थन क्यों नहीं कर रहे।बीजेपी नेताओं का कहना है कि कानून को लागू करने के लिए निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया का पालन जरूरी है।सरकार के मुताबिक महिला आरक्षण को जनगणना औरउसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ा गया है।वहीं राहुल गांधी और कांग्रेस का कहना है कि कानून पहले ही संसद से पारित हो चुका है।कांग्रेस तत्काल आरक्षण लागू करने की मांग करते हुए सरकार की नीयत पर सवाल उठा रही है।
जनगणना और परिसीमन बना विवाद का केंद्र
महिला आरक्षण को लेकर सबसे बड़ा विवाद जनगणना और परिसीमन की शर्त को लेकर है।सरकार का तर्क है कि सीटों के नए परिसीमन के बाद ही आरक्षित सीटों का निर्धारण किया जा सकेगा।बीजेपी का कहना है कि संवैधानिक प्रक्रिया पूरी किए बिना आरक्षण लागू करना व्यावहारिक और कानूनी रूप से मुश्किल होगा।दूसरी तरफ कांग्रेस का आरोप है कि परिसीमन की शर्त लगाकर महिला आरक्षण को लंबे समय तक टाला जा रहा है।राहुल गांधी सरकार से कानून को जल्द से जल्द लागू करने की मांग कर रहे हैं।इस मुद्दे ने संसद और देश की राजनीति में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
राहुल गांधी बोले, आरक्षण में देरी क्यों?
राहुल गांधी और कांग्रेस का तर्क है कि महिला आरक्षण कानून 2023 में ही संसद से पारित हो चुका है।कांग्रेस का कहना है कि कानून को लागू करने के लिए अनिश्चित समय तक इंतजार नहीं कराया जाना चाहिए।राहुल गांधी सरकार से महिला आरक्षण को जल्द लागू करने की मांग कर रहे हैं।विपक्ष का आरोप है कि जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया को आधार बनाकर कानून के क्रियान्वयन में देरी की जा रही है।कांग्रेस का कहना है कि महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में उनका प्रतिनिधित्व जल्द मिलना चाहिए।इसी मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज हो रही है।
बीजेपी ने कांग्रेस के पुराने रुख का भी किया जिक्र
बीजेपी ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस के पुराने रुख को भी राजनीतिक बहस में शामिल किया है।बीजेपी नेताओं का कहना है कि महिला आरक्षण से जुड़ा कानून लंबे समय तक राजनीतिक सहमति के अभाव में आगे नहीं बढ़ सका।केंद्र सरकार ने 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को संसद से पारित कराया था।अब बीजेपी का कहना है कि कानून के क्रियान्वयन के लिए जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है।पार्टी ने विपक्ष से प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील की है।वहीं कांग्रेस इस तर्क को स्वीकार करने के बजाय तत्काल लागू करने की मांग पर कायम है।
पार्टी राजनीति से आगे महिलाओं के प्रतिनिधित्व का सवाल
महिला आरक्षण पर जारी राजनीतिक विवाद का सीधा संबंध संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी से है।कानून का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करना है।हालांकि इसके लागू होने की प्रक्रिया को लेकर जनगणना और परिसीमन महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं।बीजेपी इसे संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है।कांग्रेस का कहना है कि इन प्रक्रियाओं की आड़ में आरक्षण को टालना उचित नहीं है।अब राजनीतिक विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि महिला आरक्षण जमीन पर कब लागू होगा।
महिला कोटे पर सियासत और तेज होने के आसार
महिला आरक्षण को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।बीजेपी राहुल गांधी से तत्काल क्रियान्वयन की मांग के साथ उनकी स्थिति स्पष्ट करने को कह रही है।कांग्रेस का कहना है कि वह महिला आरक्षण के पक्ष में है और कानून को जल्द लागू किया जाना चाहिए।सरकार जनगणना और परिसीमन को लागू करने की आवश्यक प्रक्रिया बता रही है।विपक्ष इन प्रक्रियाओं को कानून के क्रियान्वयन में देरी का कारण मान रहा है।आने वाले दिनों में संसद में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है।







