Bhim Army Nationwide Protest: भीम आर्मी का देशभर में प्रदर्शन

Nidhi kumari
0 सेकंड पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Dev Kapoor
0 सेकंड पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Diya Gupta
0 सेकंड पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Arjun Singh
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
24 सितंबर 2026 को भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं ने सामाजिक न्याय, समान अवसर और वंचित वर्गों की भागीदारी से जुड़ी मांगों को लेकर कई स्थानों पर प्रदर्शन किया। यह गतिविधियां केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि अलग-अलग राज्यों और जिलों में जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन तथा राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपे जाने की खबरें सामने आई हैं। पूर्वी सिंहभूम में कार्यकर्ताओं ने सामाजिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में SC, ST, OBC, महिलाओं और अन्य वंचित समुदायों को उचित भागीदारी देने की मांग रखी। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को संवैधानिक अधिकारों से जोड़ते हुए सरकार से कार्रवाई की मांग की।
दिल्ली में जंतर-मंतर प्रदर्शन की अनुमति नहीं
भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी की ओर से 24 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'संपूर्ण भागीदारी आंदोलन' आयोजित करने की योजना थी। आंदोलन में महिला आरक्षण, आरक्षण व्यवस्था और वंचित वर्गों के प्रतिनिधित्व समेत कई मुद्दे उठाए जाने थे। हालांकि दिल्ली पुलिस की ओर से जंतर-मंतर पर प्रस्तावित कार्यक्रम की अनुमति नहीं दिए जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के बजाय अलग-अलग जिलों में प्रदर्शन और ज्ञापन देने का रास्ता अपनाया। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने भी 24 सितंबर को लोक निवास के आसपास प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए कई मार्गों पर यातायात प्रभावित होने की एडवाइजरी जारी की।
24 सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन
भीम आर्मी एकता मिशन और आजाद समाज पार्टी से जुड़े संगठनों ने कई स्थानों पर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपे। सिरमौर में दिए गए 24 सूत्रीय ज्ञापन में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण, दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए कोटे के भीतर कोटा, सरकारी सेवाओं में आरक्षण के प्रावधानों का पालन और बैकलॉग पदों को भरने जैसी मांगें रखी गईं। संगठन की ओर से यह भी कहा गया कि वंचित वर्गों को शिक्षा, रोजगार, राजनीति और प्रशासन में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। ये मांगें संबंधित संगठनों की ओर से रखी गई हैं और इन्हें सरकारी नीति या निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
फरीदाबाद में भी कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन
हरियाणा के फरीदाबाद में भी आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। रिपोर्ट के मुताबिक कार्यकर्ताओं ने बाटा मोड़ से सेक्टर-12 स्थित लघु सचिवालय की ओर मार्च किया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर कार्यक्रम की अनुमति नहीं मिलने के बाद संगठन ने हरियाणा के अलग-अलग जिलों में जिला उपायुक्तों को ज्ञापन देने की बात कही। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की और प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति तक अपनी मांगें पहुंचाने का प्रयास किया।
किसानों के आंदोलन अलग मुद्दों पर
इसी दौरान किसानों से जुड़े विरोध प्रदर्शनों की स्थिति भी अलग-अलग राज्यों में बनी हुई है। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी के नेतृत्व में किसानों ने धान की सरकारी खरीद जल्द शुरू करने की मांग को लेकर 22 सितंबर को दिल्ली-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग-44 को बाधित किया था। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। किसानों का कहना था कि मंडियों में धान पहुंच चुका है और सरकारी खरीद शुरू नहीं होने से उन्हें MSP पर बिक्री को लेकर परेशानी हो रही है। हरियाणा सरकार ने भी केंद्र से खरीद की तारीख आगे बढ़ाने का अनुरोध किया था, जबकि केंद्र की निर्धारित खरीद अवधि 1 अक्टूबर से शुरू होनी थी।
अलग-अलग आंदोलनों को एक समझना सही नहीं
24 सितंबर की उपलब्ध रिपोर्टों से स्पष्ट होता है कि भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी का आंदोलन मुख्य रूप से सामाजिक न्याय, आरक्षण, प्रतिनिधित्व और वंचित वर्गों से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है, जबकि किसानों के हालिया प्रदर्शनों में कृषि उपज की सरकारी खरीद और MSP जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं। दोनों वर्गों की ओर से अलग-अलग स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं, लेकिन उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों में इन दोनों आंदोलनों को एक ही संयुक्त राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन के रूप में स्थापित नहीं किया गया है। इसलिए खबर में इन्हें अलग-अलग घटनाक्रम के रूप में प्रस्तुत करना तथ्यात्मक रूप से अधिक सही रहेगा।








