एक महीने में धंसी करोड़ों की पुलिया: धंसी पुलिया में फंसी 35 यात्रियों से भरी बस
Vaishali shinde
0 सेकंड पहलेCommunity ko mil ke aage aana hoga is mudde par.
Dhruv Bhatt
0 सेकंड पहलेYeh samajik mudda bahut gambhir hai, dhyan dena zaroori hai.
Sonu rai
0 सेकंड पहलेAam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.
Ravi sinha
0 सेकंड पहलेYeh mudda rajneeti se upar hai, insaniyat ki baat hai.
Vaishali shinde
0 सेकंड पहलेHum is cause ke saath hain, awaaz uthani chahiye.
Reyansh Joshi
0 सेकंड पहलेAise logon ko support karna humara farz hai.
छत्तीसगढ़ में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई सड़क और पुलिया की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। पेंड्रा–बिलासपुर मार्ग पर बांसाझाल के पास हाल ही में बनी पुलिया का एक हिस्सा अचानक धंस गया। इसी दौरान वहां से गुजर रही करीब 35 यात्रियों से भरी एक बस बीच रास्ते में फंस गई। बस चालक ने समय रहते वाहन रोककर बड़ी दुर्घटना टाल दी। घटना के बाद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई और मौके पर स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।
अचानक धंसी पुलिया, बीच रास्ते में फंस गई बस
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस जैसे ही नवनिर्मित पुलिया पर पहुंची, पुलिया का एक हिस्सा अचानक धंस गया। इससे बस बीच रास्ते में अटक गई और यात्रियों में दहशत फैल गई। चालक की सतर्कता के कारण बस आगे नहीं बढ़ी, जिससे संभावित बड़ा हादसा टल गया। सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
एक महीने पहले हुआ था निर्माण, गुणवत्ता पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क और पुलिया का निर्माण कार्य हाल ही में पूरा हुआ था और अभी एक महीना भी नहीं बीता है। इतने कम समय में पुलिया का धंस जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण में लापरवाही और घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया हो सकता है।
स्थानीय लोगों में आक्रोश, निष्पक्ष जांच की मांग
घटना के बाद आसपास के ग्रामीण और राहगीर मौके पर पहुंच गए। लोगों ने जिम्मेदार एजेंसी और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई। उनका कहना है कि यदि समय रहते बस नहीं रुकती तो बड़ी जनहानि हो सकती थी।
प्रशासन ने शुरू की जांच, आवाजाही रही प्रभावित
सूचना मिलते ही प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और पुलिया का निरीक्षण किया। सुरक्षा को देखते हुए मार्ग पर आवाजाही सीमित कर दी गई तथा वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने पूरे मामले की जांच कर निर्माण कार्य की गुणवत्ता और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की पड़ताल करने की बात कही है।
हादसे ने फिर खड़े किए बुनियादी ढांचे पर सवाल
यह घटना एक बार फिर सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े करती है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि नई सड़क और पुलिया कुछ ही दिनों में क्षतिग्रस्त हो जाए, तो यह सार्वजनिक धन के उपयोग और निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही पर गंभीर चिंता का विषय है। स्थानीय लोगों ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त निगरानी व्यवस्था लागू करने की मांग की है।






