KPSC SIT Probe Case: KPSC मामले में SC जाएगी कर्नाटक सरकार

KPSC मामले में SC जाएगी कर्नाटक सरकार
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Pranav Srivastava

Pranav Srivastava

1 घंटे पहले

Hamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.

Rohan Desai

Rohan Desai

2 घंटे पहले

Is niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.

Dev Kapoor

Dev Kapoor

4 घंटे पहले

Jai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.

Aarav Sharma

Aarav Sharma

5 घंटे पहले

Is niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.

Yash Kulkarni

Yash Kulkarni

5 घंटे पहले

Is decision ka poore desh par seedha asar padega.

Aarohi Chaudhary

Aarohi Chaudhary

7 घंटे पहले

Hamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.

Neel Saxena

Neel Saxena

7 घंटे पहले

Bharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.

Dhruv Bhatt

Dhruv Bhatt

9 घंटे पहले

Is decision ka poore desh par seedha asar padega.

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कर्नाटक सरकार ने Karnataka Public Service Commission यानी KPSC में कथित भर्ती अनियमितताओं की जांच के लिए हाईकोर्ट द्वारा गठित SIT के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर ली है। 24 सितंबर की रिपोर्टों के अनुसार सरकार और अभियोजन विभाग ने कानून विभाग के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसमें हाईकोर्ट के 21 सितंबर के आदेश के खिलाफ Special Leave Petition यानी SLP दाखिल करने की बात कही गई है। हाईकोर्ट ने 400 Veterinary Officers की भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच CID से हटाकर SIT को सौंपने का निर्देश दिया था। अब राज्य सरकार इस आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख करने की तैयारी में है।


हाईकोर्ट ने बनाई थी पांच सदस्यीय SIT
कर्नाटक हाईकोर्ट ने 21 सितंबर को KPSC भर्ती मामले की आगे की जांच के लिए पांच सदस्यीय Special Investigation Team गठित करने का आदेश दिया था। इस SIT की अध्यक्षता वरिष्ठ IPS अधिकारी अलोक कुमार को सौंपी गई है। टीम में अन्य IPS अधिकारी भी शामिल हैं और अदालत ने जांच पूरी करने के लिए 100 दिनों की समयसीमा तय की है। अदालत ने राज्य सरकार को SIT को औपचारिक रूप से पुलिस स्टेशन के रूप में अधिसूचित करने का निर्देश भी दिया था। आदेश में जांच में किसी अधिकारी या प्राधिकरण के हस्तक्षेप या प्रभाव डालने पर भी रोक लगाई गई है।


400 Veterinary Officer भर्ती पर है मामला
यह मामला KPSC के जरिए हुई करीब 400 Veterinary Officers की Group-A भर्ती में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। इस मामले में भर्ती प्रक्रिया को लेकर उम्मीदवारों और अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए थे। पहले मामले की जांच CID कर रही थी, लेकिन हाईकोर्ट ने आगे की जांच SIT से कराने का निर्देश दिया। अदालत ने मामले को CBI को सौंपने की मांग स्वीकार नहीं की और राज्य स्तर पर विशेष जांच टीम के जरिए जांच जारी रखने का आदेश दिया।

 

सरकार को SIT के गठन पर नहीं, तरीके पर आपत्ति
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने हाईकोर्ट के SIT गठित करने के फैसले का विरोध करने के बजाय मुख्य रूप से जांच टीम के प्रमुख अधिकारी के चयन को लेकर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जांच का नेतृत्व करने वाले अधिकारी का चयन कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में होना चाहिए। इसी कानूनी पहलू को लेकर राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही है। इससे पहले मुख्यमंत्री ने KPSC की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए थे और कहा था कि आयोग को बंद करने की संभावना पर कानूनी विशेषज्ञों से राय ली जा रही है।


जांच में सामने आए हैं पैसों के लेनदेन के आरोप
KPSC भर्ती मामले की मौजूदा जांच में कथित रिश्वत और पैसों के लेनदेन से जुड़े आरोप भी सामने आए हैं। Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक CID ने अदालत में बताया कि कुछ उम्मीदवारों से कथित तौर पर पैसे लिए गए और जांच में करीब 70 लाख रुपये के RTGS ट्रांसफर तथा अन्य वित्तीय लेनदेन की जानकारी सामने आई। जांच एजेंसी ने कथित तौर पर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और पैसों के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों की भी जानकारी दी है। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।


अब सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर नजर
कर्नाटक सरकार की ओर से हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ SLP दाखिल करने की तैयारी के बाद अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी। 24 सितंबर की रिपोर्टों के अनुसार सरकार ने चुनौती देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। दूसरी ओर हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक SIT को अपनी जांच निर्धारित समयसीमा में आगे बढ़ानी है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के SIT आदेश में हस्तक्षेप करता है या जांच मौजूदा व्यवस्था के तहत जारी रहती है।

 

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Pranav Srivastava

Pranav Srivastava

1 घंटे पहले

Hamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.

Rohan Desai

Rohan Desai

2 घंटे पहले

Is niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.

Dev Kapoor

Dev Kapoor

4 घंटे पहले

Jai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.

Aarav Sharma

Aarav Sharma

5 घंटे पहले

Is niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.

Yash Kulkarni

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5 घंटे पहले

Is decision ka poore desh par seedha asar padega.

Aarohi Chaudhary

Aarohi Chaudhary

7 घंटे पहले

Hamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.

Neel Saxena

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Bharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.

Dhruv Bhatt

Dhruv Bhatt

9 घंटे पहले

Is decision ka poore desh par seedha asar padega.

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