E -Waste School News education Environment: क्विज से बच्चों को मिलेगी ई-वेस्ट की जानकारी

Neel Saxena
0 सेकंड पहलेAam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.
Taushif Shekh
0 सेकंड पहलेYeh mamla sabke saath ho sakta hai, jaagrukata zaroori.
Taushif Shekh
0 सेकंड पहलेAam janta ka kya hoga? Koi nahi socha inke baare mein.
Taushif Shekh
0 सेकंड पहलेAam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.
Arjun Singh
0 सेकंड पहलेYeh sab dekh ke bahut dukh hota hai.
Yash Kulkarni
0 सेकंड पहलेPeedit logo ke saath poori tarah sahmat hoon.
पुराने मोबाइल, खराब चार्जर, बेकार कंप्यूटर, पुरानी बैटरियां और बंद पड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अक्सर घरों में कबाड़ समझकर रख दिए जाते हैं। कई बार इन्हें सामान्य कचरे के साथ फेंक दिया जाता है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक कचरे का गलत तरीके से निस्तारण पर्यावरण के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसी समस्या के प्रति विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से विशेष अभियान-6 के तहत 28 अक्टूबर को प्रदेशभर के राजकीय और निजी विद्यालयों में ई-वेस्ट प्रबंधन से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को इलेक्ट्रॉनिक कचरे के दुष्प्रभावों, उसके सुरक्षित प्रबंधन और उचित निस्तारण के तरीकों की जानकारी देना है। इसके साथ ही बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदार बनाने और उन्हें अपने परिवार तथा आसपास के लोगों को जागरूक करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
प्रार्थना सभा में दी जाएगी ई-वेस्ट की जानकारी
28 अक्टूबर को विद्यालयों में सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान विद्यार्थियों को ई-वेस्ट यानी इलेक्ट्रॉनिक कचरे के बारे में जानकारी दी जाएगी। उन्हें बताया जाएगा कि खराब मोबाइल, चार्जर, कंप्यूटर, बैटरियां और अन्य अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सही तरीके से निस्तारित करना क्यों जरूरी है।
विद्यार्थियों को इलेक्ट्रॉनिक कचरे के गलत निस्तारण से पर्यावरण को होने वाले नुकसान और उसे सुरक्षित तरीके से अलग रखने के महत्व के बारे में भी समझाया जाएगा। इसके अलावा प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों की जानकारी को परखा जाएगा और उन्हें ई-वेस्ट प्रबंधन के बारे में अधिक सीखने का अवसर मिलेगा।
सामान्य कचरे में नहीं फेंकना चाहिए इलेक्ट्रॉनिक सामान
घरों में खराब मोबाइल, पुराने कंप्यूटर, चार्जर और बैटरियां लंबे समय तक रखी रहती हैं। कई लोग जानकारी के अभाव में इन्हें सामान्य कचरे के साथ फेंक देते हैं। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में मौजूद कुछ पदार्थ पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। इसलिए ऐसे उपकरणों को सामान्य कचरे से अलग रखना और उनका उचित निस्तारण करना जरूरी है।
अभियान के दौरान विद्यार्थियों को समझाया जाएगा कि अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक सामान को इधर-उधर फेंकने के बजाय अधिकृत संग्रह केंद्रों या ई-वेस्ट प्रबंधन से जुड़ी अधिकृत संस्थाओं तक पहुंचाना चाहिए। इससे इलेक्ट्रॉनिक कचरे का सुरक्षित निस्तारण करने और उसमें मौजूद उपयोगी सामग्री को दोबारा इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है।
अधिकृत रिसाइक्लर्स और रिफर्बिशर्स को सौंपा जाएगा ई-वेस्ट
विद्यालयों में एकत्रित किए गए इलेक्ट्रॉनिक कचरे को अधिकृत रिसाइक्लर्स या रिफर्बिशर्स को सौंपने की व्यवस्था की जाएगी। रिसाइक्लर्स इलेक्ट्रॉनिक कचरे से उपयोगी सामग्री को निर्धारित प्रक्रिया के जरिए दोबारा इस्तेमाल करने योग्य बनाने में मदद करते हैं, जबकि रिफर्बिशर्स मरम्मत और नवीनीकरण के माध्यम से कुछ उपकरणों को फिर से उपयोग के लायक बना सकते हैं।
इस व्यवस्था का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक कचरे को सुरक्षित तरीके से निस्तारित करना और उपयोगी संसाधनों की बर्बादी को कम करना है। इससे विद्यार्थियों को भी यह समझने में मदद मिलेगी कि खराब हो चुके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का सही प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण के लिए क्यों जरूरी है।
गतिविधियों की रिपोर्ट और जियो-टैग फोटो उसी दिन करनी होगी अपलोड
शिक्षा विभाग ने अभियान के संबंध में विद्यालयों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों के अनुसार, सभी विद्यालयों को 28 अक्टूबर को आयोजित गतिविधियों की रिपोर्ट उसी दिन अपलोड करनी होगी। इसके साथ गतिविधियों की जियो-टैग की गई तस्वीरें भी इको क्लब्स फॉर मिशन लाइफ पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।
जियो-टैग तस्वीरों के माध्यम से गतिविधियों के आयोजन से संबंधित स्थान की जानकारी भी दर्ज होती है। इस तरह विभाग अभियान के तहत स्कूलों में आयोजित गतिविधियों का रिकॉर्ड रख सकेगा।
बच्चों के जरिए परिवार और समाज तक पहुंचेगा जागरूकता का संदेश
ई-वेस्ट जागरूकता अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों को केवल जानकारी देना ही नहीं, बल्कि उन्हें व्यवहार में भी इलेक्ट्रॉनिक कचरे का सही प्रबंधन अपनाने के लिए प्रेरित करना है। विद्यार्थी अपने घरों में मौजूद पुराने मोबाइल, खराब चार्जर, बैटरियों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान को सामान्य कचरे में फेंकने के बजाय उनके उचित निस्तारण के बारे में परिवार के सदस्यों को बता सकेंगे।
शिक्षा विभाग की इस पहल से विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इलेक्ट्रॉनिक कचरे के जिम्मेदार प्रबंधन की आदत विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।








