भोपाल कलेक्ट्रेट में DISHA बैठक में विवाद: बहस के बाद कांग्रेस विधायकों का वॉकआउट

Nisha Shah
0 सेकंड पहलेSarkar ko public ko jawab dena chahiye.
Tanya Bajaj
57 मिनट पहलेNishpaksh patrakarita ke liye shukriya, aise media chahiye.
Pranav Srivastava
2 घंटे पहलेNishpaksh patrakarita ke liye shukriya, aise media chahiye.
Ada khan
4 घंटे पहलेSarkar ko public ko jawab dena chahiye.
भोपाल कलेक्ट्रेट में आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (DISHA) की बैठक के दौरान भोपाल के लंबे समय से लंबित मास्टर प्लान को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। बैठक में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और आतिफ अकील तथा फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत के बीच तीखी बहस हुई। विवाद बढ़ने के बाद दोनों कांग्रेस विधायकों ने बैठक का बहिष्कार करते हुए वॉकआउट कर दिया।बैठक के दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और आतिफ अकील ने भोपाल के नए मास्टर प्लान के वर्षों से लंबित होने का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि मास्टर प्लान लागू नहीं होने से शहर का नियोजित विकास प्रभावित हो रहा है। इस विषय पर वे बैठक में मौजूद भोपाल सांसद आलोक शर्मा से चर्चा कर रहे थे।
हस्तक्षेप के बाद बढ़ी तीखी बहस
चर्चा के दौरान फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत ने भी अपनी बात रखनी चाही। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। बहस के दौरान आरिफ मसूद ने पूछा कि बीच में हस्तक्षेप किस अधिकार से किया जा रहा है, जबकि प्रमोद सिंह राजपूत ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच कुछ देर तक तीखी बहस होती रही, जिससे बैठक का माहौल तनावपूर्ण हो गया।
लगभग 10 मिनट तक चला हंगामा
करीब दस मिनट तक चली इस बहस के दौरान बैठक की कार्यवाही प्रभावित हुई। मौजूद अधिकारियों और अन्य जनप्रतिनिधियों ने स्थिति को सामान्य बनाने का प्रयास किया। सांसद आलोक शर्मा ने भी दोनों पक्षों को शांत कराने और बैठक जारी रखने की कोशिश की, लेकिन विवाद पूरी तरह शांत नहीं हो सका।
कांग्रेस विधायकों का वॉकआउट
विवाद के बाद कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और आतिफ अकील ने इसे जनप्रतिनिधियों के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताते हुए बैठक से वॉकआउट कर दिया। बाहर आने के बाद उन्होंने कहा कि प्रशासनिक बैठकों में जनप्रतिनिधियों के साथ इस प्रकार का व्यवहार उचित नहीं है और उन्होंने इसे गंभीर मामला बताया।
शिकायत करने की घोषणा
आरिफ मसूद ने कहा कि वे इस पूरे घटनाक्रम को विधायकों के विशेषाधिकार से जुड़ा विषय मानते हैं और इसकी शिकायत विधानसभा अध्यक्ष से करेंगे। उनका आरोप है कि बैठक के दौरान जनप्रतिनिधियों का सम्मान बनाए नहीं रखा गया।
दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क
जहां कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे केवल शहर के विकास से जुड़े अहम मुद्दे पर चर्चा कर रहे थे और बीच में अनावश्यक हस्तक्षेप हुआ, वहीं भाजपा पक्ष के नेताओं का कहना है कि बैठक में सभी जनप्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का अधिकार है। फिलहाल यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है और आगे की कार्रवाई संबंधित संवैधानिक एवं प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार होगी।








