FSSAI On Analogue Paneer: एनालॉग पनीर पर FSSAI का बड़ा कदम

Monika Das
0 सेकंड पहलेPolice ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.
Pranav Srivastava
0 सेकंड पहलेCBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.
Dev Kapoor
0 सेकंड पहलेSociety ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.
Ritika Ghosh
0 सेकंड पहलेYeh incident sun ke dil bhaari ho gaya.
Diya Gupta
16 मिनट पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Vihaan Patel
1 घंटे पहलेPoori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.
Aarohi Chaudhary
2 घंटे पहलेKanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.
Navya Nair
2 घंटे पहलेCBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.
Anjali Patil
4 घंटे पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने 24 सितंबर 2026 को पनीर से जुड़े नियमों को लेकर एक नया ड्राफ्ट जारी किया है। आधिकारिक अधिसूचना में ऐसे पनीर पर बिक्री संबंधी प्रतिबंध का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें दूध से प्राप्त घटकों की जगह गैर-दूध सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। प्रस्ताव का उद्देश्य ऐसे उत्पादों की पहचान और लेबलिंग को स्पष्ट करना है, ताकि उपभोक्ता पारंपरिक दूध से बने पनीर और एनालॉग उत्पाद के बीच अंतर समझ सकें। हालांकि यह अभी ड्राफ्ट नियम है और इसे अंतिम नियम नहीं माना जा सकता।
दूध से नहीं बने उत्पाद को पनीर नाम से बेचने पर रोक का प्रस्ताव
FSSAI के नए ड्राफ्ट में दूध से प्राप्त घटकों से नहीं बने पनीर को “Paneer” नाम से बेचने या पेश करने पर रोक का प्रस्ताव है। एनालॉग उत्पादों में दूध के कुछ घटकों की जगह वनस्पति तेल, फैट या अन्य गैर-दूध सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। समस्या उस समय पैदा होती है जब ऐसे उत्पाद को पारंपरिक डेयरी पनीर के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। FSSAI का ताजा कदम मुख्य रूप से उत्पाद की सही पहचान और उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी देने से जुड़ा है।
FSSAI ने मांगे सुझाव और आपत्तियां
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि FSSAI की 24 सितंबर की अधिसूचना अभी अंतिम नियम नहीं है। इसे Draft Food Safety and Standards (Prohibition and Restrictions on Sales) Amendment Regulations, 2026 के रूप में जारी किया गया है। प्राधिकरण ने संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। यानी अंतिम नियम लागू होने से पहले इस प्रक्रिया के तहत प्राप्त प्रतिक्रियाओं पर विचार किया जाएगा। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि पूरे देश में एनालॉग पनीर की बिक्री पर तत्काल अंतिम प्रतिबंध लागू हो गया है।
पहले भी पनीर के नाम पर एनालॉग उत्पाद को लेकर कार्रवाई
FSSAI पहले भी एनालॉग डेयरी उत्पादों की सही लेबलिंग को लेकर निर्देश जारी कर चुका है। अप्रैल 2026 में FSSAI के वेस्ट रीजन ने स्पष्ट किया था कि Cheese Analogue को “Paneer” के नाम से बेचना कानून का गंभीर उल्लंघन है। खाद्य कारोबारियों को ऐसे उत्पादों की सही और स्पष्ट पहचान बताने के निर्देश दिए गए थे। केंद्रीय लाइसेंस वाले फूड सर्विस प्रतिष्ठानों को भी कच्चे माल की जांच और सही नाम के इस्तेमाल पर निगरानी रखने को कहा गया था।
एनालॉग पनीर क्या होता है
एनालॉग पनीर ऐसा उत्पाद है जो पारंपरिक दूध आधारित पनीर जैसा दिखाई या इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन उसमें दूध के प्रमुख घटकों की जगह गैर-दूध सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे उत्पादों की संरचना अलग-अलग हो सकती है, इसलिए हर एनालॉग उत्पाद की पोषण संरचना भी एक जैसी नहीं होती। FSSAI की चिंता मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि उपभोक्ता को उत्पाद की वास्तविक प्रकृति स्पष्ट रूप से पता हो। किसी एनालॉग उत्पाद का होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह हर परिस्थिति में असुरक्षित है; नियामकीय मुद्दा उसकी सही पहचान, मानकों और बिक्री के तरीके से जुड़ा है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या बदलेगा
अगर प्रस्तावित नियम अंतिम रूप से लागू होते हैं तो डेयरी पनीर और गैर-दूध आधारित एनालॉग उत्पादों की लेबलिंग और नामकरण को लेकर ज्यादा स्पष्टता आ सकती है। इसका सीधा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहक जिस उत्पाद को पनीर समझकर खरीद रहा है, उसकी वास्तविक प्रकृति उसके सामने स्पष्ट हो। फिलहाल FSSAI की प्रक्रिया ड्राफ्ट चरण में है और अंतिम नियम आने के बाद ही इसकी पूरी कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी। इसलिए अभी इसे **“एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध का प्रस्ताव”** कहना अधिक सटीक है, न कि देशभर में लागू अंतिम प्रतिबंध।








